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उत्तराखंड में बिजली संकट से निपटने के लिए UPCL की ‘वार रूम’ तैयारी; 1 मई से मिलेगी बड़ी राहत

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उत्तराखंड में बिजली संकट से निपटने के लिए UPCL की ‘वार रूम’ तैयारी; 1 मई से मिलेगी बड़ी राहत

देहरादून, 26 अप्रैल 2026:

भीषण गर्मी, अंतरराष्ट्रीय उथल-पुथल और नदियों के कम होते जलस्तर के बीच उत्तराखंड में गहराते बिजली संकट को थामने के लिए उत्तराखंड पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPCL) ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में राज्य ‘पॉवर डेफिसिट’ (बिजली की कमी) के दौर से गुजर रहा है, लेकिन बेहतर प्रबंधन और केंद्र सरकार के सहयोग से 1 मई 2026 तक स्थिति पूरी तरह सामान्य होने की उम्मीद है।

क्यों गहराया बिजली संकट?

​यूपीसीएल के प्रबंध निदेशक श्री जी.एस. बुदियाल के अनुसार, राज्य में बिजली की मांग और आपूर्ति के बीच असंतुलन पैदा होने के पीछे कई बड़े वैश्विक और स्थानीय कारण हैं:​भीषण हीट वेव: देशव्यापी लू के कारण बिजली की औसत मांग में 5% की वृद्धि दर्ज की गई है।​अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक तनाव: खाड़ी देशों में युद्ध जैसी परिस्थितियों के कारण गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे राज्य के 321 मेगावाट क्षमता वाले गैस आधारित बिजली संयंत्र ठप पड़े हैं।​हाइड्रो सेक्टर में गिरावट: अखिल भारतीय स्तर पर नदियों में पानी कम होने से जल विद्युत उत्पादन में कमी आई है।​घरेलू लोड में वृद्धि: उपभोक्ताओं द्वारा इंडक्शन कुकर और अन्य आधुनिक उपकरणों के बढ़ते उपयोग से 50 से 100 मेगावाट तक का अतिरिक्त बोझ ग्रिड पर पड़ा है।

मुख्यमंत्री का प्रयास: केंद्र से मिली संजीवनी

​राज्य की इस चुनौतीपूर्ण स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से विशेष हस्तक्षेप का आग्रह किया था। इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। ऊर्जा सचिव (भारत सरकार) श्री पंकज अग्रवाल ने आश्वासन दिया है कि 150 मेगावाट अतिरिक्त बिजली उत्तराखंड को केंद्रीय पूल से उपलब्ध कराई जाएगी।

​इसके अलावा, यूपीसीएल ने पहले ही केंद्रीय पूल से अप्रैल के लिए 120 मेगावाट और मई-जून के लिए 193 मेगावाट बिजली सुरक्षित कर ली है। उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग के अनुमोदन के बाद ‘एनर्जी एक्सचेंज’ के माध्यम से भी 1 मई से 15 मई के लिए 100 मेगावाट और 16 मई से 31 मई के लिए 225 मेगावाट बिजली खरीदने की व्यवस्था कर ली गई है।

हाई-प्रोफाइल समीक्षा बैठक

​बिजली आपूर्ति की निरंतरता बनाए रखने के लिए प्रमुख सचिव (ऊर्जा) डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम ने रविवार को एक उच्च स्तरीय बैठक की। इस बैठक में प्रबंध निदेशक समेत यूपीसीएल और पीएफसी (PFC) के वरिष्ठ अधिकारी और विशेषज्ञ मौजूद रहे। बैठक का मुख्य फोकस रीयल-टाइम मॉनिटरिंग और लोड प्रबंधन के जरिए उपभोक्ताओं को कम से कम परेशानी होने देना रहा।

प्रबंध निदेशक की अपील: 30 अप्रैल तक करें सहयोग

​यूपीसीएल के प्रबंध निदेशक ने जनता से भावुक अपील करते हुए कहा है कि विषम परिस्थितियों के बावजूद ग्रिड को स्थिर रखा गया है। उन्होंने कहा:​“हम 24 घंटे बिजली देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। 1 मई से आपूर्ति सुचारू करने के सभी पुख्ता प्रबंध कर लिए गए हैं। उपभोक्ताओं से अनुरोध है कि 30 अप्रैल तक बिजली प्रबंधन में विभाग का सहयोग करें।”

 

​आने वाले दिनों में जैसे-जैसे हिमालयी क्षेत्रों में जल प्रवाह बढ़ेगा और अतिरिक्त खरीद की बिजली सिस्टम में आएगी, उत्तराखंड के उद्योगों और आम उपभोक्ताओं को अघोषित कटौती से मुक्ति मिल जाएगी।

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