हिमफेस्ट 2026′ का भव्य समापन: स्पर्श हिमालय विश्वविद्यालय में गूँजा ‘विकसित भारत’ का संकल्प
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हिमफेस्ट 2026′ का भव्य समापन: स्पर्श हिमालय विश्वविद्यालय में गूँजा ‘विकसित भारत’ का संकल्प
देहरादून | 16 फरवरी, 2026
देहरादून स्थित स्पर्श हिमालय विश्वविद्यालय (हिमालय आयुर्वेदिक योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा संस्थान) के स्थापना दिवस समारोह ‘हिमफेस्ट 2026’ का सोमवार को रंगारंग समापन हुआ। पाँच दिनों तक चले इस खेल, शैक्षणिक और सांस्कृतिक महाकुंभ के समापन अवसर पर उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष ऋतु भूषण खंडूरी ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की।
संस्कारवान शिक्षा ही विकसित भारत का आधार: ऋतु भूषण खंडूरी
समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि ऋतु भूषण खंडूरी ने कहा कि स्पर्श हिमालय विश्वविद्यालय केवल कुशल चिकित्सक ही नहीं, बल्कि संवेदनशील और संस्कारवान नागरिकों का निर्माण कर रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री के विजन का उल्लेख करते हुए कहा:
”वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को साकार करने के लिए नैतिक मूल्यों और सुदृढ़ संस्कारों से युक्त शिक्षा अनिवार्य है। नई शिक्षा नीति विद्यार्थियों को निर्णय लेने की स्वतंत्रता प्रदान कर रही है, जो एक दूरदर्शी पहल है।”

मुख्य आकर्षण: अनुशासन और सांस्कृतिक संगम
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और छात्र-छात्राओं की सुमधुर सरस्वती वंदना के साथ हुआ। इसके बाद टैगोर, अशोक, आज़ाद एवं शिवाजी हाउस के विद्यार्थियों ने शानदार मार्च-पास्ट कर अनुशासन की मिसाल पेश की। विद्यार्थियों द्वारा विभिन्न राज्यों की लोक-संस्कृति पर आधारित प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

प्रमुख वक्ताओं के विचार
- डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ (पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री): कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए उन्होंने कहा कि आयुर्वेद केवल चिकित्सा पद्धति नहीं, बल्कि एक वैज्ञानिक जीवन-दर्शन है। उन्होंने विद्यार्थियों से भारतीय परंपराओं पर गर्व करते हुए आधुनिक विज्ञान के साथ समन्वय स्थापित करने का आह्वान किया।
- विदुषी निशंक (संस्थान की उपाध्यक्ष): उन्होंने स्वागत वक्तव्य में कहा कि स्वर्णिम भारत के निर्माण के लिए विद्यार्थियों के ‘स्वर्णिम चरित्र’ का निर्माण अनिवार्य है।
- बृज भूषण गैरोला (डोईवाला विधायक): उन्होंने संस्थान की उपलब्धियों की सराहना करते हुए चिकित्सा सेवा को मानवता की सेवा का माध्यम बताया।
- डॉ. बी. के. एस. संजय (विशिष्ट अतिथि): उन्होंने शिक्षण संस्थान के मूल उद्देश्य के रूप में ‘चरित्र निर्माण’ पर जोर दिया।
- डॉ. राकेश सुंदरियाल (प्रति कुलपति): उन्होंने विश्वविद्यालय की अल्पकालिक शैक्षणिक उपलब्धियों और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास की रूपरेखा प्रस्तुत की।
सम्मान और पुरस्कार वितरण
समापन समारोह में 11 फरवरी से आयोजित खेल, क्विज़ और शैक्षणिक प्रतियोगिताओं के विजेताओं को प्रमाण-पत्र एवं स्मृति-चिह्न प्रदान किए गए। साथ ही, विश्वविद्यालय के उत्कृष्ट अधिकारियों, शिक्षकों, कर्मचारियों और सुरक्षा कर्मियों को उनकी निष्ठावान सेवाओं के लिए विशेष रूप से सम्मानित किया गया।
उपस्थित गणमान्य व्यक्ति (नामावली)
इस भव्य समारोह में क्षेत्र के कई प्रतिष्ठित व्यक्तित्व और शिक्षाविद उपस्थित रहे:
- सुभाष वर्थवाल (राज्य मंत्री)
- नरेंद्र सिंह नेगी (नगर पालिका अध्यक्ष)
- प्रोफेसर प्रदीप भारद्वाज (विश्वविद्यालय अध्यक्ष)
- आर्यन देव उनियाल
- पूजा भारद्वाज (पूर्व आयुष निदेशक)
- डॉ. राजेश नैथानी (पूर्व प्रति कुलपति)
- बालकृष्ण चमोली (संस्थान के सचिव)
- इसके अलावा विभिन्न विभागों के प्राध्यापकगण और भारी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।
