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Vibrant Village Scheme: उत्तराखंड के सीमांत गाँवों की बदलेगी सूरत, मुख्य सचिव ने 402 करोड़ के विकास कार्यों को दी मंजूरी

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Vibrant Village Scheme: उत्तराखंड के सीमांत गाँवों की बदलेगी सूरत, मुख्य सचिव ने 402 करोड़ के विकास कार्यों को दी मंजूरी

देहरादून: उत्तराखंड के सीमांत क्षेत्रों (Border Areas) को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में धामी सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। सचिवालय में आयोजित वाइब्रेंट विलेज प्रोजेक्ट की स्टेट लेवल स्क्रीनिंग कमेटी (SLSC) की बैठक में मुख्य सचिव आनंद बर्धन ने 402 करोड़ रुपये के नए विकास प्रस्तावों को मंजूरी प्रदान की है।

​इस योजना का मुख्य उद्देश्य चीन और नेपाल सीमा से सटे गाँवों में पलायन रोकना और वहां बुनियादी सुविधाओं का जाल बिछाकर उन्हें देश की मुख्यधारा से जोड़ना है।

क्या है 402 करोड़ का मास्टर प्लान?

​बैठक में अनुमोदित किए गए प्रस्तावों के तहत सीमांत गाँवों के सर्वांगीण विकास के लिए एक व्यापक रणनीति तैयार की गई है। इन गाँवों को केवल बसाने के लिए नहीं, बल्कि पर्यटन और आजीविका के केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। स्वीकृत धनराशि से निम्नलिखित कार्य किए जाएंगे:

  1. पर्यटन और हाउसिंग: गाँवों में ‘होमस्टे’ और पर्यटन हाउसिंग को बढ़ावा दिया जाएगा ताकि पर्यटक इन सुदूर क्षेत्रों तक पहुँचें।
  2. बुनियादी ढांचा (Infrastructure): ग्राम अवसंरचना, पक्की सड़क संपर्क और सोलर स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था की जाएगी।
  3. शिक्षा और खेल: सीमांत क्षेत्र के बच्चों के लिए स्मार्ट कक्षाएं, खेल के मैदान और स्मॉल जिम सेंटर बनाए जाएंगे।
  4. स्वास्थ्य और कृषि: आधुनिक अस्पतालों का निर्माण और कृषि उत्थान से जुड़ी विभिन्न योजनाओं के जरिए किसानों की आय बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा।

पारदर्शिता और गुणवत्ता पर मुख्य सचिव का सख्त रुख

​समीक्षा बैठक के दौरान मुख्य सचिव आनंद बर्धन ने अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

​”वाइब्रेंट विलेज योजना के तहत होने वाले सभी कार्य पूर्ण पारदर्शिता और उच्च गुणवत्ता के साथ संपन्न होने चाहिए। हमें इन सीमांत गाँवों को ‘आदर्श गाँव’ (Model Villages) के रूप में विकसित करना है, जो अन्य क्षेत्रों के लिए प्रेरणा बन सकें।” – आनंद बर्धन, मुख्य सचिव

 

आउटकम और आजीविका पर नजर

​मुख्य सचिव ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देशित किया कि वे केवल बजट खर्च न करें, बल्कि योजनाओं से मिलने वाले आउटकम (परिणाम) पर ध्यान दें। उन्होंने अधिकारियों से गाँवों की आजीविका में होने वाले बदलाव और दीर्घकालिक लाभों का स्पष्ट विवरण साझा करने को कहा है, ताकि योजना के वास्तविक प्रभाव का मूल्यांकन किया जा सके।

पलायन रोकने की दिशा में ‘वाइब्रेंट विलेज’ संजीवनी

​उत्तराखंड के सीमांत गाँवों से हो रहा पलायन एक गंभीर सुरक्षा और सामाजिक चिंता का विषय रहा है। केंद्र सरकार की ‘वाइब्रेंट विलेज’ योजना के तहत गाँवों में बुनियादी सुविधाएं और रोजगार के अवसर पैदा कर सरकार इन ‘घोस्ट विलेजेस’ (खाली गाँवों) को फिर से आबाद करना चाहती है।

​इस बैठक में सचिव सी. रविशंकर, अपर सचिव अनुराधा पाल, आलोक कुमार पांडेय, नवनीत पांडेय सहित आईटीबीपी (ITBP) और पुलिस प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी शिरकत की। सीमा सुरक्षा और विकास के बीच बेहतर तालमेल बिठाने के लिए आईटीबीपी के इनपुट्स को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

योजना के मुख्य आकर्षण: एक नज़र में

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