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श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल में नेशनल प्लास्टिक सर्जरी दिवस पर जुटे दिग्गज; कैंसर उपचार में ऑन्को-रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी की बढ़ती भूमिका पर हुआ गहरा मंथन

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श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल में नेशनल प्लास्टिक सर्जरी दिवस पर जुटे दिग्गज; कैंसर उपचार में ऑन्को-रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी की बढ़ती भूमिका पर हुआ गहरा मंथन

100 से अधिक चिकित्सकों ने दर्ज की उपस्थिति, माइक्रोवैस्कुलर फ्री-फ्लैप और थ्री-डी सर्जिकल प्लानिंग जैसी आधुनिक तकनीकों पर साझा किए वैश्विक शोध कैंसर शल्य चिकित्सा के बाद रोगियों को बेहतर कार्यक्षमता, आत्मविश्वास और नया जीवन देने में प्लास्टिक सर्जरी की भूमिका अहम: विशेषज्ञ

देहरादून, 11 जुलाई।

नेशनल प्लास्टिक सर्जरी दिवस (15 जुलाई) के उपलक्ष्य में शनिवार को देहरादून स्थित प्रतिष्ठित श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल में एक महत्वपूर्ण और उच्च स्तरीय अतिथि व्याख्यान का आयोजन किया गया। “स्पेक्ट्रम ऑफ ऑन्को-रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरीज” (Spectrum of Onco-Reconstructive Surgeries) विषय पर केंद्रित इस विशेष कार्यक्रम में चिकित्सा जगत के 100 से अधिक वरिष्ठ चिकित्सकों, सर्जनों और शोधकर्ताओं ने सहभागिता की। इस दौरान कैंसर शल्य चिकित्सा (कैंसर सर्जरी) के उपरांत प्रभावित अंगों के पुनर्निर्माण से जुड़ी आधुनिक तकनीकों, वैश्विक शोध उपलब्धियों और साक्ष्य-आधारित उपचार पद्धतियों पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया।

दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ भव्य शुभारंभ

​श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल के भव्य सभागार में आयोजित इस गरिमामयी कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ मुख्य अतिथि और विशिष्ट वक्ताओं द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर मैक्स इंस्टीट्यूट ऑफ कैंसर केयर (वैशाली, गाजियाबाद) के ऑन्को-रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी विभाग के निदेशक डॉ. विपिन बर्थवाल, श्री गुरु राम राय इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एंड हेल्थ साइंसेज के प्राचार्य डॉ. उत्कर्ष शर्मा, अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अनिल मलिक, प्लास्टिक सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. संजय साधू, डॉ. किन्नारी ए. व्यास रावत एवं डॉ. भावना प्रभाकर प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

सिर्फ अंगों का पुनर्निर्माण नहीं, बल्कि जीवन की गुणवत्ता लौटाना है उद्देश्य: डॉ. विपिन बर्थवाल

​कार्यक्रम के मुख्य वक्ता, प्रख्यात ऑन्को-रिकंस्ट्रक्टिव सर्जन डॉ. विपिन बर्थवाल ने अपने व्याख्यान में प्लास्टिक सर्जरी के क्षेत्र में हो रहे वैश्विक बदलावों और नवीन तकनीकों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि वर्तमान में कैंसर के उपचार के बाद मरीजों के पुनर्वास के लिए चिकित्सा विज्ञान में बेहद क्रांतिकारी बदलाव आए हैं।

​डॉ. बर्थवाल ने वैश्विक शोधों का हवाला देते हुए कहा:​”विश्वभर में आज माइक्रोवैस्कुलर फ्री-फ्लैप सर्जरी (Microvascular Free-Flap Surgery), परफोरेटर फ्लैप तकनीक (Perforator Flap Technique) तथा त्रि-आयामी शल्य-योजना (Three-Dimensional Surgical Planning) जैसी अत्यंत उन्नत और अत्याधुनिक विधियों ने कैंसर रोगियों के पुनर्वास को एक नई और सकारात्मक दिशा दी है।”

 

​उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि आधुनिक समय में प्लास्टिक एवं रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी का उद्देश्य केवल शरीर के क्षतिग्रस्त अंगों का ढांचागत पुनर्निर्माण करना मात्र नहीं है, बल्कि इसका मुख्य ध्येय रोगियों को शारीरिक कार्यक्षमता (Functionality), मानसिक आत्मविश्वास और एक बेहतर जीवन-गुणवत्ता (Quality of Life) प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि नित नए हो रहे शोध और बहुविषयक (Multidisciplinary) उपचार पद्धतियाँ इस चिकित्सा क्षेत्र को लगातार समृद्ध और प्रभावी बना रही हैं।

अनुसंधान और नवाचार चिकित्सा विज्ञान के लिए प्रेरणादायी: डॉ. उत्कर्ष शर्मा

​संस्थान के प्राचार्य डॉ. उत्कर्ष शर्मा ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि देश और विदेश में प्लास्टिक सर्जरी के क्षेत्र में तेजी से हो रहे अनुसंधान और नवाचार समूचे चिकित्सा विज्ञान के लिए अत्यंत प्रेरणादायी और कल्याणकारी हैं। उन्होंने मुख्य वक्ता की सराहना करते हुए कहा कि डॉ. बर्थवाल के इस ज्ञानवर्धक व्याख्यान ने अस्पताल के युवा और अनुभवी चिकित्सकों को आधुनिक तकनीकों के व्यावहारिक उपयोग और साक्ष्य-आधारित उपचार प्रणालियों को करीब से समझने का एक उत्कृष्ट अवसर प्रदान किया है।

व्यावहारिक ज्ञान और कौशल संवर्धन के लिए संवाद जरूरी: डॉ. संजय साधू

​प्लास्टिक सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. संजय साधू ने सभी आगंतुकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस तरह के प्रत्यक्ष संवाद और अकादमिक कार्यक्रम चिकित्सकों के पेशेवर विकास के लिए बेहद जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि जब चिकित्सक सीधे तौर पर देश-विदेश के शीर्ष विशेषज्ञों के अनुभवों से रूबरू होते हैं, तो उनके व्यावहारिक ज्ञान और शल्य कौशल का प्रभावी संवर्धन होता है, जिसका सीधा लाभ मरीजों को मिलता है।

सफल संचालन और समापन

​इस महत्वपूर्ण संगोष्ठी का कुशल संचालन डॉ. शालिनी जोशी द्वारा किया गया। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित चिकित्सकों ने ऑन्को-सर्जरी के बाद आने वाली जटिलताओं और उनके प्लास्टिक सर्जिकल समाधानों से जुड़े कई तकनीकी सवाल भी पूछे, जिनका विशेषज्ञों द्वारा बेहद सरलता से समाधान किया गया। कार्यक्रम ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जंग जीतने के बाद मरीज को एक सामान्य और गरिमापूर्ण जीवन देने में अब प्लास्टिक और ऑन्को-रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी एक वरदान साबित हो रही है।

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