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नई शिक्षा नीति के तहत प्रस्तावित समय-सारणी पर शिक्षकों ने जताई आपत्ति, पूर्व जिलाध्यक्ष प्रदीप भंडारी ने विभाग को भेजे 7 प्रमुख सुझाव

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नई शिक्षा नीति के तहत प्रस्तावित समय-सारणी पर शिक्षकों ने जताई आपत्ति, पूर्व जिलाध्यक्ष प्रदीप भंडारी ने विभाग को भेजे 7 प्रमुख सुझाव

चमोली/गोपेश्वर | 14 फरवरी, 2026

रिपोर्ट: सोहन सिंह चमोली (SouthAsia 247)

​उत्तराखंड शिक्षा विभाग द्वारा नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के आलोक में विद्यालयों के लिए प्रस्तावित नवीन समय-सारणी और अवकाश कटौती के प्रस्ताव पर शिक्षक समुदाय में हलचल तेज हो गई है। राजकीय शिक्षक संघ चमोली के पूर्व जिला अध्यक्ष प्रदीप भंडारी ने इस प्रस्ताव का सूक्ष्म अवलोकन करने के बाद छात्र और शिक्षक हित में गंभीर सवाल उठाए हैं और प्रांतीय कार्यकारिणी से निदेशालय स्तर पर वार्ता करने की अपील की है।

भीषण गर्मी और जंगली जानवरों का भय: समय परिवर्तन पर आपत्ति

​प्रदीप भंडारी ने विभाग को भेजे सुझावों में स्पष्ट किया है कि ग्रीष्मकाल के लिए सुबह 7:10 बजे का समय पहाड़ी जनपदों की विषम भौगोलिक परिस्थितियों के अनुकूल नहीं है। सुबह जल्दी स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए जंगली जानवरों का खतरा बना रहता है। वहीं, दोपहर 1:30 बजे तक स्कूल संचालित करने से जून-जुलाई की भीषण गर्मी में बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने वर्तमान समय (7:45 am से 1:00 pm) को ही यथावत रखने का सुझाव दिया है।

अवकाश कटौती और उपार्जित अवकाश (EL) पर रार

​प्रस्तावित नियमावली में 48 दिनों के दीर्घकालीन अवकाशों में से 16 दिनों की कटौती का प्रावधान है। शिक्षक नेता ने इसे पूरी तरह ‘अस्वीकार्य’ बताते हुए कहा कि:

  • ​16 दिनों की कटौती के बदले केवल 10 उपार्जित अवकाश देना न्यायसंगत नहीं है।
  • ​यदि अवकाश काटे जाते हैं, तो उसके बदले पूरे 16 दिन के उपार्जित अवकाश मिलने चाहिए।
  • ​15 जून से 30 जून तक के प्रस्तावित ग्रीष्मकालीन अवकाश को भी उन्होंने छात्रों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक बताया।

विशेष अवकाश और गैर-शैक्षणिक कार्य

​शिक्षकों ने 2016 के आंदोलन के बाद मिले 3 विशेष अवकाशों को समाप्त करने या उन पर पुनर्विचार करने के प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया है। इसके अलावा, अन्य प्रमुख मांगें निम्नवत हैं:

  1. गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्ति: शिक्षकों को बी.एल.ओ. (BLO), जनगणना और अन्य ड्यूटी से मुक्त रखा जाए ताकि पठन-पाठन प्रभावित न हो।
  2. ऑनलाइन कोर्स का बोझ: अनावश्यक ऑनलाइन सर्टिफिकेट कोर्स और ट्रेनिंग के बोझ को कम किया जाए।
  3. राष्ट्रीय पर्व: स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस और गांधी जयंती को अवकाश की सूची में शामिल न कर गौरवपूर्ण तरीके से मनाया जाए।

संघ की कार्यकारिणी से अपील

​पूर्व जिलाध्यक्ष ने राजकीय शिक्षक संघ की ब्लॉक, जिला, मंडल और प्रांतीय कार्यकारिणी से निवेदन किया है कि इन सुझावों को आधिकारिक प्रस्ताव में शामिल कर शिक्षा निदेशालय और सरकार के सम्मुख मजबूती से रखा जाए। उन्होंने जोर दिया कि नई शिक्षा नीति का क्रियान्वयन जमीनी हकीकतों को ध्यान में रखकर ही किया जाना चाहिए।

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