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केजीएमयू में फर्जी डॉक्टर  हस्साम अहमद का भंडाफोड़: धर्मांतरण रैकेट और धोखाधड़ी का बड़ा खुलासा

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केजीएमयू में फर्जी डॉक्टर  हस्साम अहमद का भंडाफोड़: धर्मांतरण रैकेट और धोखाधड़ी का बड़ा खुलासा

​लखनऊ के प्रतिष्ठित किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) में खुद को डॉक्टर बताकर छात्र-छात्राओं और मरीजों को ठगने वाले हस्साम अहमद की गिरफ्तारी ने एक सनसनीखेज मामले को जन्म दिया है। पुलिस अब इस मामले की परतें उधेड़ने में जुटी है, जिसमें न केवल धोखाधड़ी, बल्कि धर्मांतरण रैकेट और यौन शोषण के पुराने मामलों से जुड़े तार भी सामने आ रहे हैं।

​मुख्य आरोपी और डॉ. रमीज से कनेक्शन

​पुलिस जांच का मुख्य केंद्र हस्साम अहमद और जेल में बंद डॉ. रमीज के बीच का संबंध है। डॉ. रमीज को पूर्व में धर्मांतरण और यौन शोषण के गंभीर आरोपों में गिरफ्तार किया गया था। आशंका जताई जा रही है कि हस्साम, रमीज के ही पदचिन्हों पर चलते हुए केजीएमयू और अन्य विश्वविद्यालयों की छात्राओं को अपने जाल में फंसा रहा था। पुलिस आरोपी के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और मोबाइल डेटा के जरिए उसके सहयोगियों और मास्टरमाइंड की तलाश कर रही है।

​धोखाधड़ी का तरीका: ‘कॉर्डियो सेवा संस्थान’ और फर्जी दस्तावेज

​हस्साम अहमद ने ‘कॉर्डियो सेवा संस्थान’ नाम से एक ट्रस्ट बना रखा था। इसके जरिए वह युवाओं को पुरस्कार, सम्मान और करियर संवारने के झूठे सपने दिखाता था। उसकी कार्यप्रणाली बेहद शातिर थी ​फर्जी पहचान: वह केजीएमयू में घूमकर खुद को सीनियर डॉक्टर बताता था और छात्र-छात्राओं पर रौब गांठता था।​कूट रचित दस्तावेज: 13 अप्रैल को उसने केजीएमयू के प्रवक्ता प्रो. केके सिंह के फर्जी हस्ताक्षर से एक आमंत्रण पत्र जारी किया। इसमें छात्राओं को एम्स दिल्ली की एक कॉन्फ्रेंस में शामिल होने और अमेरिकी डॉक्टरों से मिलवाने का झांसा दिया गया था।​पहचान की चोरी: आरोपी ने अपने व्हाट्सएप पर भी प्रो. केके सिंह की फोटो लगा रखी थी ताकि लोग उसे सच समझें।

​धर्मांतरण की आशंका और पुलिस की कार्रवाई

​पुलिस को शक है कि आरोपी चिकित्सा शिविरों के बहाने छात्राओं का ब्रेनवॉश कर धर्मांतरण की साजिश रच रहा था। 19 अप्रैल को वह कुछ छात्राओं को हुसैनाबाद स्थित एक चिकित्सा शिविर में भी ले गया था।​FIR और धाराएं: हस्साम के खिलाफ धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेज तैयार करने की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है।​बयान दर्ज: पुराने लखनऊ के शिविर में शामिल छात्राओं के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। पुलिस का कहना है कि बयानों के आधार पर केस में धर्मांतरण से संबंधित धाराएं बढ़ाई जा सकती हैं।​अस्पताल में वसूली: आरोपी पर केजीएमयू में आने वाले गरीब मरीजों से इलाज के नाम पर अवैध वसूली करने का भी आरोप है।

​जांच के अहम बिंदु

​पुलिस उपायुक्त (पश्चिमी) राजकुमार सिंह के अनुसार, मामले की गहराई से जांच की जा रही है। जांच के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:​हस्साम अहमद अनधिकृत रूप से केजीएमयू के भीतर कैसे दाखिल होता था और उसे वहां किसका संरक्षण प्राप्त था?​उसके ‘कॉर्डियो सेवा संस्थान’ ट्रस्ट की फंडिंग और वास्तविक उद्देश्य क्या है?​अब तक उसने कितनी छात्राओं और मरीजों को अपना शिकार बनाया है?

​लखनऊ पुलिस का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में कई और गिरफ्तारियां हो सकती हैं और एक बड़े सिंडिकेट का पर्दाफाश हो सकता है। फिलहाल, आरोपी के मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच जारी है।

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