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ऋषिकेश: संस्कृत के छात्र अब सीखेंगे विदेशी भाषाएं, IAS-PCS की तैयारी में भी मदद करेगी सरकार; सचिव ने किया औचक निरीक्षण

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ऋषिकेश: संस्कृत के छात्र अब सीखेंगे विदेशी भाषाएं, IAS-PCS की तैयारी में भी मदद करेगी सरकार; सचिव ने किया औचक निरीक्षण

ऋषिकेश/संस्कृत नगरी: उत्तराखंड की पावन नगरी ऋषिकेश में संस्कृत शिक्षा को आधुनिक और सशक्त बनाने की दिशा में शासन ने बड़े कदम उठाए हैं। रविवार, 5 अप्रैल 2026 को संस्कृत शिक्षा विभाग के शासन सचिव दीपक कुमार गैरोला ने ऋषिकेश के विभिन्न संस्कृत विद्यालयों का औचक निरीक्षण किया। उनके इस भ्रमण से न केवल संस्कृत विद्यालयों में नई ऊर्जा का संचार हुआ, बल्कि संस्कृत के भविष्य को लेकर कई महत्वपूर्ण घोषणाएं भी की गईं।

तीन प्रमुख विद्यालयों का निरीक्षण

​सचिव दीपक कुमार गैरोला ने अपने दौरे की शुरुआत श्री मुनीश्वर वेदांग संस्कृत विद्यालय के निरीक्षण से की। इसके पश्चात उन्होंने कृष्ण कुंज संस्कृत विद्यालय और श्री भरत संस्कृत विद्यालय का भी औचक निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने शिक्षकों और छात्रों से सीधा संवाद कर पठन-पाठन की गुणवत्ता पर चर्चा की।

संस्कृत के साथ विज्ञान और विदेशी भाषाओं का संगम

​सचिव ने उत्तराखंड सरकार द्वारा संस्कृत को जन-जन की भाषा बनाने के संकल्प को दोहराया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में 13 संस्कृत ग्रामों की स्थापना कर रही है, जिससे गांवों में बोलचाल की भाषा संस्कृत हो सके। इसके अलावा, उन्होंने कुछ बेहद आधुनिक विजन साझा किए:​आधुनिक विषयों का समावेश: अब संस्कृत विद्यालयों में केवल साहित्य, व्याकरण, ज्योतिष और वेद ही नहीं, बल्कि विज्ञान, गणित और अंग्रेजी जैसे आधुनिक विषय भी अनिवार्य रूप से पढ़ाए जा रहे हैं, ताकि संस्कृत के छात्र समाज में किसी भी क्षेत्र में बराबरी का मुकाबला कर सकें।​विदेशी भाषाओं का ज्ञान: सचिव ने घोषणा की कि विश्व शांति के लिए संस्कृत के छात्रों को विदेशी भाषाओं का ज्ञान होना भी आवश्यक है। इसके लिए उत्तराखंड संस्कृत संस्थान के माध्यम से विदेशी भाषा सीखने वाले छात्रों को सरकार आर्थिक सहायता प्रदान करेगी।​IAS-PCS की तैयारी: संस्कृत के मेधावी छात्र अब प्रशासनिक सेवाओं में भी परचम लहराएंगे। इसके लिए उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय, हरिद्वार जल्द ही विशेष कोचिंग सत्र शुरू करेगा।

छात्रवृत्तियां और प्रोत्साहन

​समाज के हर वर्ग को संस्कृत से जोड़ने के लिए सरकार की योजनाओं की जानकारी देते हुए सचिव ने बताया कि बालिकाओं के लिए गार्गी छात्रवृत्ति और अनुसूचित जाति/जनजाति के बच्चों के लिए डॉ. भीमराव छात्रवृत्ति की व्यवस्था की गई है। इससे बच्चों में संस्कृत पढ़ने के प्रति उत्साह बढ़ा है।

प्रबंधन को सचिव के ‘गुरु मंत्र’

​निरीक्षण के दौरान सचिव ने प्रधानाचार्यों और शिक्षकों को छात्र हित में कुछ विशेष निर्देश दिए:​सामान्य ज्ञान: छात्रों के सामान्य ज्ञान को बढ़ाने के लिए विद्यालय में नियमित दैनिक समाचार पत्र का पाठ करवाया जाए।​संस्कृत संभाषण: छात्रावासों और विद्यालयों में दैनिक संस्कृत समाचारों को सुनने की व्यवस्था अनिवार्य हो।​गूढ़ ज्ञान का संरक्षण: प्रज्ञा चक्षु और मंत्र चिकित्सा जैसे प्राचीन ग्रंथों के वैज्ञानिक ज्ञान को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार हर संभव सहायता प्रदान करेगी।

उपस्थिति

​इस अवसर पर संस्कृत विभाग के उप निदेशक वाजश्रवा आर्य, भरत मंदिर के प्रधानाचार्य सुरेंद्र दत्त भट्ट, डॉ. जनार्दन प्रसाद कैरवान (श्री मुनीश्वर वेदांग), श्रीमती पूजा वशिष्ठ (कृष्ण कुंज), मनोज द्विवेदी, जितेंद्र प्रसाद भट्ट, शंकर मणि भट्ट, डॉ. भानु प्रकाश उनियाल, श्रीमती शशि गौड़ और अन्य विद्वान आचार्य उपस्थित रहे।

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