सांस्कृतिक सेतु: उत्तराखंड के पत्रकारों का ओडिशा आगमन, ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की जीवंत झलक
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सांस्कृतिक सेतु: उत्तराखंड के पत्रकारों का ओडिशा आगमन, ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की जीवंत झलक
भुवनेश्वर, ओडिशा | विशेष रिपोर्ट
भारतीय सूचना एवं सांस्कृतिक विनिमय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, भारत सरकार के पत्र सूचना कार्यालय (PIB), देहरादून द्वारा आयोजित अध्ययन भ्रमण के तहत उत्तराखंड के वरिष्ठ पत्रकारों का एक प्रतिनिधिमंडल आज रात्रि लगभग 8:00 बजे बीजू पटनायक अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे, भुवनेश्वर पहुँचा।
देवभूमि उत्तराखंड से आए इस दल का ओडिशा की धरती पर पहुँचे ही भव्य और भावपूर्ण स्वागत किया गया। यह दौरा न केवल दो राज्यों के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान का माध्यम है, बल्कि यह भारत के दो वैचारिक और आध्यात्मिक छोरों को जोड़ने का एक प्रयास भी है।
हवाई अड्डे पर आत्मीय अभिनंदन
जैसे ही पत्रकारों का दल विमानतल से बाहर निकला, पीआईबी भुवनेश्वर के वरिष्ठ अधिकारियों ने पूरी आत्मीयता के साथ उनकी अगवानी की। उत्तराखंड से आए मीडिया प्रतिनिधियों का स्वागत पारंपरिक पुष्पगुच्छों और मालाओं के साथ किया गया। इस विशेष अध्ययन दौरे का नेतृत्व पीआईबी देहरादून के असिस्टेंट डायरेक्टर श्री संजीव सुन्द्रियाल कर रहे हैं। आगमन पर श्री सुन्द्रियाल का भी विशेष रूप से सम्मान किया गया, जो इस अंतर-राज्यीय समन्वय के मुख्य सूत्रधार हैं।
‘अतिथि देवो भवः’ की पारंपरिक झलक
हवाई अड्डे से पत्रकारों का काफिला सीधे ‘लेमन ट्री प्रीमियर’ (Lemon Tree Premier), भुवनेश्वर के लिए रवाना हुआ। यहाँ होटल पहुँचने पर दृश्य और भी मनोरम हो गया। ओडिशा की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा के अनुरूप, सभी पत्रकारों पर पुष्पवर्षा की गई और पारंपरिक तिलक व मालाओं के साथ उनका हार्दिक अभिनंदन किया गया।
इस स्वागत सत्कार ने पत्रकारों को भावविभोर कर दिया। स्वागत की इस शैली ने यह सिद्ध कर दिया कि ओडिशा की सांस्कृतिक गरिमा में आज भी ‘अतिथि देवो भवः’ की भावना उतनी ही जीवंत है, जितनी सदियों पहले थी। पत्रकारों ने साझा किया कि इस गर्मजोशी ने उनकी लंबी यात्रा की थकान को पल भर में दूर कर दिया।
देवभूमि और जगन्नाथ की धरती का अद्भुत संगम
इस अध्ययन भ्रमण का सबसे गहरा पहलू दोनों राज्यों की आध्यात्मिक विरासत में छिपी समानता है। एक ओर जहाँ ओडिशा में पुरी स्थित भगवान जगन्नाथ की अटूट आस्था और कोणार्क का ऐतिहासिक वैभव विश्वविख्यात है, वहीं दूसरी ओर उत्तराखंड में बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री एवं यमुनोत्री जैसे पवित्र चार धाम भारतीय आध्यात्मिकता के आधार स्तंभ हैं।
दोनों राज्यों के बीच यह समानताएँ केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक भी हैं:
- आध्यात्मिक ऊर्जा: जगन्नाथ धाम और बदरीनाथ धाम के बीच का प्राचीन संबंध जगजाहिर है।
- परंपरा का सम्मान: दोनों ही राज्य अपनी लोक कलाओं, मंदिरों की वास्तुकला और हिमालयी व तटीय संस्कृतियों के संरक्षण के लिए समर्पित हैं।
- एक भारत, श्रेष्ठ भारत: पत्रकारों के इस भ्रमण का मूल उद्देश्य भी यही है कि भौगोलिक दूरियों के बावजूद भारत की सांस्कृतिक आत्मा एक है।
आगामी कार्यक्रम
उत्तराखंड पत्रकार प्रतिनिधिमंडल की यह ओडिशा यात्रा आगामी दिनों में राज्य के विभिन्न विकास कार्यों, ऐतिहासिक स्थलों और सरकारी योजनाओं के अवलोकन के साथ जारी रहेगी। यह दौरा मीडिया के माध्यम से उत्तराखंड और ओडिशा के बीच पर्यटन, संस्कृति और विकास के साझा अनुभवों को साझा करने का एक सशक्त मंच बनेगा।
”यह केवल एक अध्ययन भ्रमण नहीं, बल्कि हिमालय की गोद से निकलकर समुद्र के तट तक पहुँची एक वैचारिक यात्रा है।”
