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पकवाइनार में दो दिवसीय किशोरी स्वास्थ्य एवं माहवारी स्वच्छता प्रबंधन प्रशिक्षण संपन्न

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पकवाइनार में दो दिवसीय किशोरी स्वास्थ्य एवं माहवारी स्वच्छता प्रबंधन प्रशिक्षण संपन्न

  • ​ग्रामीण क्षेत्रों में माहवारी को लेकर झिझक मिटाने और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने की अनूठी पहल।
  • ​प्रगति फाउंडेशन के सौजन्य से आयोजित प्रशिक्षण में क्षेत्र की ३० से अधिक किशोरी लीडर्स ने लिया हिस्सा।

रसड़ा (बलिया)।

ग्रामीण अंचलों में आज भी महिलाओं और किशोरियों के बीच माहवारी (मासिक धर्म) को एक सामाजिक वर्जना या संकोच के विषय के रूप में देखा जाता है। इस रूढ़िवादिता को तोड़ने और किशोरियों को शारीरिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से रसड़ा विकास खंड के पकवाइनार स्थित प्रगति फाउंडेशन के कार्यालय पर एक महत्वपूर्ण पहल की गई। प्रगति फाउंडेशन रतनपुरा के सौजन्य से ‘माहवारी स्वच्छता प्रबंधन एवं किशोरी स्वास्थ्य’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम में क्षेत्र की ग्रामीण किशोरी लीडर्स ने पूरे उत्साह और खुले मन से प्रतिभाग किया।

​वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाना जरूरी: शिखा तिवारी

​प्रशिक्षण कार्यक्रम की मुख्य प्रशिक्षक शिखा तिवारी ने सत्र की शुरुआत करते हुए किशोरियों को माहवारी से जुड़ी वैज्ञानिक, जैविक और व्यवहारिक जानकारियां अत्यंत सरल भाषा में प्रदान कीं। उन्होंने समाज में व्याप्त भ्रांतियों पर प्रहार करते हुए कहा, “माहवारी कोई बीमारी या अपवित्रता नहीं है, बल्कि यह महिला शरीर की एक अत्यंत स्वाभाविक और प्राकृतिक प्रक्रिया है। इसे लेकर किसी भी प्रकार की शर्म, झिझक या संकोच मन में नहीं होना चाहिए।”

​दो दिनों तक चले इस गहन प्रशिक्षण में प्रशिक्षक द्वारा निम्नलिखित महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला गया:​स्वच्छता प्रबंधन: मासिक धर्म के दौरान संक्रमण (Infection) से बचने के लिए स्वच्छता के मानकों को अपनाना कितना अनिवार्य है, इस पर व्यावहारिक डिमॉन्स्ट्रेशन दिया गया।​सैनिटरी पैड का सही उपयोग व निस्तारण: किशोरियों को सैनिटरी पैड के इस्तेमाल और उसके बाद पर्यावरण व स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाए बिना उसके सही निस्तारण (Disposal) के तरीकों के बारे में सिखाया गया।​पोषण और एनीमिया से बचाव: इस आयु वर्ग में होने वाली खून की कमी (एनीमिया) को रोकने के लिए स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पोषक तत्वों और संतुलित आहार के महत्व को समझाया गया।

​किशोरियों ने खुलकर साझा कीं अपनी समस्याएं

​प्रशिक्षण के दूसरे सत्र में एक अत्यंत सहज और सुरक्षित माहौल तैयार किया गया, जहां उपस्थित किशोरियों ने बिना किसी झिझक के अपनी बात रखी। उन्होंने माहवारी के दौरान होने वाले अत्यधिक दर्द, अनियमितता, मानसिक तनाव और इस दौरान परिवार व समाज में झेलनी पड़ने वाली बंदिशों पर खुलकर सवाल पूछे। प्रशिक्षक शिखा तिवारी ने एक-एक कर सभी के कौतूहल और शंकाओं का समाधान किया। उन्होंने किशोरियों को इस दौरान शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ अपने मानसिक स्वास्थ्य और आत्मविश्वास को भी मजबूत बनाए रखने की सलाह दी।

​जागरूकता से ही आएगी आत्मनिर्भरता: अंजली चौहान

​इस अवसर पर प्रगति फाउंडेशन की संस्था निदेशक अंजली चौहान ने ग्रामीण क्षेत्रों की जमीनी हकीकत को बयां करते हुए कहा, “आज के आधुनिक दौर में भी हमारे ग्रामीण इलाकों में माहवारी को लेकर शिक्षा और जागरूकता की भारी कमी है। उचित जानकारी न होने के कारण हमारी बेटियां और किशोरियां चुपचाप कई तरह की शारीरिक और मानसिक प्रताड़नाएं व बीमारियां झेलती हैं। प्रगति फाउंडेशन का उद्देश्य ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से ग्रामीण स्तर पर सशक्त किशोरी लीडर्स तैयार करना है, जो खुद जागरूक होने के साथ-साथ अपने आस-पास की अन्य महिलाओं को भी इस संवेदनशील विषय पर जागरूक कर सकें और स्वास्थ्य के मोर्चे पर आत्मनिर्भर बन सकें।”

​इन दिग्गजों की रही उपस्थिति

​इस दो दिवसीय रचनात्मक और ज्ञानवर्धक प्रशिक्षण कार्यक्रम को सफल बनाने में संस्था के पदाधिकारियों का विशेष सहयोग रहा। कार्यक्रम के समापन पर परियोजना प्रबंधक विमलेश तिवारी ने सभी का आभार व्यक्त किया और किशोरियों को समाज में स्वास्थ्य दूत (हेल्थ एंबेसडर) के रूप में कार्य करने के लिए प्रेरित किया।

​कार्यक्रम में मुख्य रूप से वंदना, अंजली, जागृति गुप्ता, साक्षी, आकांक्षा और सुनैना सहित क्षेत्र की लगभग 30 से अधिक उभरती हुई किशोरी लीडर्स उपस्थित रहीं, जिन्होंने अंत में यह संकल्प लिया कि वे अपने-अपने गांवों में जाकर इस संदेश को आगे बढ़ाएंगी।

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