चारधाम यात्रा में जीवनदाता बना एसटीईएमआई (STEMI) प्रोग्राम: चमोली में सुरक्षित होती तीर्थयात्रियों की सांसें
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चारधाम यात्रा में जीवनदाता बना एसटीईएमआई (STEMI) प्रोग्राम: चमोली में सुरक्षित होती तीर्थयात्रियों की सांसें
चमोली, 12 मई 2026
उत्तराखंड की विश्वप्रसिद्ध चारधाम यात्रा केवल आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और उच्च हिमालयी क्षेत्रों की चुनौतीपूर्ण यात्रा भी है। कम ऑक्सीजन और अत्यधिक ऊंचाई के कारण अक्सर तीर्थयात्रियों को हृदय संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कुशल मार्गदर्शन और स्वास्थ्य विभाग की तत्परता से संचालित एसटीईएमआई (STEMI) प्रोग्राम चमोली जनपद में यात्रियों के लिए ‘जीवनदाता’ बनकर उभरा है।
तकनीक और स्वास्थ्य का समन्वय
चमोली जनपद में बदरीनाथ यात्रा मार्ग पर स्वास्थ्य सेवाओं को हाई-टेक बनाते हुए 14 प्रमुख स्थानों पर ईसीजी (ECG) जांच और थ्रोम्बोलिसिस की सुविधा सुनिश्चित की गई है। इनमें बदरीनाथ धाम, जोशीमठ, गडोरा, मंडल, लंगासू, गौचर और गोविंदघाट जैसे महत्वपूर्ण पड़ाव शामिल हैं।
एसीएमओ डॉ. वैष्णव कृष्णा के अनुसार, इन केंद्रों पर आई-पैड युक्त डिजिटल ईसीजी मशीनें उपलब्ध कराई गई हैं। इन मशीनों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि जांच रिपोर्ट तुरंत संबंधित चिकित्सालयों और स्वास्थ्य निदेशालय को डिजिटल रूप में प्राप्त हो जाती है। इससे विशेषज्ञ डॉक्टर कहीं से भी रिपोर्ट का विश्लेषण कर तत्काल उपचार के निर्देश दे सकते हैं।
बचाई गई अनमोल जानें
आंकड़ों की बात करें तो यात्रा सीजन के दौरान अब तक 148 तीर्थयात्रियों की सघन जांच की जा चुकी है। जांच के दौरान 5 तीर्थयात्रियों में गंभीर हार्ट अटैक (STEMI) के लक्षण पाए गए, जिन्हें बिना समय गंवाए तत्काल उपचार देकर मौत के मुंह से बाहर निकाला गया। स्वास्थ्य विभाग की सतर्कता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि बदरीनाथ धाम में एक मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे तत्काल प्राथमिक उपचार दिया गया और फिर हेली एम्बुलेंस के जरिए ऋषिकेश एम्स (AIIMS) रेफर किया गया। इसके अतिरिक्त 47 ऐसे असामान्य मामले सामने आए हैं, जिन्हें विशेषज्ञों की निगरानी में रखा गया है।
क्या है एसटीईएमआई (STEMI) और थ्रोम्बोलिसिस?
हृदय घात की स्थिति में समय ही सबसे बड़ी औषधि होती है। स्वास्थ्य विभाग ने इसे ‘गोल्डन ऑवर’ प्रबंधन के तहत लागू किया है:
एसटीईएमआई (ST-Segment Elevation Myocardial Infarction): यह दिल के दौरे का सबसे गंभीर प्रकार है। इसमें हृदय को रक्त पहुँचाने वाली कोरोनरी धमनी पूरी तरह अवरुद्ध हो जाती है। यदि कुछ ही मिनटों में रक्त प्रवाह बहाल न हो, तो हृदय की मांसपेशियां स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त हो सकती हैं।थ्रोम्बोलिसिस (Thrombolysis) थेरेपी: इसे आम भाषा में ‘क्लॉट बस्टर’ थेरेपी भी कहते हैं। इसमें विशेष दवाओं के जरिए रक्त की नली में जमे थक्के को घोला जाता है। जोशीमठ, गोपेश्वर और कर्णप्रयाग में विशेष थ्रोम्बोलिसिस सेंटर बनाए गए हैं ताकि दुर्गम क्षेत्रों में भी मरीजों को बड़े अस्पतालों जैसा आपातकालीन उपचार मिल सके।
सुरक्षित यात्रा का संकल्प
मुख्यमंत्री के निर्देशों पर स्वास्थ्य विभाग ने इस बार ‘जीरो कैजुअलिटी’ के लक्ष्य के साथ काम शुरू किया है। यात्रा मार्ग पर ईसीजी मशीनों की तैनाती और अनुभवी पैरामेडिकल स्टाफ की मौजूदगी ने यात्रियों के मन में सुरक्षा का भाव पैदा किया है। चमोली जिले के दुर्गम पड़ावों पर जिस प्रकार डिजिटल हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर का उपयोग हो रहा है, वह आधुनिक चिकित्सा पद्धति का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
राज्य सरकार की यह पहल न केवल चारधाम यात्रा को सुगम बना रही है, बल्कि यह संदेश भी दे रही है कि देवभूमि में आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु की सेहत और सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। यदि आप भी यात्रा पर हैं और सीने में भारीपन या बेचैनी महसूस करते हैं, तो निकटतम एसटीईएमआई केंद्र पर जाकर अपनी जांच अवश्य कराएं।
सोहन सिंह की रिपोर्ट, चमोली।
