विशेष साक्षात्कार: ‘द टनल ऑफ सिल्कियारा’ केवल रेस्क्यू की गाथा नहीं, अंधकार से उजाले की ओर बढ़ने का सफर है — राम अनुज
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विशेष साक्षात्कार: ‘द टनल ऑफ सिल्कियारा’ केवल रेस्क्यू की गाथा नहीं, अंधकार से उजाले की ओर बढ़ने का सफर है — राम अनुज
देहरादून। उत्तरकाशी की सिल्कियारा टनल में फंसे 41 मजदूरों के सकुशल बाहर निकलने की घटना ने पूरी दुनिया को भारत की जिजीविषा से परिचित कराया। इसी ऐतिहासिक मिशन को शब्दबद्ध करने वाले लेखक राम अनुज से South Asia 24×7 के वरिष्ठ संवाददाता दीपक नारंग ने खास बातचीत की। पेश हैं इस बातचीत के मुख्य अंश:
सवाल 1: ‘द टनल ऑफ सिल्कियारा’ की मूल थीम क्या है? आपने इसे लिखने का विचार क्यों किया?
राम अनुज: देखिए, 12 नवंबर 2023 की सुबह जब टनल ढही, तो वह सिर्फ मलबा नहीं था, बल्कि 41 परिवारों की उम्मीदों पर गिरा पहाड़ था। इस पुस्तक की मूल थीम ‘अंधकार से उजाले की तरफ’ का सफर है। यह सिर्फ आधुनिक मशीनों, ड्रिलिंग और कुछ अधिकारियों की रिपोर्ट नहीं है, बल्कि यह मानवीय संवेदनाओं, अटूट विश्वास और सामूहिक प्रार्थनाओं की जीत है। यह किताब बताती है कि जब तकनीक हारने लगी, तब कैसे मानवीय जज्बे ने रास्ता बनाया।
सवाल 2: इस पुस्तक को तैयार करने में आपको किसका और किस तरह का सहयोग मिला?
राम अनुज: यह पुस्तक एक साझा प्रयास का परिणाम है। प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जी का इसमें विशेष मार्गदर्शन रहा। उनके नेतृत्व में जिस तरह राज्य सरकार ने समन्वय बिठाया, वह अद्भुत था। इसके अलावा, तत्कालीन केंद्रीय सड़क परिवहन राज्य मंत्री जनरल वी.के. सिंह, इंटरनेशनल टनल एसोसिएशन के अध्यक्ष अर्नाल्ड डिक्स और नर्मदा बचाओ आंदोलन की प्रणेता मेधा पाटकर जी से हुई विस्तारपूर्वक बातचीत ने इस पुस्तक को प्रमाणिकता दी। इन सभी दिग्गजों के अनुभवों ने कहानी के तकनीकी और मानवीय पहलुओं को जोड़ने में मदद की।
सवाल 3: एक लेखक के तौर पर आपके सामने सबसे बड़ी चुनौतियां क्या थीं?

राम अनुज: सबसे बड़ी चुनौती थी उन 17 दिनों के मानसिक और मनोवैज्ञानिक दबाव को पन्नों पर उतारना। मैंने टनल के भीतर फंसे मजदूरों से लंबी बातचीत की। खासकर, उन मजदूरों का नेतृत्व कर रहे गब्बर सिंह नेगी से बातचीत करना मेरे लिए भावुक क्षण था। इसके अलावा, एसडीआरएफ (SDRF) के तत्कालीन कमांडेंट डॉ. विमलेश जोशी से मिली जानकारियों ने मुझे ऑपरेशन की उन तकनीकी बारीकियों को समझने का मौका दिया, जो आम जनता की नजरों से दूर थीं।
सवाल 4: आपदा प्रबंधन (Disaster Management) को लेकर आपने इस पुस्तक में क्या दृष्टिकोण रखा है?
राम अनुज: मैंने इस पुस्तक में भविष्य के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। सिल्कियारा एक बहुत बड़ा सबक है। मैंने इस बात पर जोर दिया है कि टनल रेस्क्यू ऑपरेशंस को इंटरनेशनल एसओपी (Standard Operating Procedure) के तहत कैसे शुरू किया जाना चाहिए। हिमालयी क्षेत्रों में टनलिंग के दौरान किन सूक्ष्म तकनीकी बातों का ध्यान रखना अनिवार्य है, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति पैदा ही न हो। यह पुस्तक आपदा प्रबंधन के छात्रों और नीति निर्माताओं के लिए एक ‘केस स्टडी’ की तरह काम करेगी।
साक्षात्कार का सार (Takeaway)
वरिष्ठ संवाददाता दीपक नारंग से बातचीत के दौरान लेखक राम अनुज ने स्पष्ट किया कि ‘द टनल ऑफ सिल्कियारा’ आने वाली पीढ़ियों के लिए यह याद दिलाने का जरिया बनेगी कि जब देश एक होकर खड़ा होता है, तो हिमालय की कोख से भी अपनों को सही-सलामत वापस लाया जा सकता है।
रिपोर्टर: दीपक नारंग, वरिष्ठ संवाददाता
माध्यम: South Asia 24×7
दिनांक: 25 फरवरी 2026
