महाशक्ति का अंत: अयातुल्ला खामेनेई के बाद कौन संभालेगा ईरान की कमान? दुनिया के 5 बड़े देशों की ‘गेम-प्लान’ का पूरा विश्लेषण
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महाशक्ति का अंत: अयातुल्ला खामेनेई के बाद कौन संभालेगा ईरान की कमान? दुनिया के 5 बड़े देशों की ‘गेम-प्लान’ का पूरा विश्लेषण
तेहरान/वॉशिंगटन | 1 मार्च, 2026
अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत ने न केवल ईरान में एक बड़ा राजनीतिक शून्य पैदा कर दिया है, बल्कि पूरी दुनिया को एक अनिश्चित मोड़ पर खड़ा कर दिया है। ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस्लामिक गणराज्य ईरान का अगला ‘सुप्रीम लीडर’ कौन होगा? और क्या अमेरिका-इजरायल की जुगलबंदी ईरान में तख्तापलट कराने में सफल होगी?
1. सत्ता की रेस: कौन होगा ईरान का नया चेहरा?
ईरान की शक्तिशाली ‘मजलिस-ए-खोबरगान’ (Assembly of Experts) नए नेता के चुनाव के लिए गुप्त बैठक कर रही है। रेस में ये नाम सबसे आगे हैं:

- मोजतबा खामेनेई (Mojtaba Khamenei): अली खामेनेई के बेटे और IRGC के चहेते। अगर वे सत्ता संभालते हैं, तो ईरान की कट्टरपंथी नीतियां जारी रहेंगी।
- अली लारीजानी (Ali Larijani): एक मंझे हुए कूटनीतिज्ञ। माना जा रहा है कि वे पश्चिम के साथ तनाव कम करने के लिए ‘मध्यम मार्ग’ अपना सकते हैं।
- सैन्य शासन (IRGC Rule): विशेषज्ञों का मानना है कि औपचारिक रूप से किसी मौलवी को नेता बनाकर, पर्दे के पीछे से रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) पूरी सत्ता अपने हाथ में ले सकते हैं।
2. अमेरिका और इजरायल का ‘डबल गेम’
अमेरिका और इजरायल इस समय ‘प्रतीक्षा करो और देखो’ (Wait and Watch) की नीति अपना रहे हैं:
- वॉशिंगटन का दबाव: राष्ट्रपति ट्रम्प ईरान की नई सरकार पर परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह बंद करने और मिसाइल प्रोग्राम को खत्म करने का भारी दबाव बनाएंगे। अमेरिका का लक्ष्य ईरान को आर्थिक रूप से घुटनों पर लाकर वहां ‘लोकतंत्र’ की स्थापना करना है।
- इजरायल का खौफ: नेतन्याहू सरकार चाहती है कि नया नेता इतना कमजोर हो कि वह हिजबुल्लाह और हमास जैसे समूहों को फंडिंग बंद कर दे।
1. मोजतबा खामेनेई (Mojtaba Khamenei)
- परिचय: ये वर्तमान सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के दूसरे बेटे हैं।
- दावेदारी: रईसी की मृत्यु के बाद उन्हें सबसे शक्तिशाली दावेदार माना जा रहा है। उनके पास शासन के पर्दे के पीछे का लंबा अनुभव है और ‘रिवोल्यूशनरी गार्ड्स’ (IRGC) के साथ उनके गहरे संबंध हैं।
- चुनौती: ईरान में वंशानुगत शासन (Hereditary rule) का विरोध होता रहा है क्योंकि 1979 की क्रांति राजशाही के खिलाफ ही थी। खुद खामेनेई भी सार्वजनिक रूप से इसके खिलाफ बोल चुके हैं।
2. अलिरेज़ा अराफी (Alireza Arafi)
- परिचय: ये एक वरिष्ठ मौलवी हैं और ईरान की ‘असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स’ के उपाध्यक्ष हैं।
- दावेदारी: वे ईरान की धार्मिक शिक्षा प्रणाली (सेमिनरी) के प्रमुख हैं और खामेनेई के काफी करीबी माने जाते हैं। कट्टरपंथी खेमे में उनकी स्वीकार्यता बहुत अधिक है।
- विशेषता: उन्हें एक ‘सिस्टम मैन’ के रूप में देखा जाता है जो शासन की निरंतरता बनाए रख सकते हैं।
3. अली लारीजानी (Ali Larijani)
- परिचय: ईरान की संसद के पूर्व अध्यक्ष और एक अनुभवी राजनेता।
- स्थिति: हालिया रिपोर्टों के अनुसार, खामेनेई ने उन्हें कुछ महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ सौंपी हैं। वे एक व्यावहारिक (Pragmatist) नेता माने जाते हैं जो पश्चिम के साथ रिश्तों में संतुलन बना सकते हैं।

