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उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय (UOU) प्रवेश सत्र जुलाई 2026: एक विस्तृत रिपोर्ट

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उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय (UOU) प्रवेश सत्र जुलाई 2026: एक विस्तृत रिपोर्ट

By सोहन सिंह

​उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय (यूओयू) ने उच्च शिक्षा को अधिक सुलभ, व्यावहारिक और छात्र-केंद्रित बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। विश्वविद्यालय में जुलाई सत्र 2026 के लिए प्रवेश प्रक्रिया 1 जुलाई 2026 से आधिकारिक रूप से शुरू होने जा रही है। इस नए शैक्षणिक सत्र में प्रवेश लेने की अंतिम तिथि 10 अगस्त 2026 निर्धारित की गई है। इस बार का सत्र विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि विश्वविद्यालय ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP)-2020 के प्रावधानों को धरातल पर उतारने के साथ-साथ कई नए रोजगारपरक पाठ्यक्रमों और छात्र-हितैषी सुविधाओं की घोषणा की है।

​शैक्षणिक विविधीकरण और नए पाठ्यक्रम

​विश्वविद्यालय के कर्णप्राय क्षेत्रीय केंद्र के निदेशक डॉ. आर. सी. भट्ट के अनुसार, इस सत्र में विश्वविद्यालय विभिन्न स्तरों पर कुल 95 शैक्षणिक कार्यक्रमों का संचालन कर रहा है। इसमें मुख्य रूप से शामिल हैं:​स्नातक (UG) कार्यक्रम: 15 पाठ्यक्रम​स्नातकोत्तर (PG) कार्यक्रम: 35 पाठ्यक्रम​डिप्लोमा कार्यक्रम: 16 पाठ्यक्रम​प्रमाण-पत्र (Certificate) कार्यक्रम: 29 पाठ्यक्रम

​इस वर्ष के मुख्य आकर्षणों में दो नए रोजगारपरक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध पाठ्यक्रम शामिल हैं—‘डिप्लोमा इन भगवद्गीता स्टडीज़’ और ‘मानवाधिकार प्रमाण-पत्र पाठ्यक्रम’। ये पाठ्यक्रम छात्रों को पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विधिक अधिकारों के प्रति जागरूक करेंगे। इसके अतिरिक्त, एमबीए, एमसीए, एमटीटीएम, बी.एड. (स्पेशल एजुकेशन), एम.एड. (स्पेशल एजुकेशन), बी.ए. योग (ऑनर्स) और एम.ए. योग जैसे व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की प्रवेश परीक्षाओं के लिए ऑनलाइन आवेदन भी 1 जुलाई से ही विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध करा दिए जाएंगे।

​राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) और तकनीकी एकीकरण

​शैक्षणिक सत्र 2026 में पारदर्शिता, गतिशीलता और राष्ट्रीय मानकों को बनाए रखने के लिए डिजिटल पहचान को अनिवार्य किया गया है। प्रवेश लेने वाले प्रत्येक विद्यार्थी के लिए DEB-ID (Distance Education Bureau ID) और ABC-ID (Academic Bank of Credits ID) बनाना अनिवार्य होगा।

​NEP-2020 के तहत विद्यार्थियों को निम्नलिखित आधुनिक सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं:

क्रेडिट मोबिलिटी: छात्र अपने अर्जित क्रेडिट को एक संस्थान से दूसरे संस्थान में आसानी से स्थानांतरित कर सकेंगे।​मल्टीपल एंट्री और मल्टीपल एग्जिट: यदि कोई छात्र किसी कारणवश बीच में पढ़ाई छोड़ता है, तो उसे प्रमाण-पत्र या डिप्लोमा मिलेगा और वह बाद में अपनी पढ़ाई वहीं से दोबारा शुरू कर सकेगा।​ब्लूम्स टैक्सोनॉमी (Bloom’s Taxonomy): शिक्षण मूल्यांकन की पद्धति को पूरी तरह वैज्ञानिक और संज्ञानात्मक विकास पर आधारित बनाया गया है, जिससे रटने के बजाय सीखने और समझने की क्षमता का सही मूल्यांकन हो सके।

​आर्थिक राहत और छात्र-कल्याणकारी पहल

​सहायक निदेशक प्रियंका लोहानी ने विश्वविद्यालय द्वारा दी जाने वाली विभिन्न आर्थिक और ढांचागत राहतों की जानकारी साझा की। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह किया गया है कि अब सभी सेमेस्टर आधारित पाठ्यक्रमों में विद्यार्थियों को सेमेस्टरवार फीस जमा करने की सुविधा दी जाएगी, जिससे मध्यम और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के परिवारों पर एकमुश्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा।

​इसके अतिरिक्त, सामाजिक समावेशन और डिजिटल लर्निंग को बढ़ावा देने के लिए बड़ी शुल्क रियायतों की घोषणा की गई है:

थर्ड जेंडर (Third Gender) के लिए पूर्ण शुल्क माफी: सामाजिक मुख्यधारा से जोड़ने के लिए इस वर्ग के विद्यार्थियों की पूरी फीस माफ रहेगी।​प्रायोगिक विषयों में छूट: बीएससी और एमएससी के प्रयोगात्मक (Practical) विषयों के कार्यशाला शुल्क (Workshop Fee) में 30 प्रतिशत की भारी रियायत दी गई है।​ई-एसएलएम (e-SLM) छूट: जो छात्र प्रिंटेड किताबों के स्थान पर डिजिटल अध्ययन सामग्री (e-SLM) का विकल्प चुनेंगे, उन्हें कुल शुल्क में 15 प्रतिशत की छूट मिलेगी। हालांकि, जो छात्र पारंपरिक तरीके से पढ़ना चाहते हैं, उनके लिए प्रिंट अध्ययन सामग्री का विकल्प भी खुला रहेगा।​स्वतः एलुमनाई सदस्यता: पाठ्यक्रम को सफलतापूर्वक पूरा करने वाले सभी विद्यार्थी बिना किसी अतिरिक्त प्रक्रिया के स्वतः ही विश्वविद्यालय के एलुमनाई नेटवर्क का हिस्सा बन जाएंगे, जिससे भविष्य में रोजगार और नेटवर्किंग के अवसर मिलेंगे।

​ जन-अपील

​उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय का यह नया स्वरूप दूरस्थ शिक्षा के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी बदलाव लेकर आ रहा है। डॉ. आर. सी. भट्ट और सहायक निदेशक प्रियंका लोहानी ने क्षेत्रवासियों, कामकाजी पेशेवरों, गृहणियों और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले युवाओं से अपील की है कि वे समय पर विश्वविद्यालय से जुड़कर इन आधुनिक, लचीले और कल्याणकारी पाठ्यक्रमों का लाभ उठाएं और अपने उज्ज्वल भविष्य का निर्माण करें।

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