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Strait of Hormuz विश्व की ‘मुख्य धमनी’: होर्मुज जलडमरूमध्य, जहाँ से गुजरता है दुनिया का 30% तेल और अरबों डॉलर की सियासत

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Strait of Hormuz विश्व की ‘मुख्य धमनी’: होर्मुज जलडमरूमध्य, जहाँ से गुजरता है दुनिया का 30% तेल और अरबों डॉलर की सियासत

खाड़ी देश। अंतरराष्ट्रीय राजनीति और वैश्विक अर्थव्यवस्था में अगर कोई एक ऐसा संकरा समुद्री रास्ता है जो पूरी दुनिया को घुटनों पर ला सकता है, तो वह है ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz)। यह मात्र एक जलमार्ग नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा की वह रग है, जिसे दबाने पर दुनिया के विकसित देशों की रफ्तार थम सकती है। आइए जानते हैं इस ऐतिहासिक और रणनीतिक पड़ाव की पूरी कहानी।

भूगोल: 33 किलोमीटर का संकरा गलियारा

​होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी को जोड़ता है। इसके एक तरफ ईरान का तट है और दूसरी तरफ ओमान व संयुक्त अरब अमीरात (UAE)।

  • चौड़ाई: इसकी सबसे कम चौड़ाई मात्र 33 किलोमीटर (21 मील) है।
  • शिपिंग लेन: हालांकि यह 33 किमी चौड़ा है, लेकिन बड़े टैंकरों के लिए सुरक्षित रास्ता बहुत संकरा है। जहाजों के आने और जाने के लिए केवल दो-दो मील (3.2 किमी) चौड़ी लेन ही उपलब्ध हैं। इन दोनों लेनों के बीच दो मील का ‘बफर जोन’ होता है ताकि भीषण ट्रैफिक के बावजूद जहाजों की टक्कर न हो।

तेल का अर्थशास्त्र: 2 करोड़ बैरल का प्रवाह

​इस मार्ग को दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण ‘ऑयल चोकपॉइंट’ कहा जाता है। आँकड़े इसकी गवाही देते हैं:

  • बैरल का गणित: प्रतिदिन इस मार्ग से औसतन 2 करोड़ (20 Million) बैरल कच्चा तेल गुजरता है। यह दुनिया के कुल समुद्री तेल व्यापार का लगभग 30% हिस्सा है।
  • गैस की लाइफलाइन: दुनिया की लगभग 20% तरल प्राकृतिक गैस (LNG) भी इसी रास्ते से गुजरती है। कतर से होने वाली अधिकांश गैस सप्लाई इसी मार्ग पर निर्भर है।
  • टैंकरों की कतार: हर 8 से 10 मिनट में एक विशाल तेल टैंकर यहाँ से गुजरता है। यदि यह मार्ग बंद होता है, तो कच्चे तेल की कीमतें रातों-रात $150 प्रति बैरल के पार जा सकती हैं।

ऐतिहासिक पड़ाव: सदियों पुराना संघर्ष

​होर्मुज का महत्व आज से नहीं, बल्कि सदियों से है।

  1. प्राचीन काल: 10वीं से 15वीं शताब्दी के बीच, ‘होर्मुज साम्राज्य’ व्यापार का सबसे समृद्ध केंद्र था। यहाँ से भारत के मसाले, श्रीलंका के रत्न और चीन का रेशम अरब और यूरोप पहुँचता था।
  2. पुर्तगाली कब्जा: 1507 में पुर्तगाली कमांडर अफोंसो डी अल्बुकर्क ने इस पर कब्जा कर लिया था, क्योंकि वे जानते थे कि जो होर्मुज पर राज करेगा, वह पूरे हिंद महासागर के व्यापार को नियंत्रित करेगा।
  3. ब्रिटिश और फारसी प्रभाव: 1622 में अंग्रेजों और फारस के शाह अब्बास प्रथम ने मिलकर पुर्तगालियों को यहाँ से खदेड़ा। 20वीं सदी में तेल की खोज ने इसके सामरिक महत्व को और बढ़ा दिया।

रणनीतिक तनाव: ईरान बनाम दुनिया

​होर्मुज का उत्तरी हिस्सा ईरान के अधिकार क्षेत्र में आता है। ईरान अक्सर अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ तनाव होने पर इस मार्ग को बंद करने की धमकी देता है। 1980 के दशक के ‘टैंकर युद्ध’ के दौरान ईरान और इराक ने एक-दूसरे के तेल जहाजों पर इसी क्षेत्र में हमले किए थे। आज भी यहाँ होने वाली एक छोटी सी हलचल ग्लोबल मार्केट में भूकंप ला देती है।

भारत के लिए क्यों है खास?

​भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का लगभग 65% कच्चा तेल इसी रास्ते से आयात करता है। इराक, सऊदी अरब और कुवैत जैसे देशों से आने वाले जहाज होर्मुज पार करके ही भारत के बंदरगाहों तक पहुँचते हैं। इसलिए, इस क्षेत्र में किसी भी तरह का युद्ध या तनाव भारत की अर्थव्यवस्था और आम आदमी की जेब (पेट्रोल-डीजल की कीमतें) पर सीधा असर डालता है।

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