उत्तराखंड में 77 हजार ट्रांसफॉर्मरों पर लगेंगे कैपेसिटर बैंक, लो-वोल्टेज की समस्या से मिलेगी मुक्ति
1 min read


यूपीसीएल की बड़ी पहल: उत्तराखंड में 77 हजार ट्रांसफॉर्मरों पर लगेंगे कैपेसिटर बैंक, लो-वोल्टेज की समस्या से मिलेगी मुक्ति
देहरादून। उत्तराखंड पावर कारपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) राज्य में बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता सुधारने और उपभोक्ताओं को लो-वोल्टेज की समस्या से निजात दिलाने के लिए एक बड़ी योजना पर काम कर रहा है। यूपीसीएल अब प्रदेश भर के 76,903 वितरण ट्रांसफॉर्मरों (DTs) पर ‘एल.टी. कैपेसिटर बैंक’ स्थापित करने जा रहा है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत कुल 886 MVAR क्षमता के कैपेसिटर बैंक लगाए जा रहे हैं, जिसका कार्य युद्धस्तर पर जारी है।
उपभोक्ताओं को मिलेंगे ये सीधे लाभ
यूपीसीएल के अनुसार, इस तकनीक के इस्तेमाल से बिजली आपूर्ति के बुनियादी ढांचे में क्रांतिकारी बदलाव आएंगे:
- बेहतर वोल्टेज: ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में उपभोक्ताओं को स्थिर और बेहतर वोल्टेज प्राप्त होगा।
- पावर फैक्टर में सुधार: बिजली का कुशल उपयोग सुनिश्चित होगा, जिससे बिजली की बर्बादी कम होगी।
- ट्रांसफॉर्मर फेलियर में कमी: ट्रांसफॉर्मरों और लाइनों पर अतिरिक्त भार कम होने से उनके फुंकने या खराब होने की दर (Failure Rate) में भारी गिरावट आएगी।
- लाइन लॉसेस में कमी: तकनीकी ऊर्जा हानि (Line Losses) रुकने से बिजली चोरी और अनावश्यक खर्च पर लगाम लगेगी।
ऊर्जा संसाधनों का होगा अधिकतम उपयोग
इस योजना से न केवल उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली मिलेगी, बल्कि विभाग को भी आर्थिक लाभ होगा। ट्रांसफॉर्मर और लाइनों के बार-बार खराब होने और उनके मरम्मत पर होने वाले भारी-भरकम खर्च में कमी आएगी। इससे विद्युत तंत्र की परिचालन विश्वसनीयता (Operational Reliability) बढ़ेगी।
प्रबन्ध निदेशक का विजन
यूपीसीएल के प्रबन्ध निदेशक ने बताया कि विभाग उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण बिजली देने के लिए संकल्पबद्ध है। उन्होंने कहा, “एल.टी. कैपेसिटर बैंक की स्थापना एक ऐसी पहल है जो न केवल तकनीकी रूप से तंत्र को मजबूत करेगी, बल्कि राज्य के लाखों उपभोक्ताओं को बेहतर सेवा का सीधा लाभ देगी। इससे राज्य को अपने ऊर्जा संसाधनों का अधिकतम उपयोग करने का अवसर मिलेगा।”
यूपीसीएल का यह कदम उत्तराखंड के ऊर्जा क्षेत्र के आधुनिकीकरण की दिशा में एक मील का पत्थर माना जा रहा है, जो आने वाले समय में बिजली आपूर्ति तंत्र को और अधिक ‘उपभोक्ता-फ्रेंडली’ बनाएगा।
