दुर्गम में तैनात शिक्षकों के साथ अनदेखी का आरोप, शिक्षक संघ से हस्तक्षेप की मांग
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दुर्गम में तैनात शिक्षकों के साथ अनदेखी का आरोप, शिक्षक संघ से हस्तक्षेप की मांग
सोहन सिंह चमोली:
उत्तराखंड राजकीय शिक्षक संघ के अंतर्गत स्थानांतरण प्रक्रिया को लेकर शिक्षकों में असंतोष की लहर देखने को मिल रही है। 30 जुलाई 2026 तक खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालयों में अनुरोध के आधार पर स्थानांतरण (Transfer on Request) के आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि तय की गई है। हालांकि, राज्य के दूरस्थ एवं दुर्गम क्षेत्रों में वर्षों से सेवाएं दे रहे शिक्षकों ने शिक्षा विभाग की नई नीति पर गंभीर सवाल उठाए हैं और शिक्षक संघ की प्रांतीय व जिला कार्यकारिणी से तत्काल हस्तक्षेप करने की गुहार लगाई है।
राजकीय शिक्षक संघ चमोली के पूर्व जिलाध्यक्ष प्रदीप भंडारी ने शिक्षकों की मुख्य समस्याओं को रेखांकित करते हुए संगठन का ध्यान दो प्रमुख बिंदुओं की ओर आकर्षित किया है।
दुर्गम में वर्षों की सेवा को दरकिनार करने का आरोप
शिक्षकों का कहना है कि विभाग द्वारा इस बार ट्रांसफर पोर्टल से ‘सुगम और दुर्गम’ की श्रेणियों को हटा दिया गया है। इसके स्थान पर केवल पांच निर्धारित श्रेणियों के अंतर्गत ही अनुरोध के आधार पर स्थानांतरण आवेदन मांगे जा रहे हैं। इस नई व्यवस्था से वे शिक्षक सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं जो वर्षों से विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले दुर्गम क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
प्रदीप भंडारी ने कहा कि केवल पांच सीमित श्रेणियों के कारण दुर्गम में तैनात कई शिक्षक आवेदन करने से पूरी तरह वंचित हो रहे हैं, जिससे वे खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि दुर्गम सेवा की अवधि को भी अनुरोध के आधार पर स्थानांतरण का मुख्य आधार बनाया जाना चाहिए। यदि शिक्षक संगठन इस विषय को शासन-प्रशासन के समक्ष गंभीरता से उठाए, तो समय रहते दुर्गम में तैनात शिक्षकों को न्याय मिल सकता है।
मेडिकल प्रमाण पत्र हेतु अतिरिक्त समय और औपबंधिक व्यवस्था की मांग
स्थानांतरण प्रक्रिया से जुड़ा दूसरा गंभीर मुद्दा मेडिकल प्रमाण पत्र से संबंधित है। इस वर्ष शासन ने एक सराहनीय निर्णय लेते हुए माता-पिता के साथ-साथ सास-ससुर की गंभीर बीमारी को भी स्थानांतरण के आधार में शामिल किया है। हालांकि, इस संबंध में शासनादेश (GO) हाल ही में जून माह में जारी हुआ था।
अचानक जारी आदेश और समय की कमी के कारण कई शिक्षक समय पर राज्य मेडिकल बोर्ड से प्रमाण पत्र नहीं बनवा सके। मेडिकल सर्टिफिकेट न होने की स्थिति में कार्यालयों द्वारा उनके आवेदन स्वीकार नहीं किए जा रहे हैं।
इस समस्या के व्यावहारिक समाधान के लिए शिक्षकों ने सुझाव दिया है कि विभाग को फिलहाल अभ्यर्थियों से शपथ पत्र (Affidavit) लेकर उनके आवेदन पत्र जमा कर लेने चाहिए। ऐसे शिक्षकों का औपबंधिक (Provisional) स्थानांतरण किया जाए और उन्हें राज्य मेडिकल बोर्ड से प्रमाण पत्र जमा करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाए। स्थानांतरण आदेश जारी होने के बाद कार्यभार ग्रहण करने तक प्रमाण पत्र जमा करने की छूट मिलने से जरूरतमंद शिक्षकों को बड़ी राहत मिल सकती है।
संगठन से ठोस कदम उठाने की अपील
’जय शिक्षक, जय संगठन’ के नारे के साथ पूर्व जिलाध्यक्ष ने कार्यकारिणी से अनुरोध किया है कि शिक्षकों की इन व्यावहारिक कठिनाइयों पर विचार करते हुए तत्काल शासन और शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों के समक्ष पक्ष रखा जाए, ताकि दुर्गम में तैनात और गंभीर परिस्थितियों से जूझ रहे शिक्षकों की समस्याओं का समयबद्ध समाधान हो सके।