4. अन्य संभावित नाम
- मोहम्मद मेहदी मीरबागेरी (Mohammad Mehdi Mirbagheri): एक बेहद कट्टरपंथी मौलवी, जो इस्लामीकरण के सख्त समर्थक हैं।
- गुलाम-हुसैन मोहसेनी-एजेई (Gholam-Hossein Mohseni-Ejei): ईरान की न्यायपालिका के वर्तमान प्रमुख। उनके पास प्रशासनिक अनुभव और कट्टरपंथी छवि दोनों है।
- हसन खुमैनी (Hassan Khomeini): ईरान की क्रांति के जनक अयातुल्ला खुमैनी के पोते। हालांकि वे सुधारवादियों के करीब हैं, इसलिए उनकी राह मुश्किल मानी जाती है।
सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया
ईरान के संविधान के अनुसार, सर्वोच्च नेता का चुनाव ‘असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स’ (Assembly of Experts) करती है, जिसमें 88 वरिष्ठ मौलवी होते हैं।
विशेष नोट: अगर किसी एक नाम पर सहमति नहीं बनती, तो ईरान में ‘लीडरशिप काउंसिल’ (तीन या पांच सदस्यों की परिषद) बनाने का भी प्रावधान है, जो अस्थायी रूप से देश चला सकती है।
3. रूस, चीन और भारत: किसका क्या दांव पर लगा है?
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अमेरिका (USA)
अमेरिका की भूमिका इस समय ‘सक्रिय हस्तक्षेप’ की है। राष्ट्रपति ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका का स्पष्ट उद्देश्य ईरान में ‘शासन परिवर्तन’ (Regime Change) लाना है।
- रणनीति: अमेरिका सैन्य हमलों के जरिए ईरान के नेतृत्व (Supreme Leader और IRGC) को कमजोर कर रहा है ताकि जनता विद्रोह कर सके।
- उद्देश्य: ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह समाप्त करना और मध्य पूर्व में ईरान के ‘प्रॉक्सिमिटी नेटवर्क’ (Hezbollah, Houthis) को तोड़ना।

2. इज़राइल (Israel)
इज़राइल के लिए यह ‘अस्तित्व की लड़ाई’ जैसा है।
- भूमिका: इज़राइल सीधे सैन्य हमलों और खुफिया ऑपरेशनों (Mossad) के जरिए ईरान के सत्ता संरचना को अस्थिर कर रहा है।
- लक्ष्य: इज़राइल चाहता है कि नया नेतृत्व ऐसा हो जो इज़राइल के विनाश की कसम न खाए। वह ईरान के मिसाइल अड्डों और शीर्ष नेतृत्व को खत्म करने के लिए अमेरिका के साथ मिलकर काम कर रहा है।
3. चीन (China)
चीन की भूमिका ‘प्रतिक्षा और संरक्षण’ (Wait and Watch) की है।
- आर्थिक हित: चीन ईरान के तेल का सबसे बड़ा खरीदार है। वह नहीं चाहेगा कि सत्ता परिवर्तन से उसकी ऊर्जा आपूर्ति (Energy Supply) बाधित हो।
- रणनीतिक रुख: चीन ने अमेरिका-इज़राइल के हमलों की निंदा की है और ‘संप्रभुता’ की बात कर रहा है। वह पर्दे के पीछे से ईरान के वर्तमान तंत्र को आर्थिक और तकनीकी (जैसे सर्विलांस तकनीक) मदद दे सकता है ताकि व्यवस्था बनी रहे।
4. रूस (Russia)
रूस के लिए ईरान एक ‘महत्वपूर्ण सैन्य और रणनीतिक सहयोगी’ है।
- भूमिका: रूस ने इस सैन्य कार्रवाई को ‘बिना उकसावे वाली आक्रामकता’ बताया है। वह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में ईरान का बचाव कर रहा है।
- हित: यूक्रेन युद्ध के बीच रूस ईरान पर अपनी निर्भरता (ड्रोन और मिसाइल तकनीक के लिए) कम नहीं करना चाहता। वह चाहेगा कि सत्ता ऐसे ‘हार्डलाइनर्स’ के पास रहे जो पश्चिम विरोधी हों।
5. भारत (India)
भारत इस समय ‘राजनयिक संतुलन’ (Diplomatic Tightrope) पर चल रहा है।
- चुनौती: भारत के लिए ईरान ‘चाबहार पोर्ट’ और ‘इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर’ (INSTC) के कारण महत्वपूर्ण है।
- भूमिका: भारत ने हिंसा पर चिंता जताई है और बातचीत के जरिए समाधान की अपील की है। भारत की प्राथमिकता वहां रह रहे अपने करीब 10,000 नागरिकों की सुरक्षा और ऊर्जा सुरक्षा (Oil Prices) सुनिश्चित करना है।
- दृष्टिकोण: भारत किसी भी पक्ष का खुलकर समर्थन करने के बजाय अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखना चाहता है।
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