फूलों की घाटी में ‘वाइल्डलाइफ’ की धूम: कैमरे में कैद हुए हिम तेंदुआ और कस्तूरी मृग, ड्रोन से हुई निगेहबानी
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फूलों की घाटी में ‘वाइल्डलाइफ’ की धूम: कैमरे में कैद हुए हिम तेंदुआ और कस्तूरी मृग, ड्रोन से हुई निगेहबानी
सोहन सिंह गोपेश्वर (चमोली): विश्व प्रसिद्ध ‘वैली ऑफ फ्लावर्स’ (फूलों की घाटी) इन दिनों बर्फ की सफेद चादर ओढ़े हुए है, लेकिन इस शांत शीतकाल में भी यहाँ वन्य जीवों की जबरदस्त हलचल मची हुई है। नंदादेवी राष्ट्रीय पार्क प्रशासन द्वारा चलाए गए विशेष गश्ती अभियान के दौरान दुर्लभ वन्य जीवों की मौजूदगी के सुखद प्रमाण मिले हैं।
कैमरा ट्रैप में कैद हुई हिमालयी विरासत
नंदादेवी राष्ट्रीय पार्क के डीएफओ अभिमन्यु ने बताया कि वनकर्मियों के दल ने उच्च हिमालयी क्षेत्रों में छह दिनों का सघन गश्त अभियान चलाया। इस दौरान घाटी में स्थापित कैमरा ट्रैप्स की जांच की गई, जिसके परिणाम बेहद उत्साहजनक रहे। कैमरों में हिम तेंदुआ (स्नो लैपर्ड), कस्तूरी मृग, राज्य पक्षी मोनाल, गुलदार, लेपर्ड कैट, भालू, हिमालयन शैरो, थार और यलो थ्रोटेड मार्टन जैसे दुर्लभ जीव स्वच्छंद विचरण करते हुए कैद हुए हैं।
ड्रोन सर्वे से दुर्गम इलाकों पर नजर
वन विभाग की टीम ने आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए पुलना, जंगलचट्टी, भ्यूंडार, घांघरिया और फूलों की घाटी के मुख्य क्षेत्रों का भ्रमण किया। मानवीय पहुंच से दूर दुर्गम इलाकों की निगरानी के लिए ड्रोन के माध्यम से हवाई सर्वेक्षण किया गया। ड्रोन से प्राप्त हाई-डेफिनिशन वीडियो और तस्वीरों के विश्लेषण से यह पुष्टि हुई है कि शीतकाल के दौरान इन क्षेत्रों में कोई भी अवैध गतिविधि नहीं हुई है और पारिस्थितिक तंत्र पूरी तरह सुरक्षित है।
पर्यटकों के लिए नई सुविधाएं और ऑनलाइन बुकिंग
आगामी यात्रा सीजन को लेकर भी विभाग ने अभी से कमर कस ली है। डीएफओ ने जानकारी दी कि:
- व्याख्या केंद्र का नवीनीकरण: जून माह में पर्यटकों के स्वागत के लिए व्याख्या केंद्र (Interpretation Centre) को नए स्वरूप में तैयार किया जाएगा।
- डिजिटल सेवा: पर्यटकों की सुविधा के लिए ऑनलाइन बुकिंग व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ किया जा रहा है।
- क्षमता निर्माण: ईडीसी (इको डेवलपमेंट कमेटी) के क्षमता निर्माण पर विशेष जोर दिया जाएगा ताकि स्थानीय स्तर पर पर्यटन प्रबंधन बेहतर हो सके।
मुस्तैद रही वन विभाग की टीम
इस साहसिक और महत्वपूर्ण अभियान को सफल बनाने में अनुभाग अधिकारी जयप्रकाश, वन बीट अधिकारी नरेंद्र सिंह, मानसिंह, अरविंद सिंह, नागेंद्र सिंह, प्रीतम सिंह, मनोज भट्ट और अजय रावत की टीम ने अहम भूमिका निभाई। टीम के सुरक्षित वापस लौटने पर अधिकारियों ने संतोष व्यक्त किया है कि शीतकाल में भी घाटी का वन्य जीवन पूरी तरह सुरक्षित और फल-फूल रहा है।
यह रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि फूलों की घाटी न केवल अपनी वनस्पतियों के लिए, बल्कि दुर्लभ वन्य जीवों के संरक्षण के लिए भी दुनिया का एक उत्कृष्ट केंद्र बनी हुई है।
