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दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर: विकास और पर्यावरण संरक्षण का अद्भुत संगम, कल PM मोदी करेंगे उद्घाटन

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दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर: विकास और पर्यावरण संरक्षण का अद्भुत संगम, कल PM मोदी करेंगे उद्घाटन

देहरादून। देश की राजधानी दिल्ली और उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के बीच की दूरी अब न केवल कम होने जा रही है, बल्कि यह सफर वन्यजीवों और पर्यावरण के लिए भी सुरक्षित होने वाला है। 14 अप्रैल 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इस बहुप्रतीक्षित ‘दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर’ के उद्घाटन से पूर्व आज एक महत्वपूर्ण मीडिया ब्रीफिंग आयोजित की गई।

एशिया का सबसे लंबा वाइल्डलाइफ कॉरिडोर

​इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता इसका आखिरी 20 किलोमीटर का हिस्सा है, जो उत्तर प्रदेश के शिवालिक वन प्रभाग और उत्तराखंड के राजाजी टाइगर रिजर्व व देहरादून वन प्रभाग के घने जंगलों से होकर गुजरता है। वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यहाँ 12 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड वाइल्डलाइफ कॉरिडोर बनाया गया है, जो एशिया में अपनी तरह का सबसे लंबा कॉरिडोर है। इसमें विशेष रूप से ‘हाथी अंडरपास’ और अन्य वन्यजीव पास बनाए गए हैं ताकि जानवरों की आवाजाही में कोई बाधा न आए।

पर्यावरण संतुलन के लिए उठाए गए बड़े कदम

​मीडिया को संबोधित करते हुए बताया गया कि यह कॉरिडोर विकास और पारिस्थितिकी के बीच संतुलन का एक उत्कृष्ट उदाहरण है:​वृक्षारोपण: परियोजना के तहत 165.5 हेक्टेयर क्षेत्र में लगभग 1.95 लाख पेड़ लगाए गए हैं।​इको-रेस्टोरेशन: सुप्रीम कोर्ट मॉनिटरिंग कमेटी के निर्देशन में वन्यजीव संरक्षण हेतु 40 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि से इको-रेस्टोरेशन के कार्य किए जा रहे हैं।​प्रदूषण नियंत्रण: जानवरों को मानवीय शोर और रोशनी से बचाने के लिए कॉरिडोर पर साउंड बैरियर और लाइट बैरियर लगाए गए हैं।

कार्बन उत्सर्जन में कमी और आर्थिक लाभ

​रिपोर्ट के अनुसार, इस कॉरिडोर के निर्माण से अगले 20 वर्षों में 2.44 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आने का अनुमान है, जो करीब 60-65 लाख वृक्षों द्वारा किए जाने वाले कार्बन अवशोषण के बराबर है। साथ ही, सुगम यातायात से 19 प्रतिशत ईंधन की बचत भी होगी।

क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मिलेगी रफ्तार

​यह परियोजना न केवल यात्रा समय को घटाएगी, बल्कि उत्तराखंड में पर्यटन, व्यापार और स्थानीय रोजगार के नए अवसरों को भी जन्म देगी। वन्यजीवों के बीच बेहतर ‘जीन पूल’ (Genetic Exchange) सुनिश्चित करने के साथ-साथ यह कॉरिडोर भविष्य की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए एक मार्गदर्शक (Model) सिद्ध होगा।

​कल होने वाले इस ऐतिहासिक उद्घाटन के लिए प्रशासन ने सभी तैयारियाँ पूरी कर ली हैं, जो उत्तराखंड के विकास पथ पर एक ‘टर्निंग पॉइंट’ साबित हो सकता है।

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