संस्कृत ग्राम पाण्डेगांव में गूँजा देवभाषा का स्वर: सचिव दीपक गैराला ने ग्रामीणों के जज्बे को सराहा
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संस्कृत ग्राम पाण्डेगांव में गूँजा देवभाषा का स्वर: सचिव दीपक गैराला ने ग्रामीणों के जज्बे को सराहा
पाण्डेगांव, कोटाबाग (नैनीताल)। उत्तराखण्ड की वादियों में बसी देवभाषा संस्कृत की सुगन्ध अब धरातल पर उतरने लगी है। जनपद नैनीताल के विकासखण्ड कोटाबाग स्थित संस्कृत ग्राम पाण्डेगांव में सोमवार को उस समय उत्सव जैसा नजारा दिखा, जब उत्तराखण्ड शासन के सचिव (संस्कृत शिक्षा, जनगणना एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन) दीपक गैराला ने गांव का निरीक्षण किया। ग्रामीणों, महिलाओं और बच्चों ने जिस आत्मीयता और संस्कृतमय वातावरण में उनका स्वागत किया, उसने यह सिद्ध कर दिया कि संस्कृत केवल शास्त्रों की भाषा नहीं, बल्कि लोक व्यवहार की जीवंत भाषा बन रही है।
संस्कृत में स्वागत और सांस्कृतिक छटा
कार्यक्रम का आगाज गांव के नन्हे-मुन्ने बच्चों द्वारा प्रस्तुत मधुर संस्कृत स्वागत गीत से हुआ। बच्चों ने जब पूरी लयबद्धता के साथ श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोकों का सस्वर पाठ किया, तो पूरा वातावरण भक्तिमय और ऊर्जा से भर गया। पारम्परिक वेशभूषा में सजी ग्राम की महिलाओं ने अतिथियों का भव्य सत्कार किया। इस निरीक्षण की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि यहाँ बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग सामान्य बोलचाल में भी संस्कृत का प्रयोग कर रहे थे, जिसे देख सचिव महोदय मंत्रमुग्ध रह गए।
संस्कृत हमारी ज्ञान-परम्परा की मूल भाषा: दीपक गैराला
उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए सचिव दीपक गैराला ने ग्रामीणों के समर्पण की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा:”संस्कृत हमारी संस्कृति, परम्परा और ज्ञान-विज्ञान की जननी है। उत्तराखण्ड की द्वितीय राजभाषा होने के नाते इसका संरक्षण हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है। पाण्डेगांव ने यह दिखा दिया है कि यदि मन में उत्साह हो, तो देवभाषा को सुनकर और बोलकर सहज ही आत्मसात किया जा सकता है।”
सरकार की नई पहल और छात्रवृत्तियाँ
संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा देने के सरकारी प्रयासों पर चर्चा करते हुए सचिव महोदय ने महत्वपूर्ण जानकारी साझा की:गार्गी छात्रवृत्ति योजना: संस्कृत शिक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार विशेष छात्रवृत्ति प्रदान कर रही है।बालिका शिक्षा पर जोर: हरिद्वार में संस्कृत पढ़ने वाली बालिकाओं के लिए 150 बेड का आधुनिक छात्रावास संचालित किया जा रहा है।डिजिटल लर्निंग: उन्होंने ग्रामीणों को रेडियो पर प्रसारित होने वाले संस्कृत समाचारों से जुड़ने का आह्वान किया ताकि भाषा कौशल में और निखार आए।
विकास के लिए संसाधनों का आश्वासन
ग्राम प्रधान प्रभा पाण्डे ने गांव में संस्कृत के प्रचार-प्रसार हेतु आवश्यक संसाधनों और बुनियादी ढाँचे की मांग सचिव के सम्मुख रखी। इस पर श्री गैराला ने पूर्ण सहयोग और हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया।
कार्यक्रम की गरिमामयी उपस्थिति
इस भव्य आयोजन का संचालन संस्कृत प्रशिक्षक दीपक पाण्डे द्वारा किया गया। कार्यक्रम में सहायक निदेशक (संस्कृत शिक्षा) यशोदा प्रसाद सेमल्टी, खण्ड विकास अधिकारी श्वेता सैनी, डॉ. हरिचन्द्र गुरूरानी, और शोध अधिकारी दुर्गादत्त कपिलाश्रमी सहित कई गणमान्य नागरिक और शिक्षक उपस्थित रहे। अंत में ग्राम प्रधान प्रभा पाण्डे ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया।
यह आयोजन केवल एक सरकारी निरीक्षण मात्र नहीं था, बल्कि उत्तराखण्ड के “संस्कृत ग्राम” संकल्पना को धरातल पर चरितार्थ करने की एक सशक्त मिसाल पेश कर गया।
