Prayagraj News: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ आशुतोष ब्रह्मचारी ने हाईकोर्ट में दाखिल किया 883 पन्नों का जवाब, यौन शोषण के साक्ष्य होने का दावा
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Prayagraj News: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ आशुतोष ब्रह्मचारी ने हाईकोर्ट में दाखिल किया 883 पन्नों का जवाब, यौन शोषण के साक्ष्य होने का दावा
प्रयागराज (इलाहाबाद): ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य पद को लेकर चर्चा में रहने वाले स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। बटुकों के साथ कथित यौन उत्पीड़न के मामले में शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी ने मंगलवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट में 883 पन्नों का विस्तृत जवाब दाखिल किया। आशुतोष ब्रह्मचारी का दावा है कि इस जवाब में यौन शोषण से जुड़े पुख्ता साक्ष्य और दस्तावेज़ शामिल हैं।
इस हलफनामे के जरिए कोर्ट से स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य मुकुंदानंद की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज करने की पुरजोर मांग की गई है।
883 पन्नों के जवाब में क्या है खास?
आशुतोष ब्रह्मचारी ने हाईकोर्ट में जो हलफनामा दाखिल किया है, वह काफी व्यापक है। इसमें मुख्य रूप से दो बिंदुओं पर प्रहार किया गया है:
- यौन शोषण के साक्ष्य: शिकायतकर्ता ने माघ मेले के दौरान बटुकों (विद्यार्थियों) के साथ हुए कथित यौन उत्पीड़न से जुड़े डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्य कोर्ट को सौंपे हैं।
- पदवी पर सवाल: जवाब में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के ‘शंकराचार्य’ पदवी को लेकर पूर्व में विभिन्न अदालतों द्वारा दिए गए आदेशों का भी हवाला दिया गया है, ताकि उनकी धार्मिक और कानूनी स्थिति को चुनौती दी जा सके।
सुरक्षा मिलने के बाद पहुंचे कोर्ट
गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने पूर्व में सभी पक्षों को 12 मार्च तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया था। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और राज्य सरकार ने अपना पक्ष रख दिया था, लेकिन आशुतोष ब्रह्मचारी ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए नियत तिथि पर जवाब दाखिल नहीं किया था। मंगलवार को पर्याप्त सुरक्षा मिलने के बाद वे हाईकोर्ट पहुंचे और अपना पक्ष रखा।
मामले की पृष्ठभूमि: पॉक्सो कोर्ट से एफआईआर तक
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब आशुतोष ब्रह्मचारी ने जिला न्यायालय में वाद दाखिल कर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्यों पर गंभीर आरोप लगाए।
- 21 फरवरी 2026: पॉक्सो (POCSO) स्पेशल कोर्ट ने आरोपों की गंभीरता को देखते हुए एफआईआर दर्ज कर जांच के आदेश दिए।
- एफआईआर दर्ज: कोर्ट के आदेश पर प्रयागराज के झूंसी थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) और पॉक्सो एक्ट की सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया।
- गिरफ्तारी पर रोक: एफआईआर दर्ज होने के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने हाईकोर्ट की शरण ली। 27 फरवरी को हाईकोर्ट ने अंतरिम राहत देते हुए उनकी गिरफ्तारी पर अगले आदेश तक रोक लगा दी थी।
“हम न्याय की लड़ाई लड़ रहे हैं”
कोर्ट परिसर के बाहर मीडिया से बात करते हुए आशुतोष ब्रह्मचारी ने कहा, “हमने कोर्ट के सामने सारे तथ्य रख दिए हैं। 883 पन्नों के इस जवाब में वह सारी सच्चाई है जो इन लोगों के असली चेहरे को बेनकाब करेगी। बटुकों के साथ जो हुआ वह अक्षम्य है। हमें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है कि अग्रिम जमानत याचिका खारिज होगी और दोषियों को जेल जाना पड़ेगा।”
अगली सुनवाई पर टिकी नजरें
आशुतोष ब्रह्मचारी द्वारा दाखिल इस भारी-भरकम जवाब के बाद अब गेंद हाईकोर्ट के पाले में है। कोर्ट इन साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद तय करेगा कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को मिली गिरफ्तारी से राहत बरकरार रहेगी या पुलिस को कड़ी कार्रवाई की अनुमति दी जाएगी।
