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शिक्षक ताउम्र रिटायर्ड नहीं होता, वे समाज के शिल्पकार हैं: पूर्व मंत्री शादाब फातिमा

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शिक्षक ताउम्र रिटायर्ड नहीं होता, वे समाज के शिल्पकार हैं: पूर्व मंत्री शादाब फातिमा

  • बहादुरगंज (गाज़ीपुर)।
  • रिपोर्टर: अकील अहमद

​शिक्षा क्षेत्र कासिमाबाद के अंतर्गत आने वाले कंपोजिट विद्यालय देवली, सलामतपुर के प्रांगण में शनिवार का दिन बेहद भावुक और ऐतिहासिक रहा। अवसर था विद्यालय के ऊर्जावान प्रधानाध्यापक और शिक्षक संघ के संरक्षक मोहम्मद अली खान के विदाई सह सम्मान समारोह का। इस भव्य समारोह का आयोजन विद्यालय परिवार द्वारा बड़े ही धूमधाम और आदर सत्कार के साथ किया गया, जिसमें क्षेत्र के तमाम गणमान्य नागरिकों, शिक्षकों और छात्रों ने हिस्सा लिया।

​विदाई की इस बेला में जहाँ एक ओर विदा होने वाले गुरुजी के प्रति गहरा सम्मान दिखा, वहीं दूसरी ओर विद्यालय के शिक्षक, शिक्षिकाएं और नन्हे-मुन्ने बच्चे अपनी भावनाओं को रोक नहीं पाए और उनकी आँखें नम हो गईं।

​मुख्य अतिथि पूर्व मंत्री सैयदा शादाब फातिमा ने बांधा समां

​इस विदाई सह सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उत्तर प्रदेश सरकार की पूर्व मंत्री सैयदा शादाब फातिमा ने शिरकत की। अपने संबोधन में उन्होंने शिक्षा और शिक्षक के महत्व को रेखांकित करते हुए एक बेहद मर्मस्पर्शी बात कही। उन्होंने कहा:​”शिक्षक कभी ताउम्र रिटायर्ड नहीं होता। वह नौकरी से भले ही सेवामुक्त हो जाए, लेकिन समाज को दिशा देने का उसका दायित्व कभी खत्म नहीं होता।”

 

​पूर्व मंत्री ने आगे कहा कि प्राथमिक स्तर पर छोटे बच्चों को पढ़ाना और उन्हें अनुशासन सिखाना दुनिया के सबसे मुश्किल कार्यों में से एक है। शिक्षक ही वह शिल्पकार हैं जो बच्चों की नींव को मजबूत बनाने का काम करते हैं और उनके स्वर्णिम भविष्य की आधारशिला रखते हैं। उन्होंने निवर्तमान प्रधानाध्यापक मोहम्मद अली खान के कार्यकाल की सराहना करते हुए उनसे आग्रह किया कि वे सेवानिवृत्ति के बाद भी समाज में शिक्षा की ज्योति जलाने और ज्ञान की अविरल धारा को समाज के हर वर्ग तक प्रवाहित करने का अपना मिशन जारी रखें।

​विदाई गीतों से गमगीन हुआ माहौल, छलक उठे आंसू

​समारोह की शुरुआत छात्र-छात्राओं द्वारा प्रस्तुत मां सरस्वती की वंदना से हुई। इसके बाद जैसे ही छात्राओं ने मंच पर विदाई गीत की मधुर और मार्मिक प्रस्तुति दी, वहाँ उपस्थित हर शख्स की आँखें नम हो गईं।

​गुरु और शिष्य के अनूठे रिश्ते की गवाह बन रही इस महफिल में विदाई की घड़ी आते ही माहौल पूरी तरह से गमगीन हो गया। अपने प्रिय प्रधानाध्यापक को विदा करते समय साथी शिक्षकों, शिक्षिकाओं और मासूम बच्चों के आंसुओं ने यह साबित कर दिया कि मोहम्मद अली खान ने केवल शिक्षा ही नहीं दी, बल्कि अपने व्यवहार से सबके दिलों में एक अमिट जगह बनाई थी। विद्यालय परिवार की ओर से उन्हें अंगवस्त्र, स्मृति चिह्न और उपहार भेंट कर सम्मानित किया गया।

​क्षेत्र के प्रबुद्ध जन और शिक्षक रहे उपस्थित

​मोहम्मद अली खान के विदाई समारोह को यादगार बनाने के लिए कासिमाबाद और बहादुरगंज क्षेत्र के शिक्षक समुदाय और संभ्रांत नागरिकों ने बड़ी संख्या में उपस्थिति दर्ज कराई। इस अवसर पर मुख्य रूप से उपस्थित रहने वाले सहयोगियों और अतिथियों में शामिल रहे:प्रमुख शिक्षक व सहयोगी: राकेश तिवारी, हीरामणि चौहान, राजेश सिंह, चंद्र प्रकाश राय, राजेश श्रीवास्तव।​गणमान्य नागरिक व प्रबुद्ध वर्ग: मास्टर शाही, अरुण जायसवाल, शमशेर अहमद, सुधांशु खरवार, रविंद्र यादव, मुबारक खान, मिसबाहुर्रहमान, श्याम बिहारी वर्मा।​महिला शिक्षिकाएं व अन्य सदस्य: सावित्री मिश्रा, मंजू यादव, मिथिलेश कुमार, सलमान खान, संजय विश्वकर्मा, इनायतुल्लाह खान, सुनील जायसवाल आदि।

​समारोह के अंत में विद्यालय प्रशासन और उपस्थित जनसमूह ने मोहम्मद अली खान के उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और सुखद भविष्य की कामना करते हुए उन्हें ससम्मान विदा किया। यह कार्यक्रम क्षेत्र में लंबे समय तक एक आदर्श शिक्षक के प्रति सम्मान के उदाहरण के रूप में याद किया जाएगा

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