Amit Shah in parliament संसद में बोले गृहमंत्री अमितशह लोकसभा की होगी 816सीट ,2029 में परिसीमन के आधार पर चुनाव
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Amit Shah in parliament संसद में बोले गृहमंत्री अमितशह लोकसभा की होगी 816सीट ,2029 में परिसीमन के आधार पर चुनाव
नई दिल्ली: भारतीय राजनीति के गलियारों में ‘परिसीमन’ (Delimitation) को लेकर चल रही तमाम अटकलों और विपक्ष के आरोपों के बीच गृहमंत्री अमित शाह ने लोकसभा में अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। सदन में बोलते हुए गृहमंत्री ने न केवल विपक्ष के ‘दुष्प्रचार’ पर कड़ा प्रहार किया, बल्कि देश के सामने आगामी लोकसभा की रूपरेखा भी रखी। शाह ने स्पष्ट किया कि भविष्य में लोकसभा सीटों की संख्या बढ़कर 816 हो जाएगी, लेकिन यह प्रक्रिया पूरी तरह से संवैधानिक और पारदर्शी होगी।
गृह मंत्री अमित शाह आज लोकसभा में बोलते हुए बताया कि जिस तरह से गुमराह फैलाने की विपक्ष कोशिश कर रहा है उसकी सच्चाई देश को जानने की जरूरत है उन्होंने कहा कर्नाटक की अभी 543 लोकसभा की सीट में कुल 28 सीट है जबकि इसका प्रतिनिधित्व 5.5 है और इस तरह से 50 फ़ीसदी सीट बढ़ने पर इसका प्रतिनिधित्व 28 सीट से बढ़कर 42 सीट हो जाएगा जबकि प्रतिनिधित्व 5.4 हो जाएगा वहीं आंध्र प्रदेश को लेकर उन्होंने कहा कि अभी लोकसभा में आंध्र प्रदेश की 25 सीट है और 50% में बढ़ोतरी होने पर इसकी संख्या 38 हो जाएगी जबकि प्रतिनिधित्व 4.7 से 4.65 हो जाएगा इसी तरह से तेलंगाना को लेकर उन्होंने कहा कि अभी तेलंगाना की 17 सीट हैं जबकि लोकसभा में प्रतिनिधित्व 3.3 है और यह संख्या बढ़कर 25 सेट की हो जाएगी और प्रतिनिधित्व 3.8 हो जाएगा इसी तरह से तमिलनाडु को लेकर उन्होंने कहा अभी 39 सीट है जबकि प्रतिनिधित्व 7.8 है और सीट बढ़कर के 59 हो जाएगी और प्रतिनिधित्व 7.23 हो जाएगा इसी तरह से उन्होंने केरल को लेकर भी बात कही
विपक्ष के ‘गुमराह’ करने वाले अभियान पर पलटवार
गृहमंत्री ने सदन में विपक्ष, विशेषकर कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि जनता को सच जानने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि विपक्ष दक्षिण भारतीय राज्यों में यह डर फैलाने की कोशिश कर रहा है कि परिसीमन से उनका प्रतिनिधित्व कम हो जाएगा। अमित शाह ने तथ्यों के साथ जवाब देते हुए बताया कि सीटों की संख्या में 50 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी संभावित है, जिससे राज्यों का प्रतिनिधित्व और मजबूत होगा।
दक्षिण भारतीय राज्यों के लिए नया गणित
शाह ने आंकड़ों के जरिए समझाया कि किस तरह दक्षिण भारत के राज्यों की सीटों में इजाफा होगा:कर्नाटक: वर्तमान में 28 सीटें हैं, जो बढ़कर 42 हो सकती हैं।आंध्र प्रदेश: 25 सीटों से बढ़कर आंकड़ा 38 तक पहुँचने की उम्मीद है।तेलंगाना: 17 सीटों के स्थान पर भविष्य में 25 सीटें होंगी।तमिलनाडु: वर्तमान की 39 सीटें बढ़कर 59 हो जाएंगी।
शाह ने जोर देकर कहा कि इन बदलावों के बावजूद राज्यों के प्रतिनिधित्व का अनुपात संतुलित बना रहेगा। उन्होंने साफ किया कि परिसीमन का आधार वही नियम होंगे जो कांग्रेस शासन के दौरान तय किए गए थे। “हम परिसीमन एक्ट में कोई मनमाना बदलाव नहीं कर रहे हैं,” शाह ने स्पष्ट लहजे में कहा।
2029 से लागू होगा नया पैटर्न
गृहमंत्री ने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि वर्तमान व्यवस्था में कोई भी तत्काल बदलाव नहीं होने जा रहा है। 2029 के आम चुनावों के बाद ही नए परिसीमन के तहत चुनाव कराए जाएंगे। तब तक देश में होने वाले सभी चुनाव पुराने नियमों और वर्तमान सीट संख्या के आधार पर ही होंगे। इस घोषणा ने उन आशंकाओं पर विराम लगा दिया है जिनमें चुनाव प्रक्रिया में तत्काल बड़े फेरबदल की बात कही जा रही थी।
प्रियंका गांधी और अखिलेश यादव पर ‘सियासी चुटकी’
चर्चा के दौरान अमित शाह ने अपने चिर-परिचित अंदाज़ में विपक्ष के नेताओं पर चुटकी भी ली। उन्होंने प्रियंका गांधी को संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें “चिंता करने की कोई आवश्यकता नहीं है।” वहीं, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि उन्हें डरने की जरूरत नहीं है क्योंकि वे फिलहाल चुनाव नहीं जीत रहे हैं और चुनाव अभी 2029 तक पुराने पैटर्न पर ही होंगे।
लोकतंत्र की मजबूती का संकल्प
सदन में अपने संबोधन का समापन करते हुए अमित शाह ने लोकतंत्र की सुरक्षा पर बड़ा बयान दिया। उन्होंने आपातकाल (Emergency) का जिक्र करते हुए कहा, “जब इमरजेंसी जैसा दौर भी देश के लोकतंत्र को खत्म नहीं कर पाया, तो आज लोकतंत्र को समाप्त करने की मजाल किसी में नहीं है।” उन्होंने चेतावनी दी कि जो कोई भी लोकतंत्र को मिटाने की कोशिश करेगा, वह खुद मिट जाएगा।
आज रात 11 बजे तक चलेगा मंथन
गृहमंत्री ने सदन को सूचित किया कि वह कल फिर से सदन में मौजूद रहेंगे और विपक्ष के हर सवाल का एक-एक तथ्य के साथ जवाब देंगे। इस महत्वपूर्ण चर्चा की गंभीरता को देखते हुए लोकसभा की कार्यवाही आज रात 11:00 बजे तक जारी रखने का निर्णय लिया गया है। शाह का यह बयान न केवल एक स्पष्टीकरण है, बल्कि 2029 के बाद भारत की नई लोकतांत्रिक संरचना का एक रोडमैप भी है।
