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Ayodhya Surya Tilak 27मार्च को रामनवमी पर होगा प्रभु रामलला का ‘सूर्य तिलक’, विज्ञान और अध्यात्म के संगम से महकेगी धर्मनगरी

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Ayodhya Surya Tilak 27मार्च को रामनवमी पर होगा प्रभु रामलला का ‘सूर्य तिलक’, विज्ञान और अध्यात्म के संगम से महकेगी धर्मनगरी

अयोध्या। सैकड़ों वर्षों के इंतजार के बाद अयोध्या के भव्य और दिव्य मंदिर में विराजमान हुए प्रभु श्री राम की यह पहली रामनवमी ऐतिहासिक और अविस्मरणीय होने जा रही है। इस वर्ष 27 मार्च को रामनवमी के पावन अवसर पर अयोध्या न केवल लाखों भक्तों की आस्था का केंद्र बनेगी, बल्कि एक ऐसी खगोलीय और वैज्ञानिक घटना की साक्षी भी बनेगी, जिसकी कल्पना सदियों से की जा रही थी। इस दिन दोपहर 12 बजे स्वयं सूर्य देव अपनी रश्मियों से प्रभु रामलला का अभिषेक करेंगे।

क्या है ‘सूर्य तिलक’ और कैसे होगा यह चमत्कार?

​राम मंदिर ट्रस्ट के अनुसार, रामनवमी के दिन दोपहर ठीक 12:00 बजे जब सूर्य अपने शिखर पर होगा, तब उसकी किरणें सीधे मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश करेंगी। ये किरणें किसी साधारण प्रकाश की तरह नहीं, बल्कि एक सटीक ‘तिलक’ के रूप में प्रभु रामलला के मस्तक को सुशोभित करेंगी।

​यह पूरी प्रक्रिया लगभग 4 मिनट तक चलेगी। इन 4 मिनटों के दौरान पूरा मंदिर परिसर एक अलौकिक आभा से भर जाएगा। भक्तों के लिए यह दृश्य ऐसा होगा मानो स्वयं सूर्य देव अपने आराध्य का वंदन करने धरती पर उतर आए हों।

विज्ञान का कमाल: ऑप्टोमैकेनिकल सिस्टम

​इस अद्भुत घटना को सफल बनाने के पीछे भारतीय वैज्ञानिकों की कड़ी मेहनत और आधुनिक इंजीनियरिंग का हाथ है। मंदिर निर्माण समिति ने सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (CBRI), रुड़की के वैज्ञानिकों के साथ मिलकर एक विशेष ऑप्टोमैकेनिकल सिस्टम तैयार किया है।

  • दर्पण और लेंस का जाल: मंदिर के ऊपरी तल से लेकर गर्भगृह तक दर्पण (Mirrors) और उच्च क्षमता वाले लेंस लगाए गए हैं।
  • प्रकाश का मार्ग: सूर्य की रोशनी छत पर लगे पहले दर्पण पर गिरेगी, जहाँ से परावर्तित होकर वह पीतल के पाइपों के जरिए अलग-अलग लेंसों से गुजरते हुए सीधे रामलला के ललाट (मस्तक) पर केंद्रित होगी।
  • सटीकता: इस तकनीक को इस तरह डिजाइन किया गया है कि हर साल रामनवमी की तिथि पर सूर्य की बदलती स्थिति के बावजूद किरणें सटीक स्थान पर ही गिरें।

रामनवमी मेला: सुरक्षा और व्यवस्था के कड़े इंतजाम

​प्राण प्रतिष्ठा के बाद यह पहली बड़ी रामनवमी है, इसलिए अयोध्या प्रशासन करीब 25 से 30 लाख श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद कर रहा है। राम जन्मभूमि पथ से लेकर कनक भवन और हनुमानगढ़ी तक फूलों से सजावट की जा रही है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पूरी अयोध्या में जगह-जगह एलइडी स्क्रीन्स लगाई जा रही हैं ताकि गर्भगृह के इस ‘सूर्य तिलक’ का लाइव दर्शन हर भक्त कर सके।

2 अप्रैल: हनुमान जयंती पर भव्य ध्वजारोहण

​रामनवमी के भव्य उत्सव के ठीक बाद, अयोध्या में 2 अप्रैल को हनुमान जयंती का पर्व भी बड़े उल्लास के साथ मनाया जाएगा। त्रेतायुग की परंपरा के अनुसार, रामनवमी के बाद हनुमान जी का जन्मोत्सव अयोध्या के संरक्षक के रूप में मनाया जाता है।

​इस अवसर पर हनुमानगढ़ी में विशेष अनुष्ठान होंगे और भव्य ध्वजारोहण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। मठ-मंदिरों में सुंदरकांड के पाठ और भंडारों का आयोजन होगा, जिससे पूरी अयोध्या राममय के साथ-साथ हनुमानमय भी नजर आएगी।

भक्तों के लिए गाइडलाइन

​राम मंदिर ट्रस्ट ने अपील की है कि भीड़ को देखते हुए वृद्ध और बीमार लोग लाइव प्रसारण के जरिए दर्शन को प्राथमिकता दें। मंदिर के कपाट रामनवमी के दिन अतिरिक्त समय के लिए खुले रहेंगे ताकि अधिक से अधिक श्रद्धालु अपने आराध्य के दर्शन कर सकें।

अयोध्या की यह रामनवमी केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि नए भारत की उस तस्वीर का दर्शन है जहाँ हम अपनी प्राचीन परंपराओं को विज्ञान के माध्यम से नई ऊंचाइयों पर ले जा रहे हैं। 27 मार्च का वह 4 मिनट का ‘सूर्य तिलक’ युगों-युगों तक भक्तों के मानस पटल पर अंकित रहेगा।

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