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​Who was Ayatollah Ali Khamenei? मशहद की गलियों से ईरान के ‘सुप्रीम लीडर’ तक—अयातुल्ला अली खामेनेई के उत्थान और पतन की पूरी गाथा

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Who was Ayatollah Ali Khamenei?

मशहद की गलियों से ईरान के ‘सुप्रीम लीडर’ तक—अयातुल्ला अली खामेनेई के उत्थान और पतन की पूरी गाथा

नई दिल्ली/तेहरान | 1 मार्च, 2026

​ईरान के इतिहास में एक युग का अंत हो गया है। अयातुल्ला अली खामेनेई, जिन्होंने दशकों तक न केवल ईरान बल्कि पूरे मध्य पूर्व की राजनीति को अपनी उंगलियों पर नचाया, अब इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गए हैं। आइए जानते हैं एक साधारण मौलवी से दुनिया के सबसे ताकतवर और विवादित नेताओं में से एक बनने तक का उनका सफर।

1. आरंभिक जीवन: गरीबी और धार्मिक निष्ठा

​अली हुसैनी खामेनेई का जन्म 19 अप्रैल, 1939 को ईरान के पवित्र शहर मशहद में हुआ था। उनका परिवार बेहद साधारण और धार्मिक था। उनके पिता एक विद्वान थे, लेकिन आर्थिक स्थिति इतनी तंग थी कि पूरा परिवार एक छोटे से कमरे में रहता था।

  • शिक्षा: खामेनेई ने कम उम्र में ही धार्मिक शिक्षा शुरू की और पवित्र शहर क्योम (Qom) चले गए, जहाँ उन्होंने इस्लामिक दर्शन और न्यायशास्त्र की गहरी समझ हासिल की।

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2. क्रांतिकारी सफर और शाह का विरोध

​1960 के दशक में खामेनेई अयातुल्ला खुमैनी के संपर्क में आए। वह शाह (राजा) के शासन के कट्टर विरोधी बन गए।

  • जेल और यातनाएं: अपनी क्रांतिकारी गतिविधियों के कारण उन्हें 1963 से 1975 के बीच छह बार गिरफ्तार किया गया और भीषण यातनाएं दी गईं।
  • इस्लामिक क्रांति (1979): जब ईरान में क्रांति सफल हुई और शाह को देश छोड़ना पड़ा, तब खामेनेई नई सरकार के मुख्य स्तंभ बनकर उभरे।

3. राष्ट्रपति से ‘सुप्रीम लीडर’ बनने तक का सफर

​खामेनेई ने 1981 से 1989 तक ईरान के राष्ट्रपति के रूप में कार्य किया। इस दौरान उन्होंने ईरान-इराक युद्ध के कठिन समय में देश का नेतृत्व किया।

  • पदभार ग्रहण: 1989 में अयातुल्ला खुमैनी के निधन के बाद, खामेनेई को ईरान का ‘सुप्रीम लीडर’ (सर्वोच्च नेता) चुना गया। तब से लेकर अपनी मृत्यु तक, ईरान का हर बड़ा फैसला—चाहे वह परमाणु कार्यक्रम हो या अमेरिका से दुश्मनी—उन्हीं की मर्जी से हुआ।

4. वंश और परिवार (खामेनेई के वंशज)

​खामेनेई ने 1964 में मंसूर खोजनस्त बाकिरज़ादेह से निकाह किया था। उनके छह बच्चे हैं (चार बेटे और दो बेटियां):

  • मुजतबा खामेनेई: उनके सबसे प्रभावशाली बेटे, जिन्हें अक्सर उनके उत्तराधिकारी के रूप में देखा जाता रहा है।
  • मुस्तफा, मसूद और मेसाम: ये अन्य तीन बेटे भी धार्मिक और राजनीतिक हलकों में सक्रिय रहे हैं।
  • बेटियां: बुशरा और हुदा। उनका वंश ‘सैय्यद’ माना जाता है, जो पैगंबर मोहम्मद के परिवार से अपना नाता जोड़ते हैं।

5. विवाद और विचारधारा: ‘अमेरिका और इजरायल’ के सबसे बड़े दुश्मन

​खामेनेई का शासन कट्टरपंथ और पश्चिम-विरोध के लिए जाना गया।

  • परमाणु कार्यक्रम: उन्होंने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को प्रतिष्ठा का विषय बनाया, जिससे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगे।
  • इजरायल से नफरत: वह इजरायल को ‘कैंसर’ कहते थे और उसे खत्म करने की कसम खाते थे।

6. अंत की ओर: ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ और अंतिम विदाई

​फरवरी 2026 के अंतिम सप्ताह में शुरू हुए “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” ने उनके साम्राज्य की नींव हिला दी। लगातार बिगड़ते स्वास्थ्य और फिर एक सुनियोजित हवाई हमले ने उनके सफर को विराम दे दिया।

1 मार्च, 2026 की सुबह जब सरकारी मीडिया ने उनकी मौत की पुष्टि की, तो यह केवल एक नेता की मौत नहीं थी, बल्कि उस विचारधारा का अंत था जिसने 35 सालों तक ईरान की दिशा तय की थी।

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