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नगला तराई में गूंजी देववाणी: सचिव दीपक कुमार ने परखी ‘आदर्श संस्कृत ग्राम’ की प्रगति

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नगला तराई में गूंजी देववाणी: सचिव दीपक कुमार ने परखी ‘आदर्श संस्कृत ग्राम’ की प्रगति

खटीमा/ऊधम सिंह नगर 01 मई, 2026

​उत्तराखंड को ‘संस्कृत प्रदेश’ के रूप में वैश्विक पटल पर स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, आज शासन के सचिव (संस्कृत शिक्षा) श्री दीपक कुमार ने जनपद के आदर्श संस्कृत ग्राम नगला तराई का स्थलीय निरीक्षण किया। ग्राम पंचायत के बहुउद्देशीय भवन में आयोजित इस उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान गाँव के कण-कण में संस्कृत की गूँज सुनाई दी।

परंपरा और आधुनिकता का संगम: भव्य स्वागत

​कार्यक्रम का शुभारंभ ग्राम प्रधान श्री देवेन्द्र सिंह एवं खंड विकास अधिकारी (BDO) श्री संजय कुमार गांधी द्वारा सचिव महोदय के आत्मीय स्वागत और माल्यार्पण के साथ हुआ। बैठक की विशेषता यह रही कि स्वागत सत्कार से लेकर परिचय तक की प्रक्रिया संस्कृत में संपन्न हुई।

​संस्कृत ग्राम के शिक्षार्थियों— करन चंद, प्रीति, इशारा खान, मेहरू निशा, मीणा थापा और रिंकू राणा ने मंत्रमुग्ध कर देने वाले संस्कृत स्वागत गीतों, वंदनाओं और श्लोकों की प्रस्तुति दी। विशेष रूप से श्रीमती मीना थापा ने दैनिक जीवन में संस्कृत मंत्रों के सकारात्मक प्रभाव और उनके वैज्ञानिक महत्व पर अपने विचार साझा किए, जिसे उपस्थित जनसमूह ने सराहा।

संस्कृत अब केवल पूजा-पाठ नहीं, बल्कि रोजगार की भाषा: सचिव

​समीक्षा बैठक को संबोधित करते हुए सचिव दीपक कुमार ने कहा कि उत्तराखंड देश का वह गौरवशाली राज्य है जिसके प्रत्येक जनपद में संस्कृत ग्राम स्थापित किए गए हैं। उन्होंने विभाग की भावी योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए महत्वपूर्ण जानकारी साझा की:​वैश्विक अवसर: संस्कृत शिक्षा विभाग अब इसे देश-विदेश में रोजगार से जोड़ने की मुहिम पर काम कर रहा है।​विदेश मंत्रालय से समन्वय: सचिव ने बताया कि विदेशों में संस्कृत विशेषज्ञों की बढ़ती मांग को देखते हुए भारत सरकार के विदेश मंत्रालय से संपर्क किया जा रहा है ताकि यहाँ के युवाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अवसर मिल सकें।​व्यावहारिक प्रशिक्षण: प्रदेश में ‘षोडश संस्कार’ (सोलह संस्कार) की कार्यशालाओं का आयोजन किया जा रहा है ताकि कर्मकांड और भाषाई कौशल को व्यावसायिक रूप दिया जा सके।

    • श्रुति माध्यम का आह्वान: उन्होंने जनता से अपील की कि वे ‘श्रुति माध्यम’ (सुनकर सीखने की परंपरा) का अधिक से अधिक उपयोग करें ताकि संस्कृत सहजता से बोलचाल का हिस्सा बन सके।

​”संस्कृत हमारी संस्कृति की आत्मा है। उत्तराखंड संस्कृत संस्थानम और विश्वविद्यालय के माध्यम से हम इसे हर घर तक पहुँचाने और युवाओं के लिए आर्थिक संबल बनाने हेतु प्रतिबद्ध हैं।” — दीपक कुमार, सचिव (संस्कृत शिक्षा)

 

प्रशासनिक उपस्थिति और प्रबंधन

​कार्यक्रम का कुशल संचालन और धन्यवाद ज्ञापन संस्कृत ग्राम की प्रशिक्षिका श्रीमती ललिता भट्ट द्वारा किया गया। बैठक में विकास और शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों का जमावड़ा रहा, जिनमें मुख्य रूप से:

 संजय कुमार गांधी (खंड विकास अधिकारी) चन्द्र शेखर जोशी (सहायक खंड विकास अधिकारी)  देवेन्द्र सिंह (ग्राम प्रधान)​सहायक निदेशक (संस्कृत शिक्षा), ग्राम विकास अधिकारी, और एन.आर.एल.एम. (NRLM) स्टाफ उपस्थित रहा।

 नगला तराई का यह निरीक्षण इस बात का प्रमाण है कि उत्तराखंड में संस्कृत केवल कागजों पर नहीं, बल्कि धरातल पर फल-फूल रही है। प्रशासन की इस सक्रियता से उम्मीद है कि आने वाले समय में यहाँ के युवा विश्व स्तर पर देववाणी का परचम लहराएंगे।

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