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आज अयोध्या में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का आगमन: राम मंदिर के द्वितीय तल पर ‘श्रीराम यंत्र’ की स्थापना आज, सामाजिक समरसता का बड़ा संदेश

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अयोध्या में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का आगमन: राम मंदिर के द्वितीय तल पर ‘श्रीराम यंत्र’ की स्थापना आज, सामाजिक समरसता का बड़ा संदेश

अयोध्या। चैत्र नवरात्रि और हिंदू नववर्ष (नव संवत्सर 2083) के प्रथम दिन आज धर्मनगरी अयोध्या एक अभूतपूर्व आध्यात्मिक घटना की साक्षी बनने जा रही है। भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू आज श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में ‘श्रीराम यंत्र’ की विधिवत स्थापना करेंगी। वैदिक मंत्रोच्चार और भव्य अनुष्ठान के बीच होने वाला यह कार्यक्रम न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि सामाजिक एकता के लिहाज़ से भी ऐतिहासिक माना जा रहा है।

सुरक्षा और सजावट: अभेद्य किले में तब्दील रामनगरी

​राम मंदिर के मुख्य द्वार (आद्य शंकराचार्य द्वार) से लेकर मंदिर के द्वितीय तल तक सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। मंदिर परिसर को देशी-विदेशी फूलों, रंगोलियों और विशेष प्रकाश व्यवस्था से सजाया गया है।

  • सुरक्षा घेरा: राष्ट्रपति के आगमन को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे क्षेत्र को सील कर दिया है। चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा बल तैनात हैं।
  • सांस्कृतिक वैभव: मंदिर के प्रवेश मार्ग पर पारंपरिक वाद्य यंत्रों और शंख ध्वनि के साथ राष्ट्रपति का स्वागत किया जाएगा।

राष्ट्रपति का मिनट-टू-मिनट कार्यक्रम

​राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का अयोध्या प्रवास लगभग चार घंटे का रहेगा। उनके कार्यक्रम का विवरण इस प्रकार है:

  1. आगमन (सुबह 11:00 बजे): राष्ट्रपति महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरेंगी और सड़क मार्ग से गेट नंबर 11 के जरिए मंदिर परिसर में प्रवेश करेंगी।
  2. दर्शन और पूजन: परिसर में प्रवेश के बाद राष्ट्रपति सबसे पहले रामलला के दरबार में हाजिरी लगाकर आशीर्वाद लेंगी।
  3. श्रीराम यंत्र स्थापना: इसके बाद वे लिफ्ट के माध्यम से मंदिर के द्वितीय तल पर पहुंचेंगी, जहां विशिष्ट आचार्यों की उपस्थिति में ‘श्रीराम यंत्र’ का पूजन और स्थापना अनुष्ठान संपन्न करेंगी।
  4. राम परिवार और सप्तमंडपम दर्शन: यंत्र स्थापना के बाद राष्ट्रपति प्रथम तल पर विराजमान राम परिवार की आरती करेंगी। इसके पश्चात वे सप्तमंडपम में महर्षि वाल्मीकि, माता शबरी और निषादराज के मंदिरों में दर्शन कर सामाजिक समरसता का संदेश देंगी।

विशिष्ट अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति

​इस पावन अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, राम मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि और जगद्गुरु विश्व प्रसन्न तीर्थ समेत तीन प्रमुख आचार्य मौजूद रहेंगे। समारोह में केरल की प्रसिद्ध धर्मगुरु माता अमृतानंदमयी और आरएसएस के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले भी अपने विचार साझा करेंगे।

श्रमिकों और संतों का सम्मान: 7000 मेहमान बनेंगे साक्षी

​यह आयोजन समावेशी भारत की तस्वीर पेश कर रहा है। समारोह में करीब सात हजार मेहमान आमंत्रित हैं, जिनमें:

  • ​राम मंदिर आंदोलन से जुड़े कारसेवक और लगभग 300 संत-धर्माचार्य
  • ​मंदिर निर्माण में पसीना बहाने वाली 300 एजेंसियों के 400 श्रमिक और 1800 कर्मी।
  • ​निधि समर्पण करने वाले विशिष्ट दानदाता। राष्ट्रपति इस दौरान मंदिर निर्माण में जुटे श्रमिकों से सीधा संवाद भी कर सकती हैं, जिसे वंचित वर्गों के सम्मान के रूप में देखा जा रहा है।

सामाजिक समरसता का बड़ा प्रतीक

​विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रपति द्वारा माता शबरी और निषादराज के मंदिरों में पूजन करना यह संदेश देता है कि राम का दरबार सबके लिए है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस ऐतिहासिक अवसर पर सभा को संबोधित करेंगे, जिसके बाद राष्ट्रपति का संबोधन होगा। वे दोपहर 3:15 बजे अयोध्या से प्रस्थान करेंगी।

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