वनाग्नि से जंग की तैयारी: चमोली में जिला प्रशासन और वन विभाग की महा-मॉकड्रिल
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वनाग्नि से जंग की तैयारी: चमोली में जिला प्रशासन और वन विभाग की महा-मॉकड्रिल
सोहन सिंह
चमोली, 19 फरवरी 2026: देवभूमि उत्तराखंड की वन संपदा को ग्रीष्मकाल में वनाग्नि के खतरों से सुरक्षित रखने के लिए आज जनपद चमोली में एक व्यापक और रणनीतिक मॉकड्रिल का आयोजन किया गया। जिलाधिकारी गौरव कुमार के कड़े निर्देशों के अनुपालन में, डीएफओ सर्वेश कुमार दुबे के कुशल नेतृत्व में जिले के विभिन्न वन प्रभागों में वनाग्नि रोकथाम और नियंत्रण को लेकर प्रशासन ने अपनी ताकत और समन्वय का प्रदर्शन किया।
तीन प्रभागों में संयुक्त अभ्यास
इस मॉकड्रिल का आयोजन जनपद के सबसे संवेदनशील क्षेत्रों—केदारनाथ वन्यजीव प्रभाग, बद्रीनाथ वन प्रभाग तथा अलकनंदा सिविल सोयम वन प्रभाग में किया गया। अभ्यास के दौरान यह सुनिश्चित किया गया कि यदि जंगलों में आग लगने जैसी ‘आकस्मिक अवस्था’ पैदा होती है, तो विभाग की प्रतिक्रिया का समय (Response Time) न्यूनतम हो।
तकनीक और कौशल का प्रदर्शन
मॉकड्रिल के दौरान वन कर्मियों ने वनाग्नि नियंत्रण की पारंपरिक और आधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण लिया। इसमें ‘फायर लाइन’ काटने से लेकर अत्याधुनिक उपकरणों के उपयोग तक का प्रदर्शन शामिल था। वहीं, अग्निशमन विभाग (Fire Department) की टीमों ने आग की लपटों पर काबू पाने की जटिल प्रक्रिया का लाइव डेमो दिया।
इस अभ्यास की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित रहीं:
- त्वरित प्रतिक्रिया (Quick Response): सूचना मिलने के कितने समय के भीतर टीमें घटना स्थल पर पहुँचती हैं।
- संसाधनों का समन्वय: उपलब्ध पानी, अग्निशामक यंत्र और मानव शक्ति का इष्टतम उपयोग।
- अंतर्विभागीय तालमेल: वन विभाग के साथ-साथ राजस्व विभाग, SDRF, अग्निशमन और स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने कंधे से कंधा मिलाकर कार्य किया।
साझा रणनीति और सुरक्षा चक्र
मॉकड्रिल का मुख्य उद्देश्य संभावित वनाग्नि की घटनाओं से निपटने के लिए विभागीय तैयारियों को सुदृढ़ करना था। स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने आग की चपेट में आए संभावित घायलों को प्राथमिक उपचार देने और सुरक्षित निकालने (Evacuation) का अभ्यास किया, जबकि एसडीआरएफ ने कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में रेस्क्यू ऑपरेशन का प्रदर्शन किया
