राष्ट्रीय महत्व के कार्यों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं: श्रीनगर में सचिव दीपक कुमार ने कसी जनगणना अधिकारियों की कमर
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राष्ट्रीय महत्व के कार्यों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं: श्रीनगर में सचिव दीपक कुमार ने कसी जनगणना अधिकारियों की कमर
श्रीनगर (गढ़वाल): उत्तराखंड शासन के वरिष्ठ अधिकारी और सचिव (संस्कृत शिक्षा, जनगणना एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन) श्री दीपक कुमार ने आज अपने चमोली जनपद के प्रस्तावित भ्रमण से पूर्व श्रीनगर में जनगणना कार्यों की ज़मीनी हकीकत टटोली। श्रीनगर स्थित गढ़वाल मंडल विकास निगम (GMVN) के परिसर में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में उन्होंने स्पष्ट किया कि जनगणना जैसे राष्ट्रीय महत्व के कार्यों को समयबद्ध और त्रुटिहीन तरीके से पूरा करना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
जनगणना कार्यों की गहन समीक्षा: 50 प्रतिशत लक्ष्य हासिल
बैठक के दौरान सचिव दीपक कुमार ने ‘हाउस लिस्टिंग’ (मकानों के सूचीकरण) संबंधी कार्यों की बिंदुवार समीक्षा की। इस अवसर पर तहसील श्रीनगर और नगर निगम श्रीनगर के चार्ज जनगणना अधिकारी मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
सचिव ने अधिकारियों से अब तक की प्रगति का डेटा तलब किया और फील्ड में प्रगणकों (Enumerators) को आ रही व्यावहारिक कठिनाइयों के बारे में विस्तार से चर्चा की। समीक्षा के दौरान अधिकारियों ने अवगत कराया कि:श्रीनगर क्षेत्र में लगभग 50 प्रतिशत जनगणना कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिया गया है।शेष कार्यों के लिए कार्ययोजना तैयार है और इसे निर्धारित समय सीमा (Deadline) से पूर्व ही 100 प्रतिशत संपन्न कर लिया जाएगा।
श्री दीपक कुमार ने कड़े निर्देश देते हुए कहा कि जनगणना केवल एक सांख्यिकीय प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह भविष्य की सरकारी योजनाओं और देश के विकास का आधार है। इसमें किसी भी प्रकार की देरी या डेटा में विसंगति को गंभीरता से लिया जाएगा।
द्वितीय राजभाषा का सम्मान: अब संस्कृत में भी चमकेंगे कार्यालयों के बोर्ड
जनगणना की समीक्षा के उपरांत, सचिव ने राज्य की द्वितीय राजभाषा ‘संस्कृत’ के प्रचार-प्रसार और प्रशासनिक उपयोग को लेकर बेहद महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए। उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान को अक्षुण्ण रखने के लिए संस्कृत का दैनिक कामकाज में समावेश अनिवार्य है।
अधिकारियों को दिए गए प्रमुख निर्देश:नाम पट्टिकाओं का मानकीकरण: नगर निगम और तहसील परिसर के मुख्य कार्यालय बोर्डों पर अनिवार्य रूप से संस्कृत भाषा का उपयोग किया जाए।अधिकारी कक्षों की पहचान: समस्त विभाग प्रभारियों और अधिकारियों के कक्षों के बाहर लगी नाम पट्टिकाओं (Name Plates) को भी संस्कृत में लिखा जाए।जागरूकता: कार्यालय परिसरों में संस्कृत के श्लोकों या वाक्यों के माध्यम से जनमानस को इस प्राचीन भाषा के प्रति जागरूक किया जाए।
प्रशासनिक सतर्कता और आगामी दौरा
बैठक के समापन पर सचिव ने अधिकारियों को कार्य संस्कृति में सुधार लाने और जनता के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने की नसीहत दी। श्रीनगर में इस महत्वपूर्ण समीक्षा के बाद सचिव अपने निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार चमोली जनपद के लिए रवाना हो गए।
श्रीनगर में हुई इस सक्रियता से प्रशासनिक महकमे में हलचल तेज हो गई है। खासकर संस्कृत को अनिवार्य रूप से बोर्डों पर अंकित करने के निर्देश को राज्य सरकार की ‘अपनी भाषा-अपनी पहचान’ मुहिम को धरातल पर उतारने के एक बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है।
रिपोर्ट: न्यूज़ डेस्क, श्रीनगर।
