South Asia 24×7 का मतलब पक्की खबर, देश और जहान की ताजातरीन खबरें,पत्रकारिता की नई आधारशिला, निष्पक्षता और पारदर्शिता अब, South Asia 24×7 पर खबर ग्राउंड जीरो से, मंझे हुए संवाददाताओं के साथ,हर जन मुद्दे पर, सीधा सवाल सरकार से ,सिर्फ South Asia 24 ×7 पर,पत्रकारिता की मजबूती के लिए जुड़िए हमारे साथ, South Asia 24×7 के यूट्यूब चैनल,फेसबुक और ट्विटर पर क्योंकि हम करते है बात मुद्दे की

South Asia24x7

Hindi News, Breaking News in Hindi, हिंदी न्यूज़ , Hindi Samachar, हिंदी समाचार, Latest News in Hindi,South Asia24x7

उत्तराखंड के पत्रकारों ने कटक के धान अनुसंधान संस्थान (NRRI) का किया दौरा: कृषि तकनीक और नवाचारों पर विशेष रिपोर्ट

1 min read

उत्तराखंड के पत्रकारों ने कटक के धान अनुसंधान संस्थान (C RRI) का किया दौरा: कृषि तकनीक और नवाचारों पर विशेष रिपोर्ट

देहरादून/कटक, 24 मार्च 2026:

कृषि क्षेत्र में हो रहे आधुनिक बदलावों और तकनीकी नवाचारों को जमीनी स्तर तक पहुँचाने के उद्देश्य से उत्तराखंड के वरिष्ठ पत्रकारों के एक 13 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने ओडिशा के कटक स्थित ICAR-राष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (CRRI) का महत्वपूर्ण दौरा किया। इस दौरे का आयोजन पत्र सूचना कार्यालय (PIB) देहरादून और भुवनेश्वर के समन्वय से किया गया, जिसमें संस्थान की उपलब्धियों और भविष्य की कृषि तकनीकों पर विस्तृत चर्चा की गई।

वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति और मार्गदर्शन

​प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व PIB देहरादून के सहायक निदेशक श्री संजीव कुमार सुंद्रीयाल ने किया, जबकि PIB भुवनेश्वर के सहायक निदेशक श्री महेंद्र प्रसाद जेना भी इस दौरान मौजूद रहे। संस्थान के निदेशक डॉ. प्रताप भट्टाचार्य ने मीडिया प्रतिनिधियों का स्वागत किया और उन्हें संस्थान की ऐतिहासिक यात्रा से अवगत कराया।

​CRRI की बड़ी उपलब्धियां: 194 किस्में और 22% कवरेज

​डॉ. भट्टाचार्य ने बताया कि संस्थान ने अब तक धान की 194 उन्नत किस्में विकसित की हैं। ये किस्में न केवल पैदावार बढ़ाने में सक्षम हैं, बल्कि प्रतिकूल जलवायु परिस्थितियों जैसे सूखा, बाढ़ और खारेपन को झेलने में भी माहिर हैं।

  • व्यापक प्रभाव: आज भारत के कुल धान बुवाई क्षेत्र के लगभग 22 प्रतिशत हिस्से में इस संस्थान द्वारा विकसित बीजों का उपयोग हो रहा है।
  • आर्थिक समृद्धि: इन उन्नत किस्मों के माध्यम से करोड़ों किसानों की आय में सीधे तौर पर वृद्धि दर्ज की गई है।

आधुनिक तकनीक: जीनोम एडिटिंग से लेकर एआई (AI) तक

​पत्रकारों को संबोधित करते हुए निदेशक ने उन भविष्यवादी तकनीकों का प्रदर्शन किया, जो भारतीय खेती की तस्वीर बदल रही हैं:

  1. जीनोम एडिटिंग (TnpB): धान की किस्मों में आनुवंशिक सुधार के लिए अत्याधुनिक ‘जीनोम एडिटिंग’ टूल का उपयोग किया जा रहा है ताकि कम समय में बेहतर बीज तैयार हों।
  2. प्रिसीजन एग्रीकल्चर और AI: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सेंसर-आधारित खेती के माध्यम से खाद और पानी की सटीक मात्रा का निर्धारण किया जा रहा है।
  3. ड्रोन तकनीक: खेतों की निगरानी और कीटनाशकों के छिड़काव के लिए ड्रोन के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है।
  4. RiceXpert एडवाइजरी: किसानों की समस्याओं के तत्काल समाधान के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म और मोबाइल ऐप्स विकसित किए गए हैं।

पर्यावरण और स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान

​संस्थान ने केवल पैदावार ही नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और पोषण (Nutrition) पर भी जोर दिया है:

  • मीथेन उत्सर्जन में कमी: धान की खेती से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए ‘मेथेनोट्रॉफ फॉर्मुलेशन’ तैयार किया गया है।
  • बायोफोर्टिफाइड चावल: आयरन और जिंक से भरपूर किस्में विकसित की गई हैं ताकि कुपोषण से लड़ा जा सके।
  • मधुमेह के लिए राहत: संस्थान ने कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स (Low GI) वाली किस्में तैयार की हैं, जो शुगर के मरीजों के लिए सुरक्षित हैं।

उत्तराखंड के लिए प्रासंगिकता: सुगंधित और GI टैग चावल

​इंटरएक्टिव सत्र में उत्तराखंड के पत्रकारों ने पहाड़ी क्षेत्रों के लिए उपयुक्त खेती और सुगंधित चावल पर सवाल पूछे। डॉ. भट्टाचार्य ने बताया कि संस्थान सुगंधित किस्मों और स्थानीय प्रजातियों के GI टैग (Geographical Indication) दिलाने में भी मदद कर रहा है, जिससे उत्तराखंड के किसानों के उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रीमियम दाम मिल सकेंगे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!