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वार्षिक गृह परीक्षा की लंबी अवधि और द्वितीय पाली पर शिक्षकों का विरोध, चमोली से उठी बदलाव की मांग

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वार्षिक गृह परीक्षा की लंबी अवधि और द्वितीय पाली पर शिक्षकों का विरोध, चमोली से उठी बदलाव की मांग

चमोली। राजकीय शिक्षक संघ चमोली के पूर्व जिला अध्यक्ष प्रदीप भंडारी ने उत्तराखंड में घोषित वार्षिक गृह परीक्षा 2026 के परीक्षा कार्यक्रम (Date Sheet) पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने परीक्षाओं को सीमित अवधि में संपन्न कराने और द्वितीय पाली की परीक्षा को निरस्त करने की मांग करते हुए विद्यार्थियों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य का मुद्दा उठाया है।

42 दिन की लंबी अवधि बढ़ाएगी मानसिक तनाव

​पूर्व जिला अध्यक्ष प्रदीप भंडारी ने कहा कि 12 फरवरी से 25 मार्च तक, यानी लगभग 42 दिनों तक गृह परीक्षाओं का आयोजन करना अव्यावहारिक है। इतनी लंबी अवधि तक परीक्षाओं को खींचने से विद्यार्थियों पर स्वाभाविक रूप से मानसिक दबाव पड़ेगा, जिससे छात्र तनाव का शिकार हो सकते हैं। उन्होंने तर्क दिया कि जहाँ एक ओर ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति’ (NEP) परीक्षा और मूल्यांकन की प्रक्रिया को तनाव रहित बनाने पर जोर देती है, वहीं विभाग द्वारा परीक्षाओं को इतना लंबा खींचना पढ़ाई के प्रवाह को बाधित करेगा।

जंगली जानवरों का खतरा: द्वितीय पाली पर सुरक्षा की चिंता

​पहाड़ों की भौगोलिक परिस्थितियों का हवाला देते हुए भंडारी ने द्वितीय पाली में परीक्षा आयोजित करने का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने कहा कि चमोली जैसे पर्वतीय जनपदों में वर्तमान में जंगली जानवरों (जैसे भालू और बाघ) की सक्रियता काफी बढ़ गई है। ऐसे में शाम के 4 बजे तक छोटे बच्चों की परीक्षा करवाना उनकी सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने जैसा है। शाम के समय बच्चों का घर लौटना जोखिम भरा हो सकता है।

एक ही पाली में परीक्षा कराने की मांग

​छात्रों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को सर्वोपरि रखते हुए, शिक्षक संघ के पूर्व अध्यक्ष ने सुझाव दिया है कि वार्षिक गृह परीक्षा का संचालन केवल एक ही पाली में सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक किया जाना चाहिए। इससे छात्र सुरक्षित समय पर घर पहुँच सकेंगे और पहाड़ों की विषम परिस्थितियों का सामना करने से बचेंगे।

​प्रदीप भंडारी ने शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारियों से मांग की है कि पहाड़ों की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों एवं बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस परीक्षा कार्यक्रम पर पुनर्विचार कर आवश्यक संशोधन किया जाए।

रिपोर्ट: सोहन सिंह, चमोली

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