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चमोली: ‘उल्लास’ से रोशन होगा साक्षरता का दीप, डाइट गौचर में दो दिवसीय प्रशिक्षण संपन्न

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चमोली: ‘उल्लास’ से रोशन होगा साक्षरता का1 दीप, डाइट गौचर में दो दिवसीय प्रशिक्षण संपन्न

सोहन सिंह

चमोली (उत्तराखंड): “जब जागें तब सवेरा… उल्लास संग भविष्य सुनहरा।” इसी प्रेरक ध्येय वाक्य के साथ जनपद चमोली में पूर्ण साक्षरता की दिशा में एक नई क्रांति का सूत्रपात हुआ है। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (DIET) गौचर एवं समग्र शिक्षा चमोली के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय ULLAS (Understanding of Lifelong Learning for All in Society) प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया।

साक्षरता मात्र अक्षर ज्ञान नहीं, बल्कि आत्म-सम्मान की राह

​कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि ‘उल्लास’ केवल एक साक्षरता अभियान नहीं है, बल्कि यह समाज के अंतिम व्यक्ति के आत्म-सम्मान, आत्मविश्वास और स्वावलंबन की ओर बढ़ाया गया एक ऐतिहासिक कदम है। शिक्षाविदों का मानना है कि जब एक बुजुर्ग व्यक्ति जीवन के इस पड़ाव पर अपना नाम लिखना सीखता है, तो वह केवल कागज़ पर अक्षर नहीं उकेरता, बल्कि अपने भीतर एक नया आत्मविश्वास गढ़ता है। दर्शनशास्त्र भी इस बात की तस्दीक करता है कि सीखने की कोई निश्चित उम्र नहीं होती; इसके लिए केवल भीतर की जागरूकता और जज़्बे की आवश्यकता होती है।

‘उल्लास’ के पाँच सशक्त स्तंभ

​इस अभियान को प्रभावी बनाने के लिए पाँच प्रमुख बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित किया गया है:

  1. बुनियादी शिक्षा: अक्षर ज्ञान के माध्यम से व्यक्ति को सशक्त बनाना।
  2. जीवन कौशल: दैनिक जीवन की चुनौतियों का सामना करने की क्षमता विकसित करना।
  3. सतत् शिक्षा: यह सुनिश्चित करना कि सीखने की प्रक्रिया कभी न रुके।
  4. डिजिटल साक्षरता: ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को आधुनिक तकनीक और डिजिटल बैंकिंग जैसे कार्यों के लिए तैयार करना।
  5. व्यावसायिक विकास: कौशल विकास के जरिए स्वावलंबन और स्वरोजगार के मार्ग प्रशस्त करना।

शत-प्रतिशत साक्षरता का संकल्प

​डाइट गौचर के प्राचार्य आकाश सारस्वत ने इस अवसर पर जन-भागीदारी का आह्वान करते हुए कहा कि शिक्षा का यह महायज्ञ तभी पूर्ण होगा जब समाज का हर वर्ग इसमें अपनी आहुति देगा। उन्होंने कहा, “हमारा लक्ष्य केवल चमोली या उत्तराखंड को ही नहीं, बल्कि संपूर्ण भारतवर्ष को 100% साक्षर बनाना है। यह संकल्प केवल सरकारी आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हर नागरिक को मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास है।”

​इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में जनपद के विभिन्न ब्लॉक से आए प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिन्हें ‘स्वयंसेवक’ (Volunteer) के रूप में प्रशिक्षित किया गया है। ये स्वयंसेवक अब गाँवों में जाकर उन लोगों को साक्षर करेंगे जो किसी कारणवश अपनी शिक्षा पूरी नहीं कर पाए थे। कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित जनों ने चमोली को पूर्ण साक्षर जनपद बनाने का अटूट संकल्प लिया।

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