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वादों के दावों के बीच बूंद-बूंद पानी को तरस रहा दिगोली गांव, प्रशासन की बेरुखी से ग्रामीणों में भारी आक्रोश

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वादों के दावों के बीच बूंद-बूंद पानी को तरस रहा दिगोली गांव, प्रशासन की बेरुखी से ग्रामीणों में भारी आक्रोश

विशेष ब्यूरो, पौड़ी गढ़वाल

पौड़ी। उत्तराखंड में विकास और घर-घर पानी पहुंचाने के सरकारी वादे धरातल पर कितने खोखले साबित हो रहे हैं, इसकी एक बानगी पौड़ी गढ़वाल जिले के दिगोली गांव में देखने को मिल रही है। इस भीषण गर्मी के मौसम में दिगोली गांव के ग्रामीण बूंद-बूंद पानी के लिए मोहताज हो चुके हैं। गांव में पानी की नियमित और सही तरीके से सप्लाई न होने के कारण ग्रामीणों के सामने जीवन-यापन का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। हालात इस कदर बदतर हैं कि लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए मीलों दूर से पानी ढोना पड़ रहा है, जिससे उनका पूरा दिन सिर्फ पानी का इंतजाम करने में ही बीत रहा है।

​प्रशासन और जल संस्थान की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल

​ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और जल संस्थान की कार्यप्रणाली पर बेहद तीखे सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पानी की किल्लत को लेकर उन्होंने एक बार नहीं, बल्कि दर्जनों बार संबंधित अधिकारियों और विभाग के चक्कर काटे, लेकिन हर बार उनकी शिकायत को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। जब ग्रामीणों की सुनवाई स्थानीय स्तर पर नहीं हुई, तो थक-हारकर उन्होंने सीधे जिलाधिकारी (डीएम) महोदय से गुहार लगाई।

​इसके बाद की जो कहानी सामने आई, वह विभागीय अहंकार और लापरवाही को पूरी तरह उजागर करती है। जिलाधिकारी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जल संस्थान को तत्काल पानी की समस्या दूर करने के सख्त आदेश दिए। लेकिन, डीएम के हस्तक्षेप से समस्या सुलझने के बजाय जल संस्थान के इंजीनियर्स इस बात को लेकर नाराज हो गए कि ग्रामीणों ने सीधे उच्चाधिकारियों से शिकायत क्यों की। ग्रामीणों का कहना है कि इंजीनियर्स ने नाराजगी जताते हुए कहा, “यह बात पहले हमें बतानी थी, ऊपर क्यों बताया?”

​कागजी खानापूर्ति: औपचारिकता निभाकर पल्ला झाड़ रहे अधिकारी

​डीएम के आदेश के बाद विभाग ने समस्या का कोई स्थाई समाधान निकालने के बजाय केवल कागजी खानापूर्ति और औपचारिकता निभाकर अपना पल्ला झाड़ लिया। ग्रामीणों के मुताबिक, आदेश के बाद गांव में महज एक-दो पानी के टैंकर भेजकर यह मान लिया गया कि काम पूरा हो गया। हद तो तब हो गई जब गांव में मौजूद एक 35 साल पुराने हैंडपंप, जो पिछले कई सालों से पूरी तरह जंग खा रहा था और बंद पड़ा था, उसे ठीक करने के लिए सिर्फ एक मैकेनिक को भेज दिया गया, ताकि फाइलों में यह दर्ज किया जा सके कि शिकायत पर कार्रवाई हो चुकी है।

​गंदा और लाल रंग का पानी पीने को मजबूर ग्रामीण, बढ़ रहा बीमारियों का खतरा

​विभाग की इस घोर लापरवाही का खामियाजा अब सीधे ग्रामीणों की सेहत को भुगतना पड़ रहा है। पानी के अभाव में जब ग्रामीणों ने मजबूरी में उपलब्ध पानी को पीने के लिए इस्तेमाल किया, तो गांव में लोग बीमार पड़ने लगे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि जो पानी सप्लाई के नाम पर मिल भी रहा है, वह बेहद गंदा और लाल रंग का है, जो किसी भी लिहाज से पीने योग्य नहीं है। जब इस गंदे और दूषित पानी की दोबारा रिपोर्ट की गई, तो जल संस्थान के अधिकारियों ने बेहद गैर-जिम्मेदाराना जवाब देते हुए कह दिया कि “इसका फिल्टर देहरादून से आएगा, तब तक इंतजार करो।”

​सरकार से तत्काल ठोस कदम उठाने की गुहार

​दिगोली गांव के लोगों का कहना है कि सरकारें बड़े-बड़े दावे और वादे करती हैं, जिन्हें देखकर लगता है कि सब कुछ मिल गया हो, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। ग्रामीणों के सामने अब कोई रास्ता नहीं बचा है। उन्होंने राज्य सरकार और मुख्यमंत्री से सीधे इस मामले में दखल देने की गुहार लगाई है। ग्रामीणों की मांग है कि इस जल संकट को दूर करने के लिए तत्काल कोई ठोस और स्थाई कदम उठाया जाए, ताकि गांव में शुद्ध पेयजल की नियमित सप्लाई सुचारू रूप से शुरू हो सके। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनकी इस बुनियादी समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो वे उग्र आंदोलन और कलेक्ट्रेट घेराव के लिए मजबूर होंगे।

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