बिरही में गूँजी भोटिया संस्कृति की धमक; द्वितीय जनजातीय समागम में उमड़ा जनसैलाब
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बिरही में गूँजी भोटिया संस्कृति की धमक; द्वितीय जनजातीय समागम में उमड़ा जनसैलाब
बिरही (चमोली) | 19 फरवरी 2026 रिपोर्ट: सोहन सिंह
चमोली। सीमांत क्षेत्रों की जीवंतता और भोटिया समाज की गौरवशाली परंपराओं के संरक्षण हेतु बिरही में आयोजित “द्वितीय जनजातीय समागम” आज सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम ने न केवल उत्तराखंड की जनजातीय अस्मिता को प्रदर्शित किया, बल्कि दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले प्रहरियों के अदम्य साहस को भी नमन किया।
मुख्य अतिथि का संबोधन: “सीमान्त प्रहरी हैं हमारे भोटिया बंधु”

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करने पहुंचे जिला पंचायत अध्यक्ष श्री दौलत सिंह बिष्ट ने दीप प्रज्वलित कर समागम का शुभारंभ किया। भोटिया समाज की पारंपरिक लोक वेशभूषा और लोकगीतों से अभिभूत होकर बिष्ट जी ने कहा:
“हमारे परिश्रमी भोटिया बंधु केवल एक समाज नहीं, बल्कि राष्ट्र के सीमान्त प्रहरी हैं। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में भी उन्होंने अपने गाँवों को न केवल जीवंत रखा है, बल्कि देश की सीमाओं की रक्षा में भी अहम भूमिका निभाई है।”
पोर्टल की खास बातें (Key Highlights):
- सांस्कृतिक वैभव: समागम में भोटिया समाज की समृद्ध लोक कला, पारंपरिक वेशभूषा और लुप्तप्राय लोकगीतों का प्रदर्शन किया गया।
- मातृशक्ति का दम: सुदूरवर्ती क्षेत्रों से आई महिलाओं ने अपनी प्रतिभा और नेतृत्व क्षमता का प्रदर्शन कर समाज को एक सशक्त संदेश दिया।
- आर्थिक मंच: ऐसे मेलों को स्थानीय उत्पादों (हस्तशिल्प और ऊनी वस्त्रों) के लिए आर्थिक विकास का एक बड़ा माध्यम बताया गया।
- सफल आयोजन: स्थानीय कार्यकर्ता सोहन सिंह एवं आयोजन समिति के प्रयासों की चहुंओर सराहना हो रही है।
राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में इस समागम को एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। जिला पंचायत अध्यक्ष ने विश्वास दिलाया कि जनजातीय क्षेत्रों के विकास और उनकी संस्कृति को विश्व पटल पर लाने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने सभी आयोजकों और सहभागियों को इस सफल संगम के लिए हार्दिक बधाई दी।

