चमोली में विश्व पर्यावरण दिवस: ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के साथ पर्यावरण संरक्षण का संकल्प
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चमोली में विश्व पर्यावरण दिवस: ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के साथ पर्यावरण संरक्षण का संकल्प
सोहन सिंह गोपेश्वर (चमोली)। विश्व पर्यावरण दिवस के पावन अवसर पर चमोली जिले में पर्यावरण को स्वच्छ, हरा-भरा और सुरक्षित बनाए रखने के लिए विभिन्न स्थानों पर व्यापक स्तर पर पौधरोपण कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। जिला मुख्यालय गोपेश्वर के घिंघराण रोड स्थित वन पंचायत परिसर में मुख्य कार्यक्रम का आयोजन हुआ, जिसमें प्रशासनिक अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय समुदायों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।
’एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान और प्रशासनिक संदेश
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिलाधिकारी (डीएम) गौरव कुमार ने ‘एक पेड़ माँ के नाम’ राष्ट्रव्यापी अभियान के तहत परिसर में पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। उन्होंने उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित करते हुए आह्वान किया कि केवल पौधे लगाना ही काफी नहीं है, बल्कि उनका जीवित रहना और संरक्षण करना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।
डीएम गौरव कुमार ने भारतीय संस्कृति और पर्यावरण के अंतर्संबंधों को रेखांकित करते हुए कहा:”पर्यावरण संरक्षण केवल एक दिन की औपचारिकता या विषय नहीं है, बल्कि यह हमारी संस्कृति, परंपराओं और जीवन शैली का अभिन्न अंग रहा है। वर्ष 1972 के ऐतिहासिक स्टॉकहोम सम्मेलन से सदियों पहले भी भारतीय सभ्यता में प्रकृति की पूजा और संरक्षण की एक बेहद समृद्ध परंपरा मौजूद रही है। हमारे पूर्वजों ने जल, जंगल और जमीन के महत्व को बखूबी समझा और हमेशा प्रकृति के साथ एक संतुलित तालमेल बिठाकर विकास की अवधारणा को अपनाया।”
जलवायु परिवर्तन और वैश्विक चुनौतियाँ
वर्ष 2026 के विश्व पर्यावरण दिवस की थीम ‘इंस्पायर्ड बाय नेचर, फॉर क्लाइमेट, फॉर आवर फ्यूचर’ (प्रकृति से प्रेरित, जलवायु के लिए, हमारे भविष्य के लिए) का उल्लेख करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि आज के आधुनिक दौर में जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग एक गंभीर वैश्विक संकट बन चुके हैं। असमय मौसम परिवर्तन, ग्लेशियरों का पिघलना और जल संकट इसके प्रत्यक्ष उदाहरण हैं। ऐसे में प्रकृति से सीख लेकर, विकास और पर्यावरण की रक्षा के बीच एक मजबूत संतुलन स्थापित करना समय की सबसे बड़ी मांग है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि हमें अपनी आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित और खुशहाल बनाना है, तो हमें उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों का अत्यंत विवेकपूर्ण और सीमित उपयोग करना होगा।
वनों का महत्व और वनाग्नि नियंत्रण पर चर्चा
कार्यक्रम में उपस्थित विभिन्न वक्ताओं ने वनों की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने स्पष्ट किया कि जंगलों को बचाने की जिम्मेदारी केवल वन विभाग की नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज की एक साझा धरोहर और जिम्मेदारी है। वन हमें न केवल जीवनदायिनी स्वच्छ वायु और ऑक्सीजन प्रदान करते हैं, बल्कि वे हमारे जल स्रोतों को रिचार्ज करते हैं, जैव विविधता की रक्षा करते हैं और स्थानीय स्तर पर आजीविका के अनेक साधन भी उपलब्ध कराते हैं।
उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों के लिए वनाग्नि (जंगलों की आग) को एक अभिशाप बताते हुए वक्ताओं ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि गर्मियों के मौसम में जंगलों को आग से बचाने के लिए जन-जागरूकता और सामुदायिक सहभागिता को बढ़ाना बेहद जरूरी है। ग्रामीण स्तर पर लोगों को जागरूक कर ही वनों को नष्ट होने से बचाया जा सकता है।
शहीद फायर वॉचर को भावभीनी श्रद्धांजलि
इस भावुक क्षण में, वनाग्नि नियंत्रण अभियान के दौरान अपने कर्तव्य का पालन करते हुए सर्वोच्च बलिदान देने वाले फायर वॉचर स्वर्गीय राजेंद्र सिंह को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। कार्यक्रम में उपस्थित सभी अधिकारियों और नागरिकों ने दो मिनट का मौन रखकर उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और देश व पर्यावरण के प्रति उनकी कर्तव्यनिष्ठा को नमन किया।
जागरूकता लघु फिल्म ‘बड़ागं’ का विमोचन
पर्यावरण दिवस के इस विशेष अवसर पर केदारनाथ वन प्रभाग की ओर से तैयार की गई वनाग्नि रोकथाम एवं जनजागरूकता पर आधारित लघु फिल्म ‘बड़ागं’ का आधिकारिक विमोचन किया गया। इस फिल्म का मुख्य उद्देश्य ग्रामीणों और युवाओं को जंगलों में आग लगने के कारणों और उससे होने वाले नुकसान के प्रति सचेत करना है। उपस्थित सभी गणमान्य अतिथियों ने इस शॉर्ट फिल्म की सराहना की और इसे समाज में पर्यावरण के प्रति चेतना जगाने की दिशा में एक बेहद सराहनीय और महत्वपूर्ण पहल बताया।
कार्यक्रम में मुख्य उपस्थिति
इस गरिमामयी कार्यक्रम में जिले के कई वरिष्ठ अधिकारी और जनप्रतिनिधि शामिल हुए, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल रहे:
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नाम |
पद / संगठन |
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दौलत सिंह बिष्ट |
जिला पंचायत अध्यक्ष |
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पंकज कुमार |
वन संरक्षक, नंदा देवी बायोस्फीयर रिजर्व |
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सुरजीत सिंह पंवार |
पुलिस अधीक्षक (SP) |
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डॉ. अभिषेक त्रिपाठी |
मुख्य विकास अधिकारी (CDO) |
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प्रियंका सुंडली |
प्रभागीय वनाधिकारी, अलकनंदा भूमि संरक्षण वन प्रभाग |
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सर्वेश कुमार दुबे |
प्रभागीय वनाधिकारी, बदरीनाथ-केदारनाथ वन प्रभाग |
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सुनीता भट्ट |
वन पंचायत सरपंच, गोपेश्वर |
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विजया बिष्ट |
महिला मंगल दल अध्यक्ष |
इनके अलावा सुशीला सेमवाल, चंद्रकला बिष्ट सहित बड़ी संख्या में स्थानीय महिलाएं, पर्यावरण प्रेमी और वन विभाग के कर्मचारी मौजूद रहे, जिन्होंने पर्यावरण की रक्षा के लिए निरंतर काम करने की शपथ ली
