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Big breaking उत्तराखंड में बिजली दरों पर बड़ा फैसला: UPCL का ‘महंगी बिजली’ का प्रस्ताव खारिज, जनता को मिली बड़ी राहत

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उत्तराखंड में बिजली दरों पर बड़ा फैसला: UPCL का ‘महंगी बिजली’ का प्रस्ताव खारिज, जनता को मिली बड़ी राहत

देहरादून: उत्तराखंड के लाखों बिजली उपभोक्ताओं के लिए 1 अप्रैल 2026 से पहले एक बड़ी और सुखद खबर सामने आई है। राज्य विद्युत नियामक आयोग (UERC) ने ऊर्जा निगम (UPCL) द्वारा प्रस्तावित बिजली दरों में भारी बढ़ोतरी के प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है। आयोग के इस फैसले का सीधा मतलब यह है कि कल से प्रदेश में बिजली की दरों में कोई इजाफा नहीं होगा और पुरानी दरें ही प्रभावी रहेंगी।

UPCL का ‘कमरतोड़’ प्रस्ताव और आयोग का ‘हस्तक्षेप’

​विद्युत नियामक आयोग ने साफ़ कर दिया है कि घरेलू, व्यावसायिक और कृषि, किसी भी श्रेणी में जनता पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं डाला जाएगा। यूपीसीएल ने अलग-अलग श्रेणियों में 15 से 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा था, जिसे आयोग ने जनहित को ध्यान में रखते हुए ‘अनुमोदित’ नहीं किया।

घरेलू उपभोक्ताओं के लिए क्या बदला? (एक नजर में)

​मध्यम वर्गीय और गरीब परिवारों के लिए आयोग का यह फैसला संजीवनी जैसा है। यूपीसीएल ने स्लैब के अनुसार भारी बढ़ोतरी मांगी थी, जिसे आयोग ने पुरानी दरों पर ही ‘फ्रीज’ कर दिया है:​0-100 यूनिट: यूपीसीएल ने इसे ₹4.23/kWh करने की मांग की थी, लेकिन आयोग ने इसे ₹3.65/kWh पर ही बरकरार रखा है।​101-200 यूनिट: इस स्लैब में भी उपभोक्ताओं को राहत मिली है, यहाँ दरें ₹5.25/kWh ही रहेंगी।​400 यूनिट से ऊपर: भारी खपत वाले उपभोक्ताओं के लिए यूपीसीएल ने ₹9.04 का प्रस्ताव दिया था, जिसे नामंजूर कर ₹7.80/kWh की पुरानी दर ही लागू रखी गई है।

व्यापारियों और संस्थानों को बड़ी राहत (Non-Domestic Tariff)

​राजधानी देहरादून सहित पूरे प्रदेश के व्यापारिक संगठनों ने बिजली दरों को लेकर चिंता जताई थी। तालिका-4 के अनुसार आयोग ने व्यावसायिक श्रेणी में भी राहत दी है:​छोटे दुकानदार: 60 यूनिट तक उपभोग करने वाले छोटे दुकानदारों के लिए प्रस्तावित ₹6.71 की जगह पुरानी दर ₹5.75/kWh ही लागू होगी। स्थिर प्रभार भी ₹90/kW पर स्थिर रखा गया है।​सरकारी व शैक्षणिक संस्थान: इन संस्थानों के लिए प्रस्तावित ₹7.01 की जगह ₹6.00/kWh की दर तय की गई है।​बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठान: 25 kW से ऊपर के कनेक्शनों पर प्रस्तावित ₹9.11/kVAh के मुकाबले ₹7.80/kVAh की दर ही प्रभावी होगी।​विज्ञापन होर्डिंग्स: विज्ञापनों के लिए भी दरों को नियंत्रित रखते हुए ₹8.60/kWh पर सीमित कर दिया गया है।

किसानों और सार्वजनिक सेवाओं के लिए भी ‘गुड न्यूज़’

​खेती-किसानी और सार्वजनिक सुविधाओं (Public Utilities) के लिए भी राहत के द्वार खुले हैं:​निजी नलकूप (Tube-wells): किसानों के लिए प्रस्तावित ₹2.84/kWh की जगह पुरानी दर ₹2.70/kWh ही लागू रहेगी।​सार्वजनिक सेवाएँ: शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में गवर्नमेंट पब्लिक यूटिलिटीज के लिए प्रस्तावित ₹9.17 के भारी-भरकम रेट को खारिज कर ₹7.85/kVAh पर बरकरार रखा गया है।

 सुशासन और जनहित की जीत

​नियामक आयोग के इस फैसले को धामी सरकार के ‘जनहितैषी’ दृष्टिकोण से जोड़कर देखा जा रहा है। ‘मिशन 2027’ की ओर बढ़ते कदम और 4 साल के कार्यकाल की उपलब्धियों के बीच, बिजली दरों में बढ़ोतरी न होना सरकार के लिए एक सकारात्मक फीडबैक साबित होगा। व्यापारियों और आम नागरिकों ने इस फैसले का स्वागत किया है, क्योंकि इससे बढ़ती महंगाई के बीच उनके मासिक बजट पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा।

​यह निर्णय न केवल घरेलू बजट को संतुलित रखेगा, बल्कि उत्तराखंड के उद्योगों और छोटे कारोबारियों को भी मजबूती प्रदान करेगा।

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