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Woman reservation bill fail : महिला आरक्षण विधेयक लोकसभा और राज्यसभा में गिरा, दो-तिहाई बहुमत जुटाने में विफल

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Woman reservation bill fail : महिला आरक्षण विधेयक लोकसभा और राज्यसभा में गिरा, दो-तिहाई बहुमत जुटाने में विफल

नई दिल्ली: दशकों से लंबित ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ (महिला आरक्षण विधेयक) को लेकर आज भारतीय संसद के दोनों सदनों में भारी ड्रामा और अनिश्चितता का माहौल रहा। तमाम उम्मीदों और लंबी बहस के बावजूद, यह ऐतिहासिक विधेयक कानूनी रूप धारण करने में विफल रहा। लोकसभा में आवश्यक दो-तिहाई बहुमत न मिलने और राज्यसभा में विपक्ष के भारी मतदान के चलते यह बिल फिलहाल पारित नहीं हो सका। फिलहाल सरकार ने दोनों विधयेक को वापस ले लिया है

लोकसभा: दो-तिहाई बहुमत का जादुई आंकड़ा नहीं छू सका बिल

​लोकसभा में आज सुबह से ही गहमागहमी का माहौल था। सरकार ने महिला सशक्तिकरण की दिशा में इसे मील का पत्थर बताते हुए पेश किया था। लंबी चर्चा के बाद लोकसभा अध्यक्ष ने मतविभाजन (वोटिंग) के निर्देश दिए।

​संविधान संशोधन विधेयक होने के कारण, इसे पारित करने के लिए सदन में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता थी। हालांकि, वोटिंग के जो नतीजे सामने आए, वे सरकार के लिए निराशाजनक रहे। सदन में संख्या बल के गणित के कारण, बिल को वह समर्थन नहीं मिल सका जो इसे पारित कराने के लिए अनिवार्य था। लोकसभा अध्यक्ष ने घोषणा की कि आवश्यक बहुमत के अभाव में विधेयक को पारित नहीं माना जा सकता।

राज्यसभा: विपक्ष की एकजुटता और मतों का गणित

​लोकसभा में बिल के गिरने की खबरों के बीच राज्यसभा में भी तीखी बहस (भैंस) हुई। उच्च सदन में पक्ष और विपक्ष के बीच जबरदस्त जुबानी जंग देखने को मिली। जब मामला वोटिंग तक पहुँचा, तो सदन की तस्वीर पूरी तरह साफ हो गई।

वोटिंग के नतीजे:पक्ष में मतदान: 298​विपक्ष में मतदान: 230

​हालांकि सरकार के पक्ष में 298 मत पड़े, जो विपक्ष के 230 मतों से अधिक थे, लेकिन संविधान संशोधन की कठोर शर्तों (कुल सदस्यता का बहुमत और उपस्थित सदस्यों का दो-तिहाई) को पूरा न कर पाने के कारण उच्च सदन में भी यह बिल कानून बनने की प्रक्रिया से बाहर हो गया। विपक्ष की एकजुटता ने सरकार की राह में बड़ी बाधा खड़ी कर दी।

विधेयक गिरने के मुख्य कारण: चर्चा के केंद्र बिंदु

​सदन में चल रही बहस के दौरान विपक्ष ने कई गंभीर दलीलें दी थीं, जो संभवतः मतदान के व्यवहार में बदलाव का कारण बनीं:​कोटा के भीतर कोटा: विपक्षी दलों की मुख्य मांग थी कि महिला आरक्षण के भीतर ओबीसी (OBC) और अल्पसंख्यक महिलाओं के लिए अलग से आरक्षण सुनिश्चित किया जाए।​परिसीमन की शर्त: बिल के लागू होने को अगली जनगणना और परिसीमन से जोड़ने की शर्त पर कई दलों ने आपत्ति जताई थी।​तत्काल प्रभाव: कुछ सदस्यों का तर्क था कि यदि सरकार की नीयत साफ है, तो इसे आगामी चुनावों से ही क्यों नहीं लागू किया जा रहा।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

​बिल के गिरने के बाद संसद परिसर में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। सत्ता पक्ष ने इसे ‘ऐतिहासिक अवसर का खो जाना’ करार दिया और विपक्ष पर महिला विरोधी होने का आरोप लगाया। वहीं, विपक्ष ने इसे ‘अधूरा और त्रुटिपूर्ण बिल’ बताते हुए कहा कि वे बिना ओबीसी आरक्षण के इस स्वरूप को स्वीकार नहीं कर सकते।

 का इंतजार और बढ़ा

​नारी शक्ति वंदन अधिनियम का गिरना उन करोड़ों महिलाओं के लिए एक बड़ा झटका है, जो विधायी निकायों में 33% भागीदारी की उम्मीद लगाए बैठी थीं। लोकसभा और राज्यसभा की इस कार्यवाही ने स्पष्ट कर दिया है कि महिला आरक्षण पर अभी और अधिक आम सहमति और स्पष्टता की आवश्यकता है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस बिल को दोबारा किस स्वरूप में लेकर आती है।

ब्यूरो रिपोर्ट: नई दिल्ली।

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