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सादगी का संकल्प: गोपेश्वर के गोपीनाथ मंदिर में रची गई एक आदर्श विवाह गाथा

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सादगी का संकल्प: गोपेश्वर के गोपीनाथ मंदिर में रची गई एक आदर्श विवाह गाथा

By सोहन सिंह

चमोली, उत्तराखंड: आज दिनांक 18 फरवरी 2026 (फाल्गुन 6 गते) को देवभूमि की परंपराओं और आधुनिक विवेक का एक अद्भुत संगम चमोली जिले के गोपेश्वर में देखने को मिला। जहाँ एक ओर आज के दौर में शादियाँ अपार धन-प्रदर्शन, शोर-शराबे और दहेज की कुप्रथाओं से घिरी हुई हैं, वहीं जनपद के नन्दानगर (घाट) क्षेत्र के दो परिवारों ने भगवान गोपीनाथ को साक्षी मानकर एक ऐसी मिसाल पेश की है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक बनेगी।

दिखावे से दूर, देव-आशीर्वाद के करीब

​नन्दानगर के ग्राम पेरी (पलटिंगधार) निवासी सुनीता (पुत्री स्व. मंगली राम) और ग्राम कुरुर निवासी मनोज (पुत्र श्री दलवीर) का विवाह आज ऐतिहासिक गोपीनाथ मंदिर में सादगीपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ। इस विवाह की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इसमें न तो बैंड-बाजे का शोर था और न ही पारंपरिक ढोल-दमाऊ की गूँज। यह विवाह पूरी तरह से आडंबर मुक्त और ‘बिना लेन-देन’ के संपन्न हुआ।

पारिवारिक सरोकार और परंपरा का निर्वहन

​सुनीता के पिता के स्वर्गवास के पश्चात, उनके परिवार ने विपरीत परिस्थितियों में भी हार नहीं मानी। मंदिर के पवित्र प्रांगण में माता श्रीमती बेलमती देवी की उपस्थिति में भाई राकेश और सूरज ने कन्यादान की रस्म निभाई। पवित्र अग्नि के सामने सात फेरे लेकर दोनों ने एक-दूसरे का हाथ थामा। यह क्षण भावुक भी था और गौरवान्वित करने वाला भी, क्योंकि यहाँ धन की चकाचौंध नहीं, बल्कि संस्कारों की चमक थी।

समाज के लिए एक मेसोडायनेमिक मिसाल

​मेसोडायनेमिक्स के सिद्धांत के अनुसार, जब समाज में ‘दिखावा’ एक अनिवार्य नियम (Text) बन जाता है, तब कुछ लोग अपने विवेक से उस नियम को ‘निलंबित’ कर एक नया रास्ता निकालते हैं। सुनीता और मनोज का यह विवाह उसी ‘तीसरे रास्ते’ का प्रमाण है। आज जब गाँवों और शहरों में शादियों के नाम पर कर्ज लेकर फिजूलखर्ची करने का चलन बढ़ गया है, तब बिना दहेज और बिना शोर-शराबे की यह पहल स्वागत योग्य है।

एक स्वागत योग्य पहल

​इस विवाह ने यह सिद्ध कर दिया है कि विवाह का वास्तविक अर्थ दो आत्माओं का मिलन और ईश्वर का आशीर्वाद प्राप्त करना है, न कि धन का प्रदर्शन। चमोली के स्थानीय निवासियों और प्रबुद्ध वर्ग ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे समाज के लिए एक बड़ी सीख बताया है। यह सादगीपूर्ण कदम न केवल आर्थिक बोझ को कम करता है, बल्कि समाज में उन परिवारों को भी संबल देता है जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं।

सुनीता और मनोज का यह विवाह केवल दो व्यक्तियों का मिलन नहीं, बल्कि एक वैचारिक क्रांति है। भगवान गोपीनाथ के आंगन से उठी यह सादगी की लहर निश्चित रूप से चमोली और पूरे उत्तराखंड के समाज को एक सकारात्मक दिशा दिखाएगी।

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