विद्यालयों के समय में एकीकरण का निर्णय छात्र हित में नहीं: प्रदीप भंडारी
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विद्यालयों के समय में एकीकरण का निर्णय छात्र हित में नहीं: प्रदीप भंडारी
सोहन सिंह
चमोली। राजकीय शिक्षक संघ चमोली के पूर्व जिला अध्यक्ष प्रदीप भंडारी ने शिक्षा विभाग उत्तराखंड द्वारा राज्य के समस्त सरकारी विद्यालयों के संचालन का समय पूरे वर्ष एक समान (सुबह 8:50 से दोपहर 3:15 बजे तक) किए जाने के प्रस्ताव पर कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने इस निर्णय को अव्यावहारिक बताते हुए इसे पहाड़ी राज्य की विषम भौगोलिक परिस्थितियों के प्रतिकूल बताया।
भौगोलिक परिस्थितियाँ और स्वास्थ्य संबंधी चिंताएँ
प्रदीप भंडारी ने तर्क दिया कि केवल समय की एकरूपता लाने के लिए छात्रों के स्वास्थ्य और स्थानीय परिस्थितियों की अनदेखी नहीं की जा सकती। उनके विरोध के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
- कड़ाके की ठंड का प्रकोप: नवंबर से फरवरी तक के महीनों में सुबह जल्दी विद्यालय पहुंचना छोटे बच्चों के लिए स्वास्थ्य के दृष्टि से हानिकारक होगा।
- भीषण गर्मी की चुनौती: अप्रैल, मई, जुलाई और अगस्त की तपती गर्मी में दोपहर 3:15 बजे तक छात्रों का विद्यालय में रुकना कष्टकारी होगा।
- अव्यावहारिक निर्णय: वर्तमान में लागू समय सारणी काफी सोच-विचार के बाद मौसम के अनुकूल बनाई गई है, जिसमें बदलाव की कोई आवश्यकता नहीं है।
गुणवत्ता पर सवाल
पूर्व जिला अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि शिक्षा की गुणवत्ता समय बदलने से नहीं, बल्कि इन बुनियादी सुधारों से आएगी:
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- विद्यालयों में संसाधनों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना।
- छात्रों को आवश्यक शिक्षण सामग्री मुहैया कराना।
- शिक्षकों एवं कार्मिकों की समस्याओं का समय पर निदान करना।
“मौसम के अनुसार ही विद्यालय का समय समायोजित होना चाहिए, तभी शिक्षा और स्वास्थ्य के बीच संतुलन बना रहेगा। शासन को भेजे जाने वाले इस प्रस्ताव पर रोक लगनी चाहिए।” — प्रदीप भंडारी
भावी रणनीति
भंडारी ने बताया कि इस गंभीर विषय से संगठन की उच्च कार्यकारिणी को भी अवगत करा दिया गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शासन से इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाती है, तो भविष्य में सुधार करना असंभव होगा, जिसका सीधा नकारात्मक प्रभाव छात्रों पर पड़ेगा।
