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होली और चंद्रग्रहण का साया: ज्योतिषाचार्य डॉ. घिल्डियाल ने दूर किया ‘भ्रम’, जानें होलिका दहन और धुलेंडी का सही मुहूर्त

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होली और चंद्रग्रहण का साया: ज्योतिषाचार्य डॉ. घिल्डियाल ने दूर किया ‘भ्रम’, जानें होलिका दहन और धुलेंडी का सही मुहूर्त

गोपेश्वर/चमोली: होली के त्यौहार को लेकर इस बार आम जनमानस में तिथियों और मुहूर्त को लेकर भारी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। होलिका दहन 2 मार्च को होगा या 3 को? धुलेंडी कब मनाई जाएगी? इन तमाम सवालों पर प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य डॉ. चंडी प्रसाद घिल्डियाल ने शास्त्रों के प्रमाण के साथ स्थिति स्पष्ट कर दी है।

होलिका दहन: समय और शास्त्र सम्मत विधान

​डॉ. घिल्डियाल के अनुसार, शास्त्रों में फाल्गुन पूर्णिमा को भद्रा रहित प्रदोष काल में होलिका दहन का विधान है। इस वर्ष की गणना इस प्रकार है:

  • विकल्प 1: 2 मार्च की रात्रि को भद्रा के पुच्छ काल में रात्रि 1:27 बजे से 2:39 बजे तक दहन किया जा सकता है।
  • विकल्प 2: 3 मार्च की सुबह भद्रा समाप्ति के बाद प्रातः 5:30 से 6:20 बजे तक का समय समाज के हित में और शास्त्र सम्मत है।
  • विकल्प 3: यदि परिस्थिति अनुकूल न हो, तो 3 मार्च को सांय 7:00 बजे (ग्रहण समाप्ति) से रात्रि 8:30 बजे के बीच भी दहन किया जा सकता है।

चंद्रग्रहण का सूतक और प्रभाव

​इस वर्ष होली पर चंद्रग्रहण का साया भी पड़ रहा है। डॉ. घिल्डियाल ने स्पष्ट किया कि:

  • सूतक काल: 3 मार्च की सुबह 6:20 बजे से शुरू हो जाएगा।
  • ग्रहण का समय: भारतीय समयानुसार दोपहर 3:27 से शाम 6:56 तक ग्रहण दिखाई देगा।
  • राशि प्रभाव: यह खग्रास चंद्रग्रहण सिंह राशि और पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में घटित हो रहा है।
  • पूर्णिमा व्रत: व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को 2 मार्च को ही व्रत रखना अनिवार्य होगा।

4 मार्च को मनेगी ‘धुलेंडी’ (छरोली)

​ग्रहण के कारण रंगों वाली होली यानी धुलेंडी की तारीख में भी बदलाव है। ज्योतिषाचार्य के अनुसार, 3 मार्च को ग्रहण होने के कारण 4 मार्च (फाल्गुन प्रतिपदा) को धुलेंडी मनाना ही शास्त्र सम्मत रहेगा।

“सौहार्द से मनाएं पर्व, दुराग्रह से बचें”

डॉ. घिल्डियाल ने पर्व की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सौरमंडल में ग्रहों की स्थिति बदल रही है, इसलिए किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए सही रंगों का प्रयोग करें। मन में किसी के प्रति बैर न रखें और सामाजिक समरसता व भाईचारे के साथ इस उत्सव का आनंद लें।

 

रिपोर्ट: सोहन सिंह, गोपेश्वर।

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