चमोली में कुदरत का कहर: आकाशीय बिजली गिरने से 413 भेड़-बकरियों की मौत, निजमूला घाटी में पशुपालकों पर टूटा दुखों का पहाड़
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चमोली में कुदरत का कहर: आकाशीय बिजली गिरने से 413 भेड़-बकरियों की मौत, निजमूला घाटी में पशुपालकों पर टूटा दुखों का पहाड़
चमोली | 04 मई, 2026
उत्तराखंड के सीमांत जनपद चमोली से एक बेहद हृदयविदारक घटना सामने आई है। जनपद की दुर्गम निजमूला घाटी के गौणा-भनाली तोक में आकाशीय बिजली गिरने से भारी तबाही हुई है। इस प्राकृतिक आपदा में अलग-अलग पशुपालकों की लगभग 413 भेड़-बकरियों की दर्दनाक मृत्यु हो गई है। घटना के बाद से पूरी घाटी में शोक की लहर है, क्योंकि इन बेजुबान जानवरों की क्षति से स्थानीय पशुपालकों की आजीविका पर गहरा संकट खड़ा हो गया है।
प्रशासन की त्वरित कार्रवाई और स्थलीय निरीक्षण
घटना की सूचना मिलते ही जिलाधिकारी गौरव कुमार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल रिस्पांस टीम को सक्रिय किया। जिलाधिकारी के सख्त निर्देशों पर राजस्व, पशुपालन और वन विभाग की एक संयुक्त टीम को दुर्गम घटनास्थल के लिए रवाना किया गया।
प्रशासनिक टीम ने पैदल और कठिन रास्तों को पार करते हुए गौणा-भनाली तोक पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। इस त्वरित कार्रवाई का उद्देश्य प्रभावित पशुपालकों को समय पर राहत पहुंचाना और क्षति का सटीक आकलन करना था।
पोस्टमार्टम और जांच रिपोर्ट: 413 पशुओं की पुष्टि
मौके पर पहुंची पशुपालन विभाग की टीम ने मृत पशुओं का चिकित्सकीय परीक्षण शुरू कर दिया है। मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी (सीवीओ) चमोली, डॉ. असीम देब ने बताया कि:प्रारंभिक जांच और स्थलीय निरीक्षण के अनुसार, खराब मौसम और आकाशीय बिजली की चपेट में आने से यह बड़ी क्षति हुई है। अब तक 413 भेड़-बकरियों की मृत्यु की आधिकारिक पुष्टि हो चुकी है। चिकित्सकों की टीम द्वारा मृत पशुओं का पोस्टमार्टम किया जा रहा है ताकि नियमानुसार रिपोर्ट तैयार की जा सके।”
राजस्व और वन विभाग की टीमें भी संयुक्त रूप से घटनास्थल पर डटी हुई हैं। वन विभाग इस बात की जांच कर रहा है कि घटना वन क्षेत्र के भीतर की है या राजस्व क्षेत्र की, ताकि मुआवजे की फाइल में कोई तकनीकी अड़चन न आए।
पशुपालकों की आजीविका पर वज्रपात
निजमूला घाटी के पशुपालकों के लिए ये भेड़-बकरियां केवल जानवर नहीं, बल्कि उनकी जमा-पूंजी और साल भर की कमाई का एकमात्र जरिया थीं। अचानक हुई इस तबाही ने प्रभावित परिवारों को दाने-दाने के लिए मोहताज कर दिया है। स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि बिजली इतनी जोरदार थी कि पशुओं को संभलने का मौका भी नहीं मिला।
सरकार और प्रशासन का आश्वासन: मिलेगा उचित मुआवजा
जिलाधिकारी गौरव कुमार ने इस आपदा पर गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए प्रभावित परिवारों को ढांढस बंधाया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार संकट की इस घड़ी में पशुपालकों के साथ खड़ी है।मुआवजा प्रक्रिया: जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि अहैतुक सहायता और क्षतिपूर्ति की रिपोर्ट अविलंब तैयार की जाए।त्वरित सहायता: प्रभावित परिवारों को नियमानुसार हर संभव आर्थिक और अन्य सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया है।
सुरक्षा की अपील
जिला प्रशासन ने अन्य पशुपालकों और उच्च हिमालयी क्षेत्रों में रह रहे ग्रामीणों से अपील की है कि वे बदलते मौसम के दौरान सतर्क रहें और बिजली कड़कने या भारी बारिश की स्थिति में सुरक्षित स्थानों पर शरण लें।
वर्तमान में पूरी टीम मौके पर मौजूद है और राहत कार्य युद्धस्तर पर जारी है।
प्रेषक: सोहन सिंह चमोली
