चमोली में मानसून की तैयारियों को लेकर राज्य स्तरीय मॉक ड्रिल आयोजित, आपदा प्रबंधन तंत्र ने परखी अपनी मुस्तैदी
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चमोली में मानसून की तैयारियों को लेकर राज्य स्तरीय मॉक ड्रिल आयोजित, आपदा प्रबंधन तंत्र ने परखी अपनी मुस्तैदी
सोहन सिंह चमोली, 02 जुलाई 2026 (सू.वि.)
उत्तराखण्ड में मानसून के आगमन के साथ ही प्राकृतिक आपदाओं से निपटने और राहत व बचाव कार्यों को त्वरित गति देने के लिए प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां तेज हो गई हैं। इसी कड़ी में गुरुवार को उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (USDMA) के तत्वावधान में जनपद चमोली में राज्य स्तरीय मानसून तैयारी मॉक अभ्यास-2026 का आयोजन किया गया। इस मॉक ड्रिल के माध्यम से जिला प्रशासन, आपदा प्रबंधन टीम और विभिन्न विभागों ने अपनी कार्यप्रणाली, आपसी समन्वय और तत्परता को परखा।
मॉक ड्रिल को वास्तविक रूप देने के लिए जनपद चमोली के छह अलग-अलग संवेदनशील स्थानों पर विभिन्न प्रकार की काल्पनिक आपदाओं (क्राइसिस सिनेरियो) का परिदृश्य तैयार किया गया था। जैसे ही इन घटनाओं की सूचनाएं जिला मुख्यालय को मिलीं, वैसे ही पूरा प्रशासनिक अमला अलर्ट मोड पर आ गया।
काल्पनिक घटनाओं के प्रमुख परिदृश्य
मॉक अभ्यास के दौरान सुबह से ही जिला आपदा परिचालन केंद्र को एक के बाद एक कई गंभीर सूचनाएं प्राप्त हुईं, जिन्होंने नियंत्रण कक्ष की सक्रियता को कसौटी पर उतारा:लामबगड़ (ज्योतिर्मठ): भारी वर्षा के कारण पहाड़ी से भारी मलबा गिरने, एक मुख्य पुल के क्षतिग्रस्त होने तथा अलकनंदा नदी का बहाव आंशिक रूप से अवरुद्ध होने की काल्पनिक सूचना मिली।चैपड़ो क्षेत्र: इस क्षेत्र में मूसलाधार बारिश के चलते भीषण भूस्खलन होने और कई आवासीय भवनों में मलबा भर जाने का परिदृश्य तैयार किया गया, जिसमें स्थानीय लोगों के दबे होने की आशंका जताई गई।कमेड़ (गौचर): बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित कमेड़ में अचानक भारी पत्थर (बोल्डर) गिरने से यातायात पूरी तरह बाधित होने और कई यात्री वाहनों के फंसने की सूचना प्राप्त हुई।थराली, देवाल एवं वाण क्षेत्र: इन सुदूरवर्ती पहाड़ी क्षेत्रों में एक साथ बादल फटने (क्लाउड बर्स्ट) की भयावह सूचना दर्ज की गई।तमक नाला (ज्योतिर्मठ): तमक नाला में मलबा आने से पुल बहने तथा इसके कारण दूरस्थ गांवों का संपर्क मुख्य मार्ग से पूरी तरह कट जाने की स्थिति बनाई गई।टीएचडीसी सुरंग (पीपलकोटी): सबसे चुनौतीपूर्ण परिदृश्य पीपलकोटी में टीएचडीसी की निर्माणाधीन सुरंग के क्षतिग्रस्त होने का था, जहां कई निर्माण श्रमिकों के अंदर फंसे होने की आपातकालीन सूचना मिली।
सक्रिय हुई आईआरएस प्रणाली, मौके पर रवाना हुईं टीमें
इन सभी गंभीर घटनाओं की सूचना मिलते ही चमोली के जिला आपदा परिचालन केन्द्र (डीइओसी) में तत्काल इंसीडेंट रिस्पांस सिस्टम (IRS) को एक्टिवेट कर दिया गया। इंसीडेंट कमांडर के निर्देशन में तुरंत हरकत में आते ही पुलिस, एसडीआरएफ (SDRF), राजस्व, लोक निर्माण विभाग (लोनिवि), सिंचाई, स्वास्थ्य, फायर सर्विस और पेयजल विभाग सहित सभी संबंधित रेस्पॉन्स टीमों को आवश्यक उपकरणों के साथ घटनास्थलों के लिए रवाना किया गया।
सभी छह चिन्हित घटनास्थलों पर त्वरित रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने के लिए सबसे पहले ‘स्टेजिंग एरिया’ (राहत सामग्री व बचाव दल का मुख्य केंद्र) स्थापित किए गए। इसके बाद खोज एवं बचाव दलों ने आधुनिक उपकरणों की मदद से मलबे में फंसे लोगों को निकालने, घायलों को प्राथमिक उपचार देकर एम्बुलेंस के जरिए अस्पतालों में पहुंचाने और यातायात बहाल करने का अभ्यास शुरू किया।अधिकारियों का संदेश:इस मॉक ड्रिल का मुख्य उद्देश्य मानसून के दौरान आने वाली वास्तविक चुनौतियों जैसे भूस्खलन, बाढ़ या बादल फटने की स्थिति में ‘रिस्पॉन्स टाइम’ (घटना की सूचना मिलने से लेकर मदद पहुंचने के बीच का समय) को कम करना और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना है।
शाम तक चले इस व्यापक मॉक अभ्यास में सभी विभागों ने अपनी भूमिका का मुस्तैदी से निर्वहन किया। जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने पूरी प्रक्रिया की निगरानी की और कमियों को चिन्हित कर उन्हें समय रहते सुधारने के निर्देश दिए, ताकि वास्तविक आपदा के समय जन-धन की हानि को न्यूनतम किया जा सके।
