सिल्क्यारा टनल रेस्क्यू: 17 दिनों की वो जांबाजी अब पुस्तक के पन्नों में, राम अनुज पत्रकार ने लिखी ‘द टनल ऑफ सिल्क्यारा’
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सिल्क्यारा टनल रेस्क्यू: 17 दिनों की वो जांबाजी अब पुस्तक के पन्नों में, राम अनुज पत्रकार ने लिखी ‘द टनल ऑफ सिल्क्यारा’
By दीपक नारंग
देहरादून/उत्तरकाशी | 25 फरवरी 2026
12 नवंबर 2023, दीपावली का वो दिन जब पूरा देश दीयों की रोशनी में नहाया था, तभी उत्तरकाशी की सिल्क्यारा टनल से आई एक खबर ने पूरे देश की सांसें रोक दी थीं। टनल के अंदर फंसे 41 मजदूरों और उन्हें बाहर निकालने के लिए चले 17 दिनों के महा-रेस्क्यू ऑपरेशन की हर परत अब एक पुस्तक के रूप में दुनिया के सामने आई है। वरिष्ठ संवाददाता राम अनुज, जिन्होंने शून्य से लेकर ऑपरेशन के अंत तक लगातार 18 दिनों तक ग्राउंड जीरो से कवरेज की, उन्होंने ‘द टनल ऑफ सिल्क्यारा’ (The Tunnel of Silkyara) नामक पुस्तक लिखी है।

मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री का मिला अभूतपूर्व सहयोग
पुस्तक के लेखक राम अनुज ने बताया कि यह रेस्क्यू ऑपरेशन दुनिया के सबसे जटिल और बड़े ऑपरेशनों में से एक था। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने खुद मोर्चे पर डटकर जिस तरह से इसकी मॉनिटरिंग की, उसने पूरी टीम का मनोबल बढ़ाया। मुख्यमंत्री ने इस संबंध में बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का इस पूरे अभियान में निरंतर मार्गदर्शन और सहयोग प्राप्त हुआ। केंद्र सरकार के साथ-साथ कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने भी अपने संसाधन झोंक दिए थे।
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दिग्गज मंत्रियों और विशेषज्ञों का जमावड़ा
इस पुस्तक में उल्लेख किया गया है कि किस तरह तत्कालीन केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी, राज्य मंत्री वी.के. सिंह, उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल, पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक और कई राज्यों के मंत्रियों ने मौके पर पहुंचकर व्यवस्थाओं को संभाला।
इतना ही नहीं, इंटरनेशनल टनलिंग एंड अंडरग्राउंड स्पेस एसोसिएशन के अध्यक्ष अर्नोल्ड डिक्स (Arnold Dix) जैसे अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने जिस तरह रणनीति बदली, उसका भी बारीकी से वर्णन किया गया है।
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मशीनरी, तकनीक और ‘बाबा बौखनाग’ की कृपा
लेखक राम अनुज के अनुसार, यह ऑपरेशन सिर्फ भारी-भरकम मशीनों (जैसे ऑगर मशीन) और इंजीनियरिंग का ही नहीं, बल्कि आस्था का भी था। पुस्तक में बताया गया है कि स्थानीय लोगों का सहयोग कितना अहम था।
त्याग और संयम: दीपावली के दिन हादसा होने पर स्थानीय ग्रामीणों ने आतिशबाजी नहीं की और पूरे 17 दिन संयम बरता।
आस्था: पूरे रेस्क्यू के दौरान बाबा बौखनाग की कृपा को भी महसूस किया गया।
असली दिवाली: 28 नवंबर 2023 को जब सभी 41 मजदूर सुरक्षित बाहर आए, तब उत्तराखंड और पूरे देश ने एक साथ दिवाली मनाई।
शोधकर्ताओं के लिए ‘मील का पत्थर’ बनेगी यह पुस्तक
’द टनल का सिल्क्यारा’ राम अनुज की पहली पुस्तक है। उन्होंने इसमें न केवल घटना को कहानियों की तरह सजाया है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय टनल रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए अपनाई गई पॉलिसी (Policy) और SOP का भी जिक्र किया है। लेखक का मानना है कि:
”यह पुस्तक भविष्य में टनल निर्माण और आपदा प्रबंधन से जुड़े शोधकर्ताओं के लिए एक गाइड के रूप में काम करेगी। इससे पता चलेगा कि कैसे विपरीत परिस्थितियों में देश और दुनिया की एजेंसियां एकजुट होकर काम करती हैं।”
राम अनुज ने इस चुनौतीपूर्ण लेखन कार्य में सहयोग के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का विशेष आभार जताया है। यह पुस्तक न केवल एक पत्रकार के अनुभव हैं, बल्कि 41 परिवारों की उम्मीदों और भारत की बढ़ती तकनीकी शक्ति का ऐतिहासिक दस्तावेज भी है।
ब्यूरो रिपोर्ट, न्यूज पोर्टल
