हिमालयी महाकुंभ का आगाज: नंदा सिद्धपीठ कुरुड़ से इस वर्ष निकलेगी ‘बड़ी जात’, बसंत पंचमी को तय होगा शुभ मुहूर्त
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हिमालयी महाकुंभ का आगाज: नंदा सिद्धपीठ कुरुड़ से इस वर्ष निकलेगी ‘बड़ी जात’, बसंत पंचमी को तय होगा शुभ मुहूर्त
By सोहन सिंह, चमोली नंदानगर (चमोली): उत्तराखंड की लोक संस्कृति और आस्था की प्रतीक मां नंदा की यात्रा का शंखनाद हो गया है। जनपद चमोली के नंदानगर स्थित नंदा सिद्धपीठ कुरुड़ से इस वर्ष भव्य ‘बड़ी जात’ निकालने का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है। इस महायात्रा के शुभ प्रस्थान का मुहूर्त आगामी बसंत पंचमी के दिन गौड़ ब्राह्मणों द्वारा पंचांग गणना के आधार पर निकाला जाएगा।

महापंचायत में एकमत से लिया गया निर्णय नंदानगर में ब्लॉक प्रमुख हेमा देवी की अध्यक्षता और जिला पंचायत अध्यक्ष दौलत सिंह बिष्ट की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित एक विशाल महापंचायत में यह निर्णय लिया गया। बैठक में बधाण पट्टी के 365 गांवों, दशोली और बंड क्षेत्र के 72 गांवों के प्रतिनिधियों, प्रधानों और थोकदारों ने शिरकत की। सभी ने एक स्वर में इस ‘हिमालयी महाकुंभ 2026’ के आगाज के लिए अपनी सहमति जताई।
आयोजन समिति का गठन बड़ी जात को भव्य और सुव्यवस्थित रूप देने के लिए एक उच्चस्तरीय आयोजन समिति का गठन किया गया है:
- संरक्षक: दौलत सिंह बिष्ट (जिला पंचायत अध्यक्ष)।
- सह-संरक्षक: नंदानगर, थराली और देवाल के ब्लॉक प्रमुख।
- अध्यक्ष: कर्नल हरेंद्र सिंह रावत।
- सचिव: अशोक गौड़।
- कोषाध्यक्ष: प्रकाश गौड़। समिति में क्षेत्र के सभी ग्राम प्रधानों को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है ताकि जन-जन की भागीदारी सुनिश्चित हो सके।
पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने का लक्ष्य समिति के पदाधिकारियों और थोकदार वीरेंद्र सिंह रावत ने कहा कि इस वर्ष की बड़ी जात का मुख्य उद्देश्य मां नंदा की इस प्राचीन यात्रा को विश्व पर्यटन मानचित्र पर मजबूती से स्थापित करना है। सामूहिक भागीदारी से आयोजित होने वाली इस यात्रा में विभिन्न क्षेत्रों की देव डोलियां और छंतोलियां भी शामिल होंगी, जिनका भव्य स्वागत किया जाएगा।
प्रमुख हस्तियों की उपस्थिति इस महापंचायत में पीएमओ (PMO) दिल्ली से मनोज पुरोहित, कुरुड़ मंदिर के पुजारी मुंशी चंद्र गौड़, ज्येष्ठ प्रमुख हीरा सिंह बिष्ट, अतुल शाह (पीपलकोटी), और विभिन्न ब्लॉकों के जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। सभी वक्ताओं ने कहा कि यह यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि उत्तराखंड की अटूट परंपरा और हिमालयी गौरव का प्रतीक है। बसंत पंचमी को मुहूर्त निकलते ही यात्रा की तैयारियां युद्ध स्तर पर शुरू कर दी जाएंगी।
