उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय (यूओयू) द्वारा मणिगुह गांव में विशाल जन-जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन: शिक्षा, कृषि और सतत विकास पर मंथन
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उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय (यूओयू) द्वारा मणिगुह गांव में विशाल जन-जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन: शिक्षा, कृषि और सतत विकास पर मंथन
प्रस्तावना: ग्रामीण विकास की ओर एक अनूठा कदम
शिक्षा और जागरूकता ही किसी भी समाज के विकास की आधारशिला होती है। इसी पावन उद्देश्य के साथ, उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय (यूओयू) के कर्णप्रयाग क्षेत्रीय केंद्र द्वारा एक सराहनीय और दूरगामी पहल की गई। विश्वविद्यालय द्वारा गोद लिए गए आदर्श ग्राम मणिगुह के पंचायत घर में दिनांक १० जून २०२६ को एक विशाल जन-जागरूकता कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीणों, युवाओं और महिलाओं को शिक्षा, स्वरोजगार, आधुनिक कृषि और सामाजिक सशक्तिकरण के प्रति जागरूक करना था। कार्यक्रम में स्थानीय ग्रामीणों, ऊर्जावान युवाओं और विद्यार्थियों ने बड़े उत्साह और सक्रियता के साथ भाग लिया।
कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ एवं स्वागत
इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम की अध्यक्षता मणिगुह के ग्राम प्रधान श्री माणिक लाल जी द्वारा की गई। कार्यक्रम के शुभारंभ पर ग्राम प्रधान श्री माणिक लाल तथा स्थानीय पुस्तकालय संचालक श्री महेश नेगी ने विश्वविद्यालय से आए प्रबुद्ध प्रतिनिधियों और विशेषज्ञों का पारंपरिक रूप से आत्मीय स्वागत एवं सम्मान किया।
कार्यक्रम की शुरुआत में उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय की सहायक क्षेत्रीय निदेशक प्रियंका लोहानी ने विश्वविद्यालय की “गोद लिए गए गांव” (अंगीकृत ग्राम) की अनूठी अवधारणा और विजन पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने ग्रामीणों को आश्वस्त करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय इस गांव के चहुंमुखी विकास के लिए प्रतिबद्ध है। आने वाले समय में विश्वविद्यालय द्वारा गांव में:
- उच्च शिक्षा का विस्तार,
- स्वास्थ्य एवं स्वच्छता अभियान,
- महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता,
- युवाओं के लिए कौशल विकास कार्यक्रम, तथा
- सामाजिक जागरूकता से जुड़े विभिन्न सर्वेक्षणों और योजनाओं का संचालन किया जाएगा।
अपने संबोधन में उन्होंने शिक्षा के महत्व को रेखांकित करते हुए एक अत्यंत प्रेरणादायक बात कही:
“शिक्षा हर समस्या और हर मुसीबत का सबसे प्रभावी समाधान है। शिक्षित समाज ही समृद्ध और आत्मनिर्भर समाज का निर्माण करता है।”
कौशल आधारित शिक्षा और इको-टूरिज्म पर बल
विश्वविद्यालय के मानविकी विद्याशाखा के निदेशक, प्रोफेसर गिरीजा पांडेय ने ग्रामीण युवाओं के भविष्य को संवारने के लिए व्यावसायिक प्रमाणपत्र (सर्टिफिकेट) और डिग्री पाठ्यक्रमों की विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने रोजगार और स्वरोजगार के अवसरों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्तमान प्रतिस्पर्धी युग में केवल किताबी ज्ञान काफी नहीं है, बल्कि कौशल आधारित (स्किल-बेस्ड) शिक्षा ही युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की सबसे महत्वपूर्ण कुंजी है।
प्रो. पांडेय ने उत्तराखंड के उन विभिन्न गांवों के ‘विकास मॉडल’ का उदाहरण प्रस्तुत किया जो पूर्व में आदर्श ग्राम बन चुके हैं। उन्होंने ग्रामीणों को प्रेरित किया कि वे मणिगुह गांव में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों की उपयोगिता को समझें और उनका सही दिशा में दोहन करें। ग्रामीण आर्थिकी को मजबूत करने के लिए उन्होंने विश्वविद्यालय के ‘असिस्टेंट होम स्टे मैनेजर’ पाठ्यक्रम की विशेष जानकारी दी। उन्होंने ग्रामीणों को सुझाव दिया कि वे अपने गांव की समृद्ध संस्कृति और सुंदर वादियों का उपयोग कर ‘इको टूरिज्म’ (पारिस्थितिक पर्यटन) को बढ़ावा दे सकते हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर ही रोजगार के बेहतरीन अवसर पैदा होंगे और पलायन पर रोक लगेगी।
जैवविविधता संरक्षण और उन्नत कृषि की राह
कार्यक्रम के अगले चरण में, कृषि और पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ. एस. एन. ओझा ने गांव की समृद्ध जैवविविधता की ओर ग्रामीणों का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने पारंपरिक और आधुनिक कृषि के समन्वय पर जोर देते हुए प्राकृतिक संपदा के संरक्षण तथा उसके सतत (सस्टेनेबल) उपयोग के तरीके बताए।
डॉ. ओझा ने मणिगुह और आसपास के पर्वतीय क्षेत्रों में पाए जाने वाले बहुमूल्य औषधीय पौधों (जड़ी-बूटियों) की पहचान कराई और उनके वैज्ञानिक विपणन (मार्केटिंग) की बारीकियों से अवगत कराया ताकि ग्रामीणों को उनकी उपज का सही मूल्य मिल सके। इसके साथ ही, उन्होंने जैवविविधता पब्लिक रजिस्टर (पी.बी.आर.) के महत्व को समझाया और कहा कि गांव के विकास और पर्यावरण को बचाने में देश के प्रगतिशील किसानों की भूमिका सबसे अहम है।
सराहना एवं आभार प्रदर्शन
विश्वविद्यालय के इस अभिनव और कल्याणकारी प्रयास की ग्राम प्रधान सहित उपस्थित सभी गणमान्य नागरिकों ने भूरि-भूरि प्रशंसा की। ग्रामीणों ने कहा कि दूरदराज के क्षेत्रों में इस तरह के आयोजनों से समाज के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति को भी मुख्यधारा से जुड़ने का अवसर मिलता है। ग्राम प्रधान ने ग्रामीणों का आह्वान किया कि वे अपनी और अपने बच्चों की उन्नति के लिए शिक्षा के इस अवसर का पूरा लाभ उठाएं।
कार्यक्रम के समापन पर ग्राम प्रधान श्री माणिक लाल जी ने विश्वविद्यालय परिवार, आए हुए अतिथियों और सभी ग्रामीणों का हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने विश्वविद्यालय से अनुरोध किया कि भविष्य में भी जनहित और ग्रामीण उत्थान से जुड़े ऐसे ज्ञानवर्धक आयोजनों को नियमित रूप से आयोजित किया जाता रहे।
संक्षेप में कहा जाए तो उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय का यह जागरूकता अभियान केवल शिक्षा के प्रचार-प्रसार तक सीमित नहीं था। यह मणिगुह गांव के समग्र ग्रामीण विकास, महिला जन-जागरूकता, कृषि उन्नयन, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सशक्तिकरण की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हुआ, जो आने वाले समय में गांव को आत्मनिर्भरता के मार्ग पर ले जाएगा।
