यूपी में बड़ा सियासी धमाका: नसीमुद्दीन सिद्दीकी समेत कई दिग्गजों ने थामा सपा का दामन, 2027 की तैयारी तेज
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यूपी में बड़ा सियासी धमाका: नसीमुद्दीन सिद्दीकी समेत कई दिग्गजों ने थामा सपा का दामन, 2027 की तैयारी तेज
By Sandip kumar
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में आज उस समय बड़ा भूचाल आ गया जब बसपा और अपना दल जैसे दलों के कई कद्दावर चेहरे समाजवादी पार्टी के कुनबे में शामिल हो गए। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले इसे अखिलेश यादव का ‘मास्टरस्ट्रोक’ माना जा रहा है। लखनऊ स्थित सपा मुख्यालय में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की मौजूदगी में इन नेताओं ने ‘साइकिल’ की रफ्तार बढ़ाने का संकल्प लिया।
बसपा के ‘पुराने स्तंभ’ अब अखिलेश के साथ
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे चर्चित चेहरा रहे बसपा सरकार में कद्दावर मंत्री रहे नसीमुद्दीन सिद्दीकी। सिद्दीकी अपने बड़े बेटे अफजल सिद्दीकी और हजारों समर्थकों के साथ सपा कार्यालय पहुंचे। एक समय पर मायावती के सबसे खास सिपहसालार रहे सिद्दीकी का सपा में आना पश्चिमी यूपी और मुस्लिम मतदाताओं के बीच सपा की पकड़ को और मजबूत करेगा।
नसीमुद्दीन के साथ ही बसपा शासन में मंत्री रहे अनीस अहमद खान (फूलबाबू) ने भी सपा की सदस्यता ग्रहण की। उनकी गिनती तराई बेल्ट के कद्दावर मुस्लिम नेताओं में होती है।
अपना दल को भी लगा बड़ा झटका
केवल बसपा ही नहीं, सत्ताधारी गठबंधन की सहयोगी अपना दल (S) को भी आज करारा झटका लगा है। अपना दल के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व विधायक राजकुमार पाल अपने भारी समर्थकों के साथ समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए। राजकुमार पाल का आना सपा के पिछड़ा वर्ग (OBC) समीकरण को धार देने वाला कदम माना जा रहा है।
PDA की रणनीति हो रही है कामयाब: अखिलेश यादव
नए सदस्यों का स्वागत करते हुए सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि प्रदेश की जनता मौजूदा सरकार की नीतियों से त्रस्त है। उन्होंने कहा:
”आज प्रदेश के बड़े नेताओं का सपा में शामिल होना इस बात का प्रमाण है कि जनता अब विकल्प के तौर पर सिर्फ समाजवादी पार्टी को देख रही है। हमारा PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) परिवार लगातार बढ़ रहा है और यही एकता 2027 में बदलाव लाएगी।”
प्रमुख बिंदु: एक नजर में
- नसीमुद्दीन सिद्दीकी: बसपा के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव और कद्दावर मुस्लिम चेहरा।
- अनीस अहमद खान: पूर्व मंत्री, रुहेलखंड क्षेत्र में मजबूत प्रभाव।
- राजकुमार पाल: अपना दल के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष, पिछड़ों के बीच पैठ।
- अफजल सिद्दीकी: युवा नेतृत्व और सिद्दीकी के उत्तराधिकारी।
राजनीतिक मायने:
विशेषज्ञों का मानना है कि इन नेताओं के शामिल होने से सपा ने यह संदेश दे दिया है कि वह 2027 के लिए केवल कैडर ही नहीं, बल्कि बड़े चेहरों को भी अपने पाले में कर रही है। इससे आने वाले दिनों में अन्य दलों से भी ‘पलायन’ की स्थिति बन सकती है।
